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पंचांग · ग्रहण · बर्मिंघम

2038 के ग्रहण

2038 में 3 सूर्य ग्रहण और 4 चन्द्र ग्रहण हैं; इनमें से 5 बर्मिंघम से दिखेंगे। अगला: कंकणाकृति (वलयाकार) सूर्य ग्रहण, मंगलवार, 5 जनवरी 2038।

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

वर्ष के ग्रहण

सभी समय बर्मिंघम के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। चन्द्र ग्रहण के चरण पृथ्वी पर हर जगह एक ही क्षण होते हैं; दिखना इस पर निर्भर है कि उस समय चन्द्रमा क्षितिज के ऊपर है या नहीं। सूर्य ग्रहण का समय और ग्रास हर नगर में अलग होता है।

सूर्य ग्रहण

कंकणाकृति (वलयाकार) सूर्य ग्रहण

मंगलवार, 5 जनवरी 2038

बर्मिंघम से दिखेगा

बर्मिंघम से दोपहर 1:54 से दोपहर 3:06 तक दिखेगा।

बर्मिंघम में समय

स्पर्श
मंगल, 5 जनवरी, दोपहर 1:54
इस नगर में परमग्रास (मध्य)
मंगल, 5 जनवरी, दोपहर 2:31
मोक्ष
मंगल, 5 जनवरी, दोपहर 3:06
इस नगर में ग्रास (सूर्य-व्यास का अंश)
0.098

पृथ्वी पर ग्रहण

पृथ्वी पर कहीं ग्रहण आरम्भ
मंगल, 5 जनवरी, सुबह 10:58
केन्द्रीय पथ आरम्भ
मंगल, 5 जनवरी, दोपहर 12:03
परमग्रास
मंगल, 5 जनवरी, दोपहर 1:46
केन्द्रीय पथ समाप्त
मंगल, 5 जनवरी, दोपहर 3:28
पृथ्वी पर ग्रहण पूर्ण समाप्त
मंगल, 5 जनवरी, शाम 4:33
परमग्रास पर ग्रास
0.973

सूतक†: मंगल, 5 जनवरी, रात 1:54 से दोपहर 3:06 तक (स्पर्श से 12 घंटे, चार प्रहर पहले से मोक्ष तक)।

चन्द्र ग्रहण

उपच्छाया चन्द्र ग्रहण

गुरुवार, 21 जनवरी 2038

बर्मिंघम से दिखेगा

बर्मिंघम से रात 1:45 से सुबह 5:51 तक दिखेगा।

ग्रहण के चरण (हर जगह एक ही क्षण)

उपच्छाया स्पर्श
गुरु, 21 जनवरी, रात 1:45
परमग्रास (मध्य)
गुरु, 21 जनवरी, रात 3:48
उपच्छाया समाप्त
गुरु, 21 जनवरी, सुबह 5:51
उपच्छाया ग्रास
0.900

सूतक†: उपच्छाया ग्रहण में चन्द्रमा पर छाया का स्पष्ट भाग नहीं पड़ता; अधिकांश पंचांग इसे ग्रहण नहीं गिनते और सूतक नहीं देते।

चन्द्र ग्रहण

उपच्छाया चन्द्र ग्रहण

गुरुवार, 17 जून 2038

बर्मिंघम से दिखेगा

बर्मिंघम से रात 2:15 से सुबह 4:54 तक दिखेगा। मोक्ष से पहले चन्द्रमा अस्त हो जाएगा (ग्रस्तास्त)।

ग्रहण के चरण (हर जगह एक ही क्षण)

उपच्छाया स्पर्श
गुरु, 17 जून, रात 2:15
परमग्रास (मध्य)
गुरु, 17 जून, रात 3:43
उपच्छाया समाप्त
गुरु, 17 जून, सुबह 5:11
उपच्छाया ग्रास
0.442

सूतक†: उपच्छाया ग्रहण में चन्द्रमा पर छाया का स्पष्ट भाग नहीं पड़ता; अधिकांश पंचांग इसे ग्रहण नहीं गिनते और सूतक नहीं देते।

सूर्य ग्रहण

कंकणाकृति (वलयाकार) सूर्य ग्रहण

शुक्रवार, 2 जुलाई 2038

बर्मिंघम से दिखेगा

बर्मिंघम से दोपहर 2:17 से दोपहर 3:42 तक दिखेगा।

बर्मिंघम में समय

स्पर्श
शुक्र, 2 जुलाई, दोपहर 2:17
इस नगर में परमग्रास (मध्य)
शुक्र, 2 जुलाई, दोपहर 3:00
मोक्ष
शुक्र, 2 जुलाई, दोपहर 3:42
इस नगर में ग्रास (सूर्य-व्यास का अंश)
0.142

पृथ्वी पर ग्रहण

पृथ्वी पर कहीं ग्रहण आरम्भ
शुक्र, 2 जुलाई, सुबह 11:36
केन्द्रीय पथ आरम्भ
शुक्र, 2 जुलाई, दोपहर 12:38
परमग्रास
शुक्र, 2 जुलाई, दोपहर 2:31
केन्द्रीय पथ समाप्त
शुक्र, 2 जुलाई, शाम 4:25
पृथ्वी पर ग्रहण पूर्ण समाप्त
शुक्र, 2 जुलाई, शाम 5:26
परमग्रास पर ग्रास
0.991

सूतक†: शुक्र, 2 जुलाई, रात 2:17 से दोपहर 3:42 तक (स्पर्श से 12 घंटे, चार प्रहर पहले से मोक्ष तक)।

चन्द्र ग्रहण

उपच्छाया चन्द्र ग्रहण

शुक्रवार, 16 जुलाई 2038

बर्मिंघम से नहीं दिखेगा

बर्मिंघम से नहीं दिखेगा।

ग्रहण के चरण (हर जगह एक ही क्षण)

