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पर्व और व्रत · Devutthana Ekadashi

देवउठनी एकादशी

कार्तिक शुक्ल एकादशी, चातुर्मास का अंत और विवाह-काल का पुनः आरंभ।

2043 में: शुक्रवार, 13 नवंबर 2043 (नई दिल्ली)

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2043

शुक्रवार, 13 नवंबर 2043

2043 में तिथि 12 नवंबर, शाम 5:23 से 13 नवंबर, दोपहर 3:49 तक है; शुक्रवार, 13 नवंबर 2043 को सूर्योदय (सामान्य ‘उदया तिथि’ नियम) के समय यह चल रही है, इसलिए देवउठनी एकादशी इसी दिन है।

2044

मंगलवार, 1 नवंबर 2044

2044 में तिथि 31 अक्टूबर, रात 9:43 से 1 नवंबर, रात 10:28 तक है; मंगलवार, 1 नवंबर 2044 को सूर्योदय (सामान्य ‘उदया तिथि’ नियम) के समय यह चल रही है, इसलिए देवउठनी एकादशी इसी दिन है।

तारीख कैसे तय होती है

देवउठनी एकादशी चान्द्र मास कार्तिक के शुक्ल पक्ष का ग्यारहवाँ दिन (एकादशी) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन सूर्योदय (सामान्य ‘उदया तिथि’ नियम) के समय यह तिथि चल रही हो।

परिचय

देवउठनी एकादशी कार्तिक शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, नवंबर में, दीपावली की अमावस्या के बाद ग्यारहवीं तिथि। यह देवशयनी एकादशी से आरंभ हुए चार मास के चातुर्मास का समापन करती है, और इस दिन से विवाह के मुहूर्त फिर आरंभ होते हैं। एकादशी-नियम लागू होता है: तिथि सूर्योदय पर होनी चाहिए और स्मार्त तथा वैष्णव पंचांग एक दिन भिन्न हो सकते हैं। महाराष्ट्र में यह कार्तिकी एकादशी है, पंढरपुर तीर्थयात्रा का दूसरा बड़ा दिन, और तुलसी विवाह इसी दिन या अगले दिन रखा जाता है।

कैसे मनाया जाता है

एकादशी व्रत, संध्या में शंख और घंटे के साथ विष्णु का जागरण, और चातुर्मास के संकल्पों का समापन।

पंचांग में और