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School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Amavasya (all)

अमावस्या (सभी)

प्रत्येक मास की अमावस्या, तीसवीं तिथि, पितरों के लिए।

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2029

  • रविवार, 14 जनवरी 2029 · Mauni Amavasya
  • मंगलवार, 13 फ़रवरी 2029 · Magha Amavasya (Bhaumvati)
  • गुरुवार, 15 मार्च 2029 · Phalguna Amavasya
  • शुक्रवार, 13 अप्रैल 2029 · Adhika Chaitra Amavasya
  • रविवार, 13 मई 2029 · Chaitra Amavasya
  • मंगलवार, 12 जून 2029 · Vat Savitri Amavasya (Bhaumvati)
  • बुधवार, 11 जुलाई 2029 · Jyeshtha Amavasya
  • शुक्रवार, 10 अगस्त 2029 · Hariyali Amavasya
  • शनिवार, 8 सितंबर 2029 · Shravana Amavasya (Shani)
  • रविवार, 7 अक्टूबर 2029 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya
  • मंगलवार, 6 नवंबर 2029 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya (Bhaumvati)
  • बुधवार, 5 दिसंबर 2029 · Kartika Amavasya

2030

  • शुक्रवार, 4 जनवरी 2030 · Margashirsha Amavasya
  • शनिवार, 2 फ़रवरी 2030 · Mauni Amavasya (Shani)
  • सोमवार, 4 मार्च 2030 · Magha Amavasya (Somvati)
  • मंगलवार, 2 अप्रैल 2030 · Phalguna Amavasya (Bhaumvati)
  • गुरुवार, 2 मई 2030 · Chaitra Amavasya
  • शनिवार, 1 जून 2030 · Vat Savitri Amavasya (Shani)
  • रविवार, 30 जून 2030 · Jyeshtha Amavasya
  • मंगलवार, 30 जुलाई 2030 · Hariyali Amavasya (Bhaumvati)
  • बुधवार, 28 अगस्त 2030 · Shravana Amavasya
  • शुक्रवार, 27 सितंबर 2030 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya
  • शनिवार, 26 अक्टूबर 2030 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya (Shani)
  • सोमवार, 25 नवंबर 2030 · Kartika Amavasya (Somvati)
  • मंगलवार, 24 दिसंबर 2030 · Margashirsha Amavasya (Bhaumvati)

तारीख कैसे तय होती है

हर अमावस्या, उस दिन जब सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि चल रही हो। सोमवार की अमावस्या सोमवती, मंगलवार की भौमवती और शनिवार की शनि अमावस्या कहलाती है।

परिचय

अमावस्या वह तिथि है जिसमें चंद्रमा का भोगांश सूर्य के भोगांश पर लौटता है और कृष्ण पक्ष तथा, अमांत गणना में, मास का समापन करता है। यह पितरों की तिथि है और पूर्वजों के लिए तर्पण इसका नियमित आचरण है; श्राद्ध के लिए अपराह्न निर्णायक काल है, इसलिए जिस दिन के अपराह्न में अमावस्या हो वही दिन चुना जाता है। कई नामित अमावस्याएँ विशेष हैं: पितृ पक्ष का समापन करने वाली सर्वपितृ अमावस्या, आश्विन अमावस्या की दीपावली, पौष की मौनी अमावस्या, और सोमवार (सोमवती) या शनिवार (शनि) की कोई भी अमावस्या। सूर्यग्रहण केवल अमावस्या को ही हो सकता है, इसीलिए ग्रहण-नियम इससे जुड़े हैं।

कैसे मनाया जाता है

अपराह्न में पूर्वजों के लिए तर्पण, सोमवती और मौनी अमावस्या को नदी-स्नान, और संध्या में दीप।

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