मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Dattatreya Jayanti

दत्तात्रेय जयंती

मार्गशीर्ष पूर्णिमा की संध्या में दत्तात्रेय का जन्म।

2046 में: बुधवार, 12 दिसंबर 2046 (नई दिल्ली)

व्हाट्सऐप

2046

बुधवार, 12 दिसंबर 2046

2046 में तिथि 12 दिसंबर, दोपहर 2:47 से 13 दिसंबर, दोपहर 3:25 तक है; बुधवार, 12 दिसंबर 2046 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए दत्तात्रेय जयंती इसी दिन है।

2047

रविवार, 1 दिसंबर 2047

2047 में तिथि 1 दिसंबर, दोपहर 2:51 से 2 दिसंबर, शाम 5:25 तक है; यह प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय दो दिन चल रही है (रविवार, 1 दिसंबर 2047 और सोमवार, 2 दिसंबर 2047)। अधिकांश पंचांगों की तरह पहला दिन लिया गया है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा (गुरुवार, 13 दिसंबर 2046): आज सूर्योदय पर पूर्णिमा है: पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान का दिन। दत्तात्रेय जयंती (12 दिसंबर) इसी पूर्णिमा का पर्व है, संध्या में।

तारीख कैसे तय होती है

दत्तात्रेय जयंती चान्द्र मास मार्गशीर्ष की पूर्णिमा (पूरे चाँद का दिन) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह तिथि चल रही हो।

परिचय

दत्तात्रेय जयंती मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को पड़ती है, दिसंबर में। जन्म प्रदोष में रखा गया है, इसलिए जिस दिन की संध्या में पूर्णिमा हो वही दिन चुना जाता है, और जन्मोत्सव उसी अवधि में किया जाता है। दत्तात्रेय, अत्रि और अनसूया से जन्मे ब्रह्मा, विष्णु और शिव का संयुक्त रूप, महाराष्ट्र और दक्कन की दत्त-परंपरा के केंद्रीय देवता हैं। गाणगापुर, नरसोबावाडी और औदुंबर में इस दिन मुख्य समागम होते हैं, और इससे पहले के सप्ताह में गुरुचरित्र का पारायण किया जाता है।

कैसे मनाया जाता है

संध्या में जन्मोत्सव, पूर्ववर्ती सप्ताह में गुरुचरित्र पारायण, और दत्त मंदिरों में भजन।

पंचांग में और