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पंचांग · ग्रहण · बर्मिंघम

2036 के ग्रहण

2036 में 3 सूर्य ग्रहण और 2 चन्द्र ग्रहण हैं; इनमें से 3 बर्मिंघम से दिखेंगे। अगला: खग्रास चन्द्र ग्रहण, सोमवार, 11 फ़रवरी 2036।

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

वर्ष के ग्रहण

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। चन्द्र ग्रहण के चरण पृथ्वी पर हर जगह एक ही क्षण होते हैं; दिखना इस पर निर्भर है कि उस समय चन्द्रमा क्षितिज के ऊपर है या नहीं। सूर्य ग्रहण का समय और ग्रास हर नगर में अलग होता है।

चन्द्र ग्रहण

खग्रास चन्द्र ग्रहण

सोमवार, 11 फ़रवरी 2036

बर्मिंघम से दिखेगा

बर्मिंघम से रात 8:30 से रात 11:52 तक दिखेगा।

ग्रहण के चरण (हर जगह एक ही क्षण)

उपच्छाया स्पर्श
सोम, 11 फ़रवरी, शाम 7:33
स्पर्श (खण्डग्रास आरम्भ)
सोम, 11 फ़रवरी, रात 8:30
खग्रास आरम्भ (सम्मीलन)
सोम, 11 फ़रवरी, रात 9:34
परमग्रास (मध्य)
सोम, 11 फ़रवरी, रात 10:11
खग्रास समाप्त (उन्मीलन)
सोम, 11 फ़रवरी, रात 10:49
मोक्ष (खण्डग्रास समाप्त)
सोम, 11 फ़रवरी, रात 11:52
उपच्छाया समाप्त
मंगल, 12 फ़रवरी, रात 12:50
ग्रास (चन्द्र-व्यास का अंश)
1.300

सूतक†: सोम, 11 फ़रवरी, सुबह 11:30 से रात 11:52 तक (स्पर्श से 9 घंटे, तीन प्रहर पहले से मोक्ष तक)।

सूर्य ग्रहण

खण्डग्रास सूर्य ग्रहण

बुधवार, 27 फ़रवरी 2036

बर्मिंघम से नहीं दिखेगा

बर्मिंघम से नहीं दिखेगा।

पृथ्वी पर ग्रहण

पृथ्वी पर कहीं ग्रहण आरम्भ
बुध, 27 फ़रवरी, रात 2:46
परमग्रास
बुध, 27 फ़रवरी, सुबह 4:45
पृथ्वी पर ग्रहण पूर्ण समाप्त
बुध, 27 फ़रवरी, सुबह 6:44
परमग्रास पर ग्रास
0.634

सूतक†: बर्मिंघम में नहीं: ग्रंथ ग्रहण का सूतक वहीं मानते हैं जहाँ वह दिखाई दे।

सूर्य ग्रहण

खण्डग्रास सूर्य ग्रहण

बुधवार, 23 जुलाई 2036

बर्मिंघम से नहीं दिखेगा

बर्मिंघम से नहीं दिखेगा।

पृथ्वी पर ग्रहण

पृथ्वी पर कहीं ग्रहण आरम्भ
बुध, 23 जुलाई, सुबह 10:33
परमग्रास
बुध, 23 जुलाई, सुबह 11:30
पृथ्वी पर ग्रहण पूर्ण समाप्त
बुध, 23 जुलाई, दोपहर 12:28
परमग्रास पर ग्रास
0.205

सूतक†: बर्मिंघम में नहीं: ग्रंथ ग्रहण का सूतक वहीं मानते हैं जहाँ वह दिखाई दे।

चन्द्र ग्रहण

खग्रास चन्द्र ग्रहण

गुरुवार, 7 अगस्त 2036

बर्मिंघम से दिखेगा

बर्मिंघम से रात 1:55 से सुबह 5:41 तक दिखेगा। मोक्ष से पहले चन्द्रमा अस्त हो जाएगा (ग्रस्तास्त)।

ग्रहण के चरण (हर जगह एक ही क्षण)

उपच्छाया स्पर्श
गुरु, 7 अगस्त, रात 12:45
स्पर्श (खण्डग्रास आरम्भ)
गुरु, 7 अगस्त, रात 1:55
खग्रास आरम्भ (सम्मीलन)
गुरु, 7 अगस्त, रात 3:03
परमग्रास (मध्य)
गुरु, 7 अगस्त, रात 3:51
खग्रास समाप्त (उन्मीलन)
गुरु, 7 अगस्त, सुबह 4:39
मोक्ष (खण्डग्रास समाप्त)
गुरु, 7 अगस्त, सुबह 5:47
उपच्छाया समाप्त
गुरु, 7 अगस्त, सुबह 6:57
ग्रास (चन्द्र-व्यास का अंश)
1.455

सूतक†: बुध, 6 अगस्त, शाम 4:55 से 7 अगस्त, सुबह 5:47 तक (स्पर्श से 9 घंटे, तीन प्रहर पहले से मोक्ष तक)।

सूर्य ग्रहण

खण्डग्रास सूर्य ग्रहण

गुरुवार, 21 अगस्त 2036

बर्मिंघम से दिखेगा

बर्मिंघम से शाम 6:13 से शाम 7:55 तक दिखेगा।

बर्मिंघम में समय

स्पर्श
गुरु, 21 अगस्त, शाम 6:13
इस नगर में परमग्रास (मध्य)
गुरु, 21 अगस्त, शाम 7:05
मोक्ष
गुरु, 21 अगस्त, शाम 7:55
इस नगर में ग्रास (सूर्य-व्यास का अंश)
0.678

पृथ्वी पर ग्रहण

पृथ्वी पर कहीं ग्रहण आरम्भ
गुरु, 21 अगस्त, शाम 4:32
परमग्रास
गुरु, 21 अगस्त, शाम 6:24
पृथ्वी पर ग्रहण पूर्ण समाप्त
गुरु, 21 अगस्त, रात 8:16
परमग्रास पर ग्रास
0.868

सूतक†: गुरु, 21 अगस्त, सुबह 6:13 से शाम 7:55 तक (स्पर्श से 12 घंटे, चार प्रहर पहले से मोक्ष तक)।

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। सूतक की अवधि, किससे गिना जाए (स्पर्श से या ग्रस्तोदय में चन्द्रोदय से), और किन पर लागू हो, इन पर परम्पराएँ अलग हैं। यहाँ नियम है: सूर्य ग्रहण में स्पर्श से 12 घंटे पहले, चन्द्र ग्रहण में 9 घंटे पहले, मोक्ष तक, और केवल जहाँ ग्रहण दिखे। अपने कुल या स्थानीय पंचांग की परम्परा देखें।

यह भी देखें: राहु · केतु · अमावस्या · पूर्णिमा · पर्व और व्रत

समझें

ग्रहण क्या है

सूर्य ग्रहण अमावस्या को होता है, जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है; चन्द्र ग्रहण पूर्णिमा को, जब पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है। ऐसा तभी होता है जब उस समय चन्द्रमा अपनी कक्षा के उन बिन्दुओं के पास हो जहाँ वह सूर्य-पथ को काटता है — इन्हीं बिन्दुओं को ज्योतिष राहु और केतु कहता है।

ग्रंथ ग्रहण की गणना कैसे करते हैं

सूर्य सिद्धान्त के चौथे और पाँचवें अध्याय (चन्द्रग्रहणाधिकार, सूर्यग्रहणाधिकार) में ग्रहण का समय, ग्रास और अवधि निकालने की विधि है: सूर्य, चन्द्र और राहु की स्थिति, उनके बिम्बों का व्यास, और छाया का माप। स्पर्श, मध्य और मोक्ष उसी परम्परा के शब्द हैं।

सूतक के बारे में ग्रंथ क्या कहते हैं

धर्मशास्त्र के निबन्ध (जैसे निर्णय सिन्धु) ग्रहण से पहले के समय को सूतक कहते हैं: सूर्य ग्रहण में चार प्रहर (लगभग 12 घंटे) और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (लगभग 9 घंटे)। इस समय और ग्रहण के दौरान वे जप, ध्यान और स्नान-दान का विधान बताते हैं, तथा बालकों, वृद्धों और रोगियों के लिए छूट देते हैं। सूतक वहीं माना जाता है जहाँ ग्रहण दिखे। परम्पराओं में इसके विवरण अलग-अलग हैं।

सूर्य ग्रहण देखना

सूर्य को नंगी आँखों से, या साधारण धूप के चश्मे, कैमरे या दूरबीन से कभी न देखें, ग्रहण के समय भी नहीं। प्रमाणित सोलर-फ़िल्टर चश्मा या पिनहोल प्रोजेक्शन ही सुरक्षित तरीके हैं। चन्द्र ग्रहण नंगी आँखों से देखना सुरक्षित है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से सूर्य और चन्द्रमा की स्थिति लेकर हर स्पर्श का क्षण ज्यामिति से निकाला गया है। 2026–2027 के ग्रहणों का परमग्रास और स्पर्श-समय NASA के प्रकाशित पूर्वानुमानों से कुछ सेकंड के भीतर मिलते हैं। नगर में दिखने का अर्थ है कि उस समय सूर्य या चन्द्रमा क्षितिज के ऊपर हो।

पंचांग में और