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पंचांग · ग्रहण · ह्यूस्टन

2017 के ग्रहण

2017 में 2 सूर्य ग्रहण और 2 चन्द्र ग्रहण हैं; इनमें से 2 ह्यूस्टन से दिखेंगे।

सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।

वर्ष के ग्रहण

सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में। चन्द्र ग्रहण के चरण पृथ्वी पर हर जगह एक ही क्षण होते हैं; दिखना इस पर निर्भर है कि उस समय चन्द्रमा क्षितिज के ऊपर है या नहीं। सूर्य ग्रहण का समय और ग्रास हर नगर में अलग होता है।

चन्द्र ग्रहण

उपच्छाया चन्द्र ग्रहण

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

ह्यूस्टन से दिखेगा

ह्यूस्टन से शाम 6:07 से रात 8:53 तक दिखेगा। चन्द्रमा ग्रहण लगे हुए ही उदित होगा (ग्रस्तोदय)।

ग्रहण के चरण (हर जगह एक ही क्षण)

उपच्छाया स्पर्श
शुक्र, 10 फ़रवरी, शाम 4:34
परमग्रास (मध्य)
शुक्र, 10 फ़रवरी, शाम 6:43
उपच्छाया समाप्त
शुक्र, 10 फ़रवरी, रात 8:53
उपच्छाया ग्रास
0.988

सूतक†: उपच्छाया ग्रहण में चन्द्रमा पर छाया का स्पष्ट भाग नहीं पड़ता; अधिकांश पंचांग इसे ग्रहण नहीं गिनते और सूतक नहीं देते।

सूर्य ग्रहण

कंकणाकृति (वलयाकार) सूर्य ग्रहण

रविवार, 26 फ़रवरी 2017

ह्यूस्टन से नहीं दिखेगा

ह्यूस्टन से नहीं दिखेगा।

पृथ्वी पर ग्रहण

पृथ्वी पर कहीं ग्रहण आरम्भ
रवि, 26 फ़रवरी, सुबह 6:10
केन्द्रीय पथ आरम्भ
रवि, 26 फ़रवरी, सुबह 7:15
परमग्रास
रवि, 26 फ़रवरी, सुबह 8:53
केन्द्रीय पथ समाप्त
रवि, 26 फ़रवरी, सुबह 10:31
पृथ्वी पर ग्रहण पूर्ण समाप्त
रवि, 26 फ़रवरी, सुबह 11:36
परमग्रास पर ग्रास
0.992

सूतक†: ह्यूस्टन में नहीं: ग्रंथ ग्रहण का सूतक वहीं मानते हैं जहाँ वह दिखाई दे।

चन्द्र ग्रहण

खण्डग्रास चन्द्र ग्रहण

सोमवार, 7 अगस्त 2017

ह्यूस्टन से नहीं दिखेगा

ह्यूस्टन से नहीं दिखेगा।

ग्रहण के चरण (हर जगह एक ही क्षण)

उपच्छाया स्पर्श
सोम, 7 अगस्त, सुबह 10:50
स्पर्श (खण्डग्रास आरम्भ)
सोम, 7 अगस्त, दोपहर 12:22
परमग्रास (मध्य)
सोम, 7 अगस्त, दोपहर 1:20
मोक्ष (खण्डग्रास समाप्त)
सोम, 7 अगस्त, दोपहर 2:18
उपच्छाया समाप्त
सोम, 7 अगस्त, दोपहर 3:50
ग्रास (चन्द्र-व्यास का अंश)
0.246

सूतक†: ह्यूस्टन में नहीं: ग्रंथ ग्रहण का सूतक वहीं मानते हैं जहाँ वह दिखाई दे।

सूर्य ग्रहण

खग्रास सूर्य ग्रहण

सोमवार, 21 अगस्त 2017

ह्यूस्टन से दिखेगा

ह्यूस्टन से सुबह 11:46 से दोपहर 2:45 तक दिखेगा।

ह्यूस्टन में समय

स्पर्श
सोम, 21 अगस्त, सुबह 11:46
इस नगर में परमग्रास (मध्य)
सोम, 21 अगस्त, दोपहर 1:16
मोक्ष
सोम, 21 अगस्त, दोपहर 2:45
इस नगर में ग्रास (सूर्य-व्यास का अंश)
0.730

