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पर्व और व्रत · Pitru Paksha begins

पितृ पक्ष आरंभ

पितरों का पखवाड़ा, भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से अमावस्या तक।

2034 में: गुरुवार, 28 सितंबर 2034 (नई दिल्ली)

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2034

गुरुवार, 28 सितंबर 2034

2034 में तिथि 28 सितंबर, सुबह 8:26 से 29 सितंबर, सुबह 5:32 तक है; गुरुवार, 28 सितंबर 2034 को अपराह्न (दोपहर बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए पितृ पक्ष आरंभ इसी दिन है।

2035

मंगलवार, 18 सितंबर 2035

2035 में तिथि 17 सितंबर, शाम 7:53 से 18 सितंबर, शाम 7:23 तक है; मंगलवार, 18 सितंबर 2035 को अपराह्न (दोपहर बाद का समय) के समय यह चल रही है, इसलिए पितृ पक्ष आरंभ इसी दिन है।

तारीख कैसे तय होती है

पितृ पक्ष आरंभ चान्द्र मास भाद्रपद के कृष्ण पक्ष का पहला दिन (प्रतिपदा) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन अपराह्न (दोपहर बाद का समय) के समय यह तिथि चल रही हो। उत्तर भारत की पूर्णिमान्त गणना में यही पखवाड़ा आश्विन मास में गिना जाता है।

परिचय

पितृ पक्ष अमांत गणना में भाद्रपद का कृष्ण पक्ष है (पूर्णिमांत में आश्विन कृष्ण), सितंबर या अक्टूबर के आरंभ में। यह कृष्ण प्रतिपदा से, भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन, आरंभ होता है, यद्यपि कुछ परिवार पूर्णिमा श्राद्ध से ही आरंभ करते हैं। प्रत्येक परिवार कृष्ण पक्ष की उस तिथि को श्राद्ध करता है जो पूर्वज की मृत्यु-तिथि से मेल खाती हो; निर्णायक काल अपराह्न है, इसलिए जिस दिन के अपराह्न में वह तिथि हो वही दिन चुना जाता है। पखवाड़ा सर्वपितृ अमावस्या, सभी पूर्वजों के श्राद्ध, पर समाप्त होता है, जिसके अगले दिन शारदीय नवरात्रि आरंभ होती