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पर्व और व्रत · Chhath Puja

छठ पूजा

बिहार का चार दिवसीय सूर्य-पर्व, कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर केंद्रित।

2044 में: बुधवार, 26 अक्टूबर 2044 (नई दिल्ली)

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2044

बुधवार, 26 अक्टूबर 2044

2044 में तिथि 26 अक्टूबर, सुबह 10:38 से 27 अक्टूबर, दोपहर 1:06 तक है; बुधवार, 26 अक्टूबर 2044 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए छठ पूजा इसी दिन है।

2045

मंगलवार, 14 नवंबर 2045

2045 में तिथि 14 नवंबर, रात 3:04 से 15 नवंबर, सुबह 5:06 तक है; मंगलवार, 14 नवंबर 2045 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए छठ पूजा इसी दिन है।

तारीख कैसे तय होती है

छठ पूजा चान्द्र मास कार्तिक के शुक्ल पक्ष का छठा दिन (षष्ठी) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह तिथि चल रही हो।

परिचय

छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को, दीपावली की अमावस्या के बाद छठी तिथि पर, अक्टूबर या नवंबर में रखी जाती है। चार दिन चलते हैं: चतुर्थी (नहाय-खाय), पंचमी (खरना), षष्ठी (अस्त होते सूर्य को संध्या अर्घ्य) और सप्तमी (उगते सूर्य को प्रातः अर्घ्य)। षष्ठी की संध्या मुख्य पर्व है, इसलिए जिस दिन के सूर्यास्त पर षष्ठी हो वही दिन चुना जाता है और पंचांग स्थानीय सूर्यास्त तथा अगला सूर्योदय छापता है। वसंत में चैत्र शुक्ल षष्ठी को छोटी चैती छठ रखी जाती है।

कैसे मनाया जाता है

खरना के बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत, और जल में खड़े होकर अस्त होते तथा फिर उगते सूर्य को अर्घ्य।

पंचांग में और