2032
- सोमवार, 12 जनवरी 2032 · Margashirsha Amavasya (Somvati)
- बुधवार, 11 फ़रवरी 2032 · Mauni Amavasya
- गुरुवार, 11 मार्च 2032 · Magha Amavasya
- शनिवार, 10 अप्रैल 2032 · Phalguna Amavasya (Shani)
- रविवार, 9 मई 2032 · Chaitra Amavasya
- मंगलवार, 8 जून 2032 · Vat Savitri Amavasya (Bhaumvati)
- बुधवार, 7 जुलाई 2032 · Jyeshtha Amavasya
- शुक्रवार, 6 अगस्त 2032 · Hariyali Amavasya
- शनिवार, 4 सितंबर 2032 · Shravana Amavasya (Shani)
- सोमवार, 4 अक्टूबर 2032 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya (Somvati)
- बुधवार, 3 नवंबर 2032 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya
- गुरुवार, 2 दिसंबर 2032 · Kartika Amavasya
2033
- शनिवार, 1 जनवरी 2033 · Margashirsha Amavasya (Shani)
- रविवार, 30 जनवरी 2033 · Mauni Amavasya
- मंगलवार, 1 मार्च 2033 · Magha Amavasya (Bhaumvati)
- बुधवार, 30 मार्च 2033 · Phalguna Amavasya
- शुक्रवार, 29 अप्रैल 2033 · Chaitra Amavasya
- शनिवार, 28 मई 2033 · Vat Savitri Amavasya (Shani)
- रविवार, 26 जून 2033 · Jyeshtha Amavasya
- मंगलवार, 26 जुलाई 2033 · Hariyali Amavasya (Bhaumvati)
- बुधवार, 24 अगस्त 2033 · Shravana Amavasya
- शुक्रवार, 23 सितंबर 2033 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya
- रविवार, 23 अक्टूबर 2033 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya
- सोमवार, 21 नवंबर 2033 · Kartika Amavasya (Somvati)
- बुधवार, 21 दिसंबर 2033 · Margashirsha Amavasya
तारीख कैसे तय होती है
हर अमावस्या, उस दिन जब सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि चल रही हो। सोमवार की अमावस्या सोमवती, मंगलवार की भौमवती और शनिवार की शनि अमावस्या कहलाती है।
परिचय
अमावस्या वह तिथि है जिसमें चंद्रमा का भोगांश सूर्य के भोगांश पर लौटता है और कृष्ण पक्ष तथा, अमांत गणना में, मास का समापन करता है। यह पितरों की तिथि है और पूर्वजों के लिए तर्पण इसका नियमित आचरण है; श्राद्ध के लिए अपराह्न निर्णायक काल है, इसलिए जिस दिन के अपराह्न में अमावस्या हो वही दिन चुना जाता है। कई नामित अमावस्याएँ विशेष हैं: पितृ पक्ष का समापन करने वाली सर्वपितृ अमावस्या, आश्विन अमावस्या की दीपावली, पौष की मौनी अमावस्या, और सोमवार (सोमवती) या शनिवार (शनि) की कोई भी अमावस्या। सूर्यग्रहण केवल अमावस्या को ही हो सकता है, इसीलिए ग्रहण-नियम इससे जुड़े हैं।
कैसे मनाया जाता है
अपराह्न में पूर्वजों के लिए तर्पण, सोमवती और मौनी अमावस्या को नदी-स्नान, और संध्या में दीप।
