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School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Dattatreya Jayanti

दत्तात्रेय जयंती

मार्गशीर्ष पूर्णिमा की संध्या में दत्तात्रेय का जन्म।

2043 में: मंगलवार, 15 दिसंबर 2043 (नई दिल्ली)

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2043

मंगलवार, 15 दिसंबर 2043

2043 में तिथि 15 दिसंबर, शाम 5:27 से 16 दिसंबर, दोपहर 1:32 तक है; यह किसी भी प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) को नहीं छूती, इसलिए जिस दिन यह शुरू होती है वह दिन लिया गया है: मंगलवार, 15 दिसंबर 2043।

2044

रविवार, 4 दिसंबर 2044

2044 में तिथि 4 दिसंबर, सुबह 8:18 से 5 दिसंबर, सुबह 5:03 तक है; रविवार, 4 दिसंबर 2044 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए दत्तात्रेय जयंती इसी दिन है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा (बुधवार, 16 दिसंबर 2043): आज सूर्योदय पर पूर्णिमा है: पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान का दिन। दत्तात्रेय जयंती (15 दिसंबर) इसी पूर्णिमा का पर्व है, संध्या में।

तारीख कैसे तय होती है

दत्तात्रेय जयंती चान्द्र मास मार्गशीर्ष की पूर्णिमा (पूरे चाँद का दिन) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह तिथि चल रही हो।

परिचय

दत्तात्रेय जयंती मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को पड़ती है, दिसंबर में। जन्म प्रदोष में रखा गया है, इसलिए जिस दिन की संध्या में पूर्णिमा हो वही दिन चुना जाता है, और जन्मोत्सव उसी अवधि में किया जाता है। दत्तात्रेय, अत्रि और अनसूया से जन्मे ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त रूप, महाराष्ट्र और दक्कन की दत्त-परंपरा के केंद्रीय देवता हैं। गाणगापुर, नरसोबावाडी और औदुंबर में इस दिन मुख्य समागम होते हैं, और इससे पहले के सप्ताह में गुरुचरित्र का पारायण किया जाता है।

कैसे मनाया जाता है

संध्या में जन्मोत्सव, पूर्ववर्ती सप्ताह में गुरुचरित्र पारायण, और दत्त मंदिरों में भजन।

पंचांग में और