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School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Buddha Purnima

बुद्ध पूर्णिमा

वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध के जन्म, बोधि और परिनिर्वाण का स्मरण।

2044 में: बुधवार, 11 मई 2044 (नई दिल्ली)

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2044

बुधवार, 11 मई 2044

2044 में तिथि 11 मई, सुबह 4:14 से 12 मई, सुबह 5:46 तक है; यह सूर्योदय (सामान्य ‘उदया तिथि’ नियम) के समय दो दिन चल रही है (बुधवार, 11 मई 2044 और गुरुवार, 12 मई 2044)। अधिकांश पंचांगों की तरह पहला दिन लिया गया है।

2045

सोमवार, 1 मई 2045

2045 में तिथि 30 अप्रैल, दोपहर 12:26 से 1 मई, सुबह 11:22 तक है; सोमवार, 1 मई 2045 को सूर्योदय (सामान्य ‘उदया तिथि’ नियम) के समय यह चल रही है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा इसी दिन है।

तारीख कैसे तय होती है

बुद्ध पूर्णिमा चान्द्र मास वैशाख की पूर्णिमा (पूरे चाँद का दिन) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन सूर्योदय (सामान्य ‘उदया तिथि’ नियम) के समय यह तिथि चल रही हो।

परिचय

बुद्ध पूर्णिमा वैशाख की पूर्णिमा है, अप्रैल के अंत या मई में। परंपरा बुद्ध के लुंबिनी में जन्म, बोधगया में बोधि और कुशीनगर में परिनिर्वाण, तीनों को इसी तिथि पर रखती है। भारत में सूर्योदय की तिथि दिन तय करती है; थेरवाद देश अपने पंचांग प्रयोग करते हैं और तारीखें एक दिन या एक मास भिन्न हो सकती हैं। यह राजपत्रित अवकाश है और बोधगया तथा सारनाथ में तीर्थयात्रा का मुख्य दिन है।

कैसे मनाया जाता है

विहारों में अर्पण, सुत्तों का पाठ और कुछ क्षेत्रों में पिंजरे के पक्षियों को मुक्त करना।

पंचांग में और