पृथ्वी पर ग्रहण

पृथ्वी पर कहीं ग्रहण आरम्भ
सोम, 21 अगस्त, सुबह 10:46
केन्द्रीय पथ आरम्भ
सोम, 21 अगस्त, सुबह 11:48
परमग्रास
सोम, 21 अगस्त, दोपहर 1:25
केन्द्रीय पथ समाप्त
सोम, 21 अगस्त, दोपहर 3:02
पृथ्वी पर ग्रहण पूर्ण समाप्त
सोम, 21 अगस्त, शाम 4:04
परमग्रास पर ग्रास
1.031

सूतक†: रवि, 20 अगस्त, रात 11:46 से 21 अगस्त, दोपहर 2:45 तक (स्पर्श से 12 घंटे, चार प्रहर पहले से मोक्ष तक)।

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। सूतक की अवधि, किससे गिना जाए (स्पर्श से या ग्रस्तोदय में चन्द्रोदय से), और किन पर लागू हो, इन पर परम्पराएँ अलग हैं। यहाँ नियम है: सूर्य ग्रहण में स्पर्श से 12 घंटे पहले, चन्द्र ग्रहण में 9 घंटे पहले, मोक्ष तक, और केवल जहाँ ग्रहण दिखे। अपने कुल या स्थानीय पंचांग की परम्परा देखें।

यह भी देखें: राहु · केतु · अमावस्या · पूर्णिमा · पर्व और व्रत

समझें

ग्रहण क्या है

सूर्य ग्रहण अमावस्या को होता है, जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है; चन्द्र ग्रहण पूर्णिमा को, जब पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है। ऐसा तभी होता है जब उस समय चन्द्रमा अपनी कक्षा के उन बिन्दुओं के पास हो जहाँ वह सूर्य-पथ को काटता है — इन्हीं बिन्दुओं को ज्योतिष राहु और केतु कहता है।

ग्रंथ ग्रहण की गणना कैसे करते हैं

सूर्य सिद्धान्त के चौथे और पाँचवें अध्याय (चन्द्रग्रहणाधिकार, सूर्यग्रहणाधिकार) में ग्रहण का समय, ग्रास और अवधि निकालने की विधि है: सूर्य, चन्द्र और राहु की स्थिति, उनके बिम्बों का व्यास, और छाया का माप। स्पर्श, मध्य और मोक्ष उसी परम्परा के शब्द हैं।

सूतक के बारे में ग्रंथ क्या कहते हैं

धर्मशास्त्र के निबन्ध (जैसे निर्णय सिन्धु) ग्रहण से पहले के समय को सूतक कहते हैं: सूर्य ग्रहण में चार प्रहर (लगभग 12 घंटे) और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (लगभग 9 घंटे)। इस समय और ग्रहण के दौरान वे जप, ध्यान और स्नान-दान का विधान बताते हैं, तथा बालकों, वृद्धों और रोगियों के लिए छूट देते हैं। सूतक वहीं माना जाता है जहाँ ग्रहण दिखे। परम्पराओं में इसके विवरण अलग-अलग हैं।

सूर्य ग्रहण देखना

सूर्य को नंगी आँखों से, या साधारण धूप के चश्मे, कैमरे या दूरबीन से कभी न देखें, ग्रहण के समय भी नहीं। प्रमाणित सोलर-फ़िल्टर चश्मा या पिनहोल प्रोजेक्शन ही सुरक्षित तरीके हैं। चन्द्र ग्रहण नंगी आँखों से देखना सुरक्षित है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से सूर्य और चन्द्रमा की स्थिति लेकर हर स्पर्श का क्षण ज्यामिति से निकाला गया है। 2026–2027 के ग्रहणों का परमग्रास और स्पर्श-समय NASA के प्रकाशित पूर्वानुमानों से कुछ सेकंड के भीतर मिलते हैं। नगर में दिखने का अर्थ है कि उस समय सूर्य या चन्द्रमा क्षितिज के ऊपर हो।

पंचांग में और