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School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Dhanteras

धनतेरस

दीपावली-काल का पहला दिन, आश्विन अमावस्या से पहले की त्रयोदशी।

2043 में: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2043 (नई दिल्ली)

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2043

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2043

2043 में तिथि 29 अक्टूबर, रात 8:08 से 30 अक्टूबर, रात 9:34 तक है; शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2043 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए धनतेरस इसी दिन है।

2044

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2044

2044 में तिथि 18 अक्टूबर, सुबह 7:28 से 19 अक्टूबर, सुबह 6:20 तक है; मंगलवार, 18 अक्टूबर 2044 को प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए धनतेरस इसी दिन है।

तारीख कैसे तय होती है

धनतेरस चान्द्र मास आश्विन के कृष्ण पक्ष का तेरहवाँ दिन (त्रयोदशी) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) के समय यह तिथि चल रही हो। उत्तर भारत की पूर्णिमान्त गणना में यही पखवाड़ा कार्तिक मास में गिना जाता है।

परिचय

धनतेरस अमांत गणना में आश्विन कृष्ण पक्ष की तेरहवीं तिथि को पड़ती है (उत्तर में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी), दीपावली से दो दिन पहले, अक्टूबर या नवंबर में। निर्णायक काल प्रदोष है, सूर्यास्त के बाद का लगभग डेढ़ घंटा, इसलिए जिस दिन की संध्या में त्रयोदशी हो वही दिन चुना जाता है। यह दिन धन्वंतरि जयंती भी है, देवताओं के वैद्य का जन्म, और यम-दीप की संध्या, द्वार के बाहर रखा जाने वाला दीप। इस दिन धातु के बर्तन खरीदना प्रचलित रीति है।

कैसे मनाया जाता है

प्रदोष में लक्ष्मी और धन्वंतरि पूजन, द्वार के बाहर यम के लिए दीप, और बर्तन या धातु का क्रय।

पंचांग में और