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School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Ahoi Ashtami

अहोई अष्टमी

दीपावली से आठ दिन पहले संतान के लिए माताओं का व्रत, तारों के उदय पर पूर्ण।

2031 में: शुक्रवार, 7 नवंबर 2031 (नई दिल्ली)

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2031

शुक्रवार, 7 नवंबर 2031

2031 में तिथि 6 नवंबर, रात 11:19 से 8 नवंबर, रात 1:41 तक है; शुक्रवार, 7 नवंबर 2031 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए अहोई अष्टमी इसी दिन है।

2032

मंगलवार, 26 अक्टूबर 2032

2032 में तिथि 25 अक्टूबर, शाम 7:04 से 26 अक्टूबर, रात 9:00 तक है; मंगलवार, 26 अक्टूबर 2032 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए अहोई अष्टमी इसी दिन है।

तारीख कैसे तय होती है

अहोई अष्टमी चान्द्र मास आश्विन के कृष्ण पक्ष का आठवाँ दिन (अष्टमी) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह तिथि चल रही हो। उत्तर भारत की पूर्णिमान्त गणना में यही पखवाड़ा कार्तिक मास में गिना जाता है।

परिचय

अहोई अष्टमी अमांत गणना में आश्विन कृष्ण पक्ष की आठवीं तिथि को पड़ती है (उत्तर में कार्तिक कृष्ण अष्टमी), करवा चौथ के चार दिन बाद और दीपावली से आठ दिन पहले, अक्टूबर या नवंबर में। व्रत संध्या में तारों के पहले दर्शन पर खोला जाता है, इसलिए जिस दिन की संध्या में अष्टमी हो वही दिन चुना जाता है। अहोई माता का चित्र दीवार पर बनाया या टाँगा जाता है और तारे दिखने से पहले कथा कही जाती है। यह उसी क्षेत्र में, प्रायः उन्हीं घरों में, रखा जाता है जहाँ करवा चौथ।

कैसे मनाया जाता है

माताओं का दिन भर का उपवास, संध्या में अहोई कथा, और भोजन से पहले तारों को अर्घ्य।

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