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School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Ahoi Ashtami

अहोई अष्टमी

कार्तिक कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमान्त) को संतान के लिए माताओं का व्रत, तारों के उदय पर पूर्ण।

2036 में: रविवार, 12 अक्टूबर 2036 (नई दिल्ली)

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2036

रविवार, 12 अक्टूबर 2036

2036 में तिथि 12 अक्टूबर, दोपहर 12:31 से 13 अक्टूबर, सुबह 10:43 तक है; रविवार, 12 अक्टूबर 2036 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए अहोई अष्टमी इसी दिन है।

2037

शनिवार, 31 अक्टूबर 2037

2037 में तिथि 31 अक्टूबर, दोपहर 3:08 से 1 नवंबर, दोपहर 1:55 तक है; शनिवार, 31 अक्टूबर 2037 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए अहोई अष्टमी इसी दिन है।

तारीख कैसे तय होती है

अहोई अष्टमी चान्द्र मास आश्विन के कृष्ण पक्ष का आठवाँ दिन (अष्टमी) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह तिथि चल रही हो। उत्तर भारत की पूर्णिमान्त गणना में यही पखवाड़ा कार्तिक मास में गिना जाता है।

परिचय

अहोई अष्टमी उत्तर भारत की पूर्णिमान्त गणना में कार्तिक कृष्ण पक्ष की आठवीं तिथि को पड़ती है, जो अमांत गणना में आश्विन कृष्ण अष्टमी है, अक्टूबर या नवंबर में। करवा चौथ चार तिथि पहले और दीपावली की अमावस्या सात तिथि बाद आती है, इसलिए दिनों का अंतर हर वर्ष बदलता है। व्रत संध्या में तारों के पहले दर्शन पर खोला जाता है, इसलिए जिस दिन की संध्या में अष्टमी हो वही दिन चुना जाता है। अहोई माता का चित्र दीवार पर बनाया या टाँगा जाता है और तारे दिखने से पहले कथा कही जाती है। यह उसी क्षेत्र में, प्रायः उन्हीं घरों में, रखा जाता है जहाँ करवा चौथ।

कैसे मनाया जाता है

माताओं का दिन भर का उपवास, संध्या में अहोई कथा, और भोजन से पहले तारों को अर्घ्य।

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