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School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Amavasya (all)

अमावस्या (सभी)

प्रत्येक मास की अमावस्या, तीसवीं तिथि, पितरों के लिए।

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2036

  • सोमवार, 28 जनवरी 2036 · Mauni Amavasya (Somvati)
  • बुधवार, 27 फ़रवरी 2036 · Magha Amavasya
  • गुरुवार, 27 मार्च 2036 · Phalguna Amavasya
  • शनिवार, 26 अप्रैल 2036 · Chaitra Amavasya (Shani)
  • रविवार, 25 मई 2036 · Vat Savitri Amavasya
  • मंगलवार, 24 जून 2036 · Jyeshtha Amavasya (Bhaumvati)
  • बुधवार, 23 जुलाई 2036 · Hariyali Amavasya
  • गुरुवार, 21 अगस्त 2036 · Shravana Amavasya
  • शनिवार, 20 सितंबर 2036 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya (Shani)
  • रविवार, 19 अक्टूबर 2036 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya
  • सोमवार, 17 नवंबर 2036 · Kartika Amavasya (Somvati)
  • बुधवार, 17 दिसंबर 2036 · Margashirsha Amavasya

2037

  • शुक्रवार, 16 जनवरी 2037 · Mauni Amavasya
  • रविवार, 15 फ़रवरी 2037 · Magha Amavasya
  • सोमवार, 16 मार्च 2037 · Phalguna Amavasya (Somvati)
  • बुधवार, 15 अप्रैल 2037 · Chaitra Amavasya
  • शुक्रवार, 15 मई 2037 · Vat Savitri Amavasya
  • शनिवार, 13 जून 2037 · Adhika Jyeshtha Amavasya (Shani)
  • सोमवार, 13 जुलाई 2037 · Jyeshtha Amavasya (Somvati)
  • मंगलवार, 11 अगस्त 2037 · Hariyali Amavasya (Bhaumvati)
  • बुधवार, 9 सितंबर 2037 · Shravana Amavasya
  • शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2037 · Mahalaya / Sarvapitri Amavasya
  • शनिवार, 7 नवंबर 2037 · Diwali (Lakshmi Puja) Amavasya (Shani)
  • रविवार, 6 दिसंबर 2037 · Kartika Amavasya

तारीख कैसे तय होती है

हर अमावस्या, उस दिन जब सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि चल रही हो। सोमवार की अमावस्या सोमवती, मंगलवार की भौमवती और शनिवार की शनि अमावस्या कहलाती है। अमावस्या कृष्ण पक्ष में है, इसलिए दोनों मास-नाम दिए हैं।

परिचय

अमावस्या वह तिथि है जिसमें चंद्रमा का भोगांश सूर्य के भोगांश पर लौटता है और कृष्ण पक्ष तथा, अमांत गणना में, मास का समापन करता है। यह पितरों की तिथि है और पूर्वजों के लिए तर्पण इसका नियमित आचरण है; श्राद्ध के लिए अपराह्न निर्णायक काल है, इसलिए जिस दिन के अपराह्न में अमावस्या हो वही दिन चुना जाता है। कई नामित अमावस्याएँ विशेष हैं: पितृ पक्ष का समापन करने वाली सर्वपितृ अमावस्या, आश्विन अमावस्या की दीपावली, पौष की मौनी अमावस्या, और सोमवार (सोमवती) या शनिवार (शनि) की कोई भी अमावस्या। सूर्यग्रहण केवल अमावस्या को ही हो सकता है, इसीलिए ग्रहण-नियम इससे जुड़े हैं।

कैसे मनाया जाता है

अपराह्न में पूर्वजों के लिए तर्पण, सोमवती और मौनी अमावस्या को नदी-स्नान, और संध्या में दीप।

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