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School of Vedic Sciences, FORE

पर्व और व्रत · Naraka Chaturdashi

नरक चतुर्दशी

दीपावली से एक दिन पहले, भोर से पूर्व चंद्रमा के रहते तेल-स्नान।

2031 में: गुरुवार, 13 नवंबर 2031 (नई दिल्ली)

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2031

गुरुवार, 13 नवंबर 2031

2031 में तिथि 13 नवंबर, सुबह 5:36 से 14 नवंबर, सुबह 4:24 तक है; यह किसी भी चन्द्रोदय को नहीं छूती, इसलिए जिस दिन यह शुरू होती है वह दिन लिया गया है: गुरुवार, 13 नवंबर 2031।

2032

सोमवार, 1 नवंबर 2032

2032 में तिथि 1 नवंबर, सुबह 8:43 से 2 नवंबर, सुबह 10:14 तक है; सोमवार, 1 नवंबर 2032 को चन्द्रोदय के समय यह चल रही है, इसलिए नरक चतुर्दशी इसी दिन है।

तारीख कैसे तय होती है

नरक चतुर्दशी चान्द्र मास आश्विन के कृष्ण पक्ष का चौदहवाँ दिन (चतुर्दशी) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन चन्द्रोदय के समय यह तिथि चल रही हो। उत्तर भारत की पूर्णिमान्त गणना में यही पखवाड़ा कार्तिक मास में गिना जाता है।

परिचय

नरक चतुर्दशी अमांत गणना में आश्विन कृष्ण पक्ष की चौदहवीं तिथि है, धनतेरस और दीपावली के बीच का दिन, अक्टूबर या नवंबर में। अभ्यंग स्नान (तेल-स्नान) रात्रि के अंतिम भाग में, घटते चंद्रमा के उदय के बाद और सूर्योदय से पहले, किया जाता है, इसलिए जिस दिन भोर-पूर्व चंद्रोदय पर चतुर्दशी हो वही दिन चुना जाता है। कुछ वर्षों में इससे नरक चतुर्दशी और दीपावली एक ही नागरिक दिन पड़ते हैं। गुजरात इसे काली चौदस, बंगाल चौदह दीपों के साथ भूत चतुर्दशी, और गोवा नरकासुर के पुतलों के साथ मनाता है।

कैसे मनाया जाता है

भोर से पहले तेल-स्नान, संध्या में दीप, और बंगाल में चौदह पीढ़ियों के पूर्वजों के लिए चौदह दीप।

पंचांग में और