डॉ. बी.बी.एल. मधुकर
अध्यक्ष, FORE सोसाइटी
अध्यक्ष, FORE सोसाइटी
“शिक्षा और ज्ञान विचारशील व्यक्तियों के निर्माण तथा विवेक, उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों पर आधारित समाज की रचना के लिए अनिवार्य हैं।”
भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत अध्ययन, चिंतन और जिज्ञासा के लिए एक मूल्यवान आधार प्रदान करती है। ऐसे समय में, जब शिक्षा निरंतर विकसित हो रही है, हमारे पास संरचित शैक्षणिक अध्ययन, शोध और समकालीन दृष्टिकोणों के माध्यम से अपनी विविध ज्ञान परंपराओं से जुड़ने का अवसर है।
FORE में स्कूल ऑफ़ वैदिक साइंसेज़ की परिकल्पना विशेष कार्यक्रमों, शैक्षणिक जुड़ाव और शोध-उन्मुख पहलों के माध्यम से भारत की ज्ञान परंपराओं के अन्वेषण के एक मंच के रूप में की गई है। पारंपरिक ज्ञान, विषय-विशेषज्ञता और व्यवस्थित अध्ययन को एक साथ लाकर यह स्कूल शिक्षार्थियों, विद्वानों और अभ्यासकर्ताओं के लिए सार्थक अवसर सृजित करना चाहता है।
फ़ाउंडेशन फ़ॉर ऑर्गनाइज़ेशनल रिसर्च एंड एजुकेशन के तत्वावधान में यह स्कूल शिक्षा के दायरे का विस्तार करने और विविध क्षेत्रों में बौद्धिक अन्वेषण को प्रोत्साहित करने की हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुझे आशा है कि यह स्कूल अध्ययन, संवाद और ज्ञान-विनिमय के एक मंच के रूप में विकसित होगा और भारत की बौद्धिक विरासत की गहरी समझ में योगदान देगा।
डॉ. बी.बी.एल. मधुकर
अध्यक्ष, FORE सोसाइटी
