2014
- बुधवार, 1 जनवरी 2014 · Margashirsha Amavasya
- गुरुवार, 30 जनवरी 2014 · Mauni Amavasya
- शनिवार, 1 मार्च 2014 · Magha Amavasya (Shani)
- रविवार, 30 मार्च 2014 · Phalguna Amavasya
- मंगलवार, 29 अप्रैल 2014 · Chaitra Amavasya (Bhaumvati)
- बुधवार, 28 मई 2014 · Vat Savitri Amavasya
- शुक्रवार, 27 जून 2014 · Jyeshtha Amavasya
- शनिवार, 26 जुलाई 2014 · Hariyali Amavasya (Shani)
- सोमवार, 25 अगस्त 2014 · Shravana Amavasya (Somvati)
- बुधवार, 24 सितंबर 2014 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya
- गुरुवार, 23 अक्टूबर 2014 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya
- शनिवार, 22 नवंबर 2014 · Kartika Amavasya (Shani)
- रविवार, 21 दिसंबर 2014 · Margashirsha Amavasya
2015
- मंगलवार, 20 जनवरी 2015 · Mauni Amavasya (Bhaumvati)
- बुधवार, 18 फ़रवरी 2015 · Magha Amavasya
- शुक्रवार, 20 मार्च 2015 · Phalguna Amavasya
- शनिवार, 18 अप्रैल 2015 · Chaitra Amavasya (Shani)
- सोमवार, 18 मई 2015 · Vat Savitri Amavasya (Somvati)
- मंगलवार, 16 जून 2015 · Jyeshtha Amavasya (Bhaumvati)
- गुरुवार, 16 जुलाई 2015 · Adhika Ashadha Amavasya
- शुक्रवार, 14 अगस्त 2015 · Hariyali Amavasya
- रविवार, 13 सितंबर 2015 · Shravana Amavasya
- सोमवार, 12 अक्टूबर 2015 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya (Somvati)
- बुधवार, 11 नवंबर 2015 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya
- शुक्रवार, 11 दिसंबर 2015 · Kartika Amavasya
तारीख कैसे तय होती है
हर अमावस्या, उस दिन जब सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि चल रही हो। सोमवार की अमावस्या सोमवती, मंगलवार की भौमवती और शनिवार की शनि अमावस्या कहलाती है। अमावस्या कृष्ण पक्ष में है, इसलिए दोनों मास-नाम दिए हैं।
परिचय
अमावस्या वह तिथि है जिसमें चंद्रमा का भोगांश सूर्य के भोगांश पर लौटता है और कृष्ण पक्ष तथा, अमांत गणना में, मास का समापन करता है। यह पितरों की तिथि है और पूर्वजों के लिए तर्पण इसका नियमित आचरण है; श्राद्ध के लिए अपराह्न निर्णायक काल है, इसलिए जिस दिन के अपराह्न में अमावस्या हो वही दिन चुना जाता है। कई नामित अमावस्याएँ विशेष हैं: पितृ पक्ष का समापन करने वाली सर्वपितृ अमावस्या, आश्विन अमावस्या की दीपावली, पौष की मौनी अमावस्या, और सोमवार (सोमवती) या शनिवार (शनि) की कोई भी अमावस्या। सूर्यग्रहण केवल अमावस्या को ही हो सकता है, इसीलिए ग्रहण-नियम इससे जुड़े हैं।
कैसे मनाया जाता है
अपराह्न में पूर्वजों के लिए तर्पण, सोमवती और मौनी अमावस्या को नदी-स्नान, और संध्या में दीप।
