2000
- गुरुवार, 6 जनवरी 2000 · Margashirsha Amavasya
- शनिवार, 5 फ़रवरी 2000 · Mauni Amavasya (Shani)
- सोमवार, 6 मार्च 2000 · Magha Amavasya (Somvati)
- मंगलवार, 4 अप्रैल 2000 · Phalguna Amavasya (Bhaumvati)
- गुरुवार, 4 मई 2000 · Chaitra Amavasya
- शुक्रवार, 2 जून 2000 · Vat Savitri Amavasya
- शनिवार, 1 जुलाई 2000 · Jyeshtha Amavasya (Shani)
- सोमवार, 31 जुलाई 2000 · Hariyali Amavasya (Somvati)
- मंगलवार, 29 अगस्त 2000 · Shravana Amavasya (Bhaumvati)
- बुधवार, 27 सितंबर 2000 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya
- शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2000 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya
- शनिवार, 25 नवंबर 2000 · Kartika Amavasya (Shani)
- सोमवार, 25 दिसंबर 2000 · Margashirsha Amavasya (Somvati)
2001
- बुधवार, 24 जनवरी 2001 · Mauni Amavasya
- शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2001 · Magha Amavasya
- शनिवार, 24 मार्च 2001 · Phalguna Amavasya (Shani)
- सोमवार, 23 अप्रैल 2001 · Chaitra Amavasya (Somvati)
- बुधवार, 23 मई 2001 · Vat Savitri Amavasya
- गुरुवार, 21 जून 2001 · Jyeshtha Amavasya
- शुक्रवार, 20 जुलाई 2001 · Hariyali Amavasya
- रविवार, 19 अगस्त 2001 · Shravana Amavasya
- सोमवार, 17 सितंबर 2001 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya (Somvati)
- मंगलवार, 16 अक्टूबर 2001 · Adhika Ashwina Amavasya (Bhaumvati)
- गुरुवार, 15 नवंबर 2001 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya
- शुक्रवार, 14 दिसंबर 2001 · Kartika Amavasya
तारीख कैसे तय होती है
हर अमावस्या, उस दिन जब सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि चल रही हो। सोमवार की अमावस्या सोमवती, मंगलवार की भौमवती और शनिवार की शनि अमावस्या कहलाती है। अमावस्या कृष्ण पक्ष में है, इसलिए दोनों मास-नाम दिए हैं।
परिचय
अमावस्या वह तिथि है जिसमें चंद्रमा का भोगांश सूर्य के भोगांश पर लौटता है और कृष्ण पक्ष तथा, अमांत गणना में, मास का समापन करता है। यह पितरों की तिथि है और पूर्वजों के लिए तर्पण इसका नियमित आचरण है; श्राद्ध के लिए अपराह्न निर्णायक काल है, इसलिए जिस दिन के अपराह्न में अमावस्या हो वही दिन चुना जाता है। कई नामित अमावस्याएँ विशेष हैं: पितृ पक्ष का समापन करने वाली सर्वपितृ अमावस्या, आश्विन अमावस्या की दीपावली, पौष की मौनी अमावस्या, और सोमवार (सोमवती) या शनिवार (शनि) की कोई भी अमावस्या। सूर्यग्रहण केवल अमावस्या को ही हो सकता है, इसीलिए ग्रहण-नियम इससे जुड़े हैं।
कैसे मनाया जाता है
अपराह्न में पूर्वजों के लिए तर्पण, सोमवती और मौनी अमावस्या को नदी-स्नान, और संध्या में दीप।