उपच्छाया स्पर्श
शुक्र, 16 जुलाई, सुबह 10:58
परमग्रास (मध्य)
शुक्र, 16 जुलाई, दोपहर 12:34
उपच्छाया समाप्त
शुक्र, 16 जुलाई, दोपहर 2:10
उपच्छाया ग्रास
0.500

सूतक†: उपच्छाया ग्रहण में चन्द्रमा पर छाया का स्पष्ट भाग नहीं पड़ता; अधिकांश पंचांग इसे ग्रहण नहीं गिनते और सूतक नहीं देते।

चन्द्र ग्रहण

उपच्छाया चन्द्र ग्रहण

शनिवार, 11 दिसंबर 2038

बर्मिंघम से दिखेगा

बर्मिंघम से शाम 4:00 से शाम 7:53 तक दिखेगा। चन्द्रमा ग्रहण लगे हुए ही उदित होगा (ग्रस्तोदय)।

ग्रहण के चरण (हर जगह एक ही क्षण)

उपच्छाया स्पर्श
शनि, 11 दिसंबर, दोपहर 3:34
परमग्रास (मध्य)
शनि, 11 दिसंबर, शाम 5:43
उपच्छाया समाप्त
शनि, 11 दिसंबर, शाम 7:53
उपच्छाया ग्रास
0.805

सूतक†: उपच्छाया ग्रहण में चन्द्रमा पर छाया का स्पष्ट भाग नहीं पड़ता; अधिकांश पंचांग इसे ग्रहण नहीं गिनते और सूतक नहीं देते।

सूर्य ग्रहण

खग्रास सूर्य ग्रहण

रविवार, 26 दिसंबर 2038

बर्मिंघम से नहीं दिखेगा

बर्मिंघम से नहीं दिखेगा।

पृथ्वी पर ग्रहण

पृथ्वी पर कहीं ग्रहण आरम्भ
शनि, 25 दिसंबर, रात 10:19
केन्द्रीय पथ आरम्भ
शनि, 25 दिसंबर, रात 11:18
परमग्रास
रवि, 26 दिसंबर, रात 12:59
केन्द्रीय पथ समाप्त
रवि, 26 दिसंबर, रात 2:39
पृथ्वी पर ग्रहण पूर्ण समाप्त
रवि, 26 दिसंबर, रात 3:38
परमग्रास पर ग्रास
1.027

सूतक†: बर्मिंघम में नहीं: ग्रंथ ग्रहण का सूतक वहीं मानते हैं जहाँ वह दिखाई दे।

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। सूतक की अवधि, किससे गिना जाए (स्पर्श से या ग्रस्तोदय में चन्द्रोदय से), और किन पर लागू हो, इन पर परम्पराएँ अलग हैं। यहाँ नियम है: सूर्य ग्रहण में स्पर्श से 12 घंटे पहले, चन्द्र ग्रहण में 9 घंटे पहले, मोक्ष तक, और केवल जहाँ ग्रहण दिखे। अपने कुल या स्थानीय पंचांग की परम्परा देखें।

यह भी देखें: राहु · केतु · अमावस्या · पूर्णिमा · पर्व और व्रत

समझें

ग्रहण क्या है

सूर्य ग्रहण अमावस्या को होता है, जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है; चन्द्र ग्रहण पूर्णिमा को, जब पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है। ऐसा तभी होता है जब उस समय चन्द्रमा अपनी कक्षा के उन बिन्दुओं के पास हो जहाँ वह सूर्य-पथ को काटता है — इन्हीं बिन्दुओं को ज्योतिष राहु और केतु कहता है।

ग्रंथ ग्रहण की गणना कैसे करते हैं

सूर्य सिद्धान्त के चौथे और पाँचवें अध्याय (चन्द्रग्रहणाधिकार, सूर्यग्रहणाधिकार) में ग्रहण का समय, ग्रास और अवधि निकालने की विधि है: सूर्य, चन्द्र और राहु की स्थिति, उनके बिम्बों का व्यास, और छाया का माप। स्पर्श, मध्य और मोक्ष उसी परम्परा के शब्द हैं।

सूतक के बारे में ग्रंथ क्या कहते हैं

धर्मशास्त्र के निबन्ध (जैसे निर्णय सिन्धु) ग्रहण से पहले के समय को सूतक कहते हैं: सूर्य ग्रहण में चार प्रहर (लगभग 12 घंटे) और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (लगभग 9 घंटे)। इस समय और ग्रहण के दौरान वे जप, ध्यान और स्नान-दान का विधान बताते हैं, तथा बालकों, वृद्धों और रोगियों के लिए छूट देते हैं। सूतक वहीं माना जाता है जहाँ ग्रहण दिखे। परम्पराओं में इसके विवरण अलग-अलग हैं।

सूर्य ग्रहण देखना

सूर्य को नंगी आँखों से, या साधारण धूप के चश्मे, कैमरे या दूरबीन से कभी न देखें, ग्रहण के समय भी नहीं। प्रमाणित सोलर-फ़िल्टर चश्मा या पिनहोल प्रोजेक्शन ही सुरक्षित तरीके हैं। चन्द्र ग्रहण नंगी आँखों से देखना सुरक्षित है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से सूर्य और चन्द्रमा की स्थिति लेकर हर स्पर्श का क्षण ज्यामिति से निकाला गया है। 2026–2027 के ग्रहणों का परमग्रास और स्पर्श-समय NASA के प्रकाशित पूर्वानुमानों से कुछ सेकंड के भीतर मिलते हैं। नगर में दिखने का अर्थ है कि उस समय सूर्य या चन्द्रमा क्षितिज के ऊपर हो।

पंचांग में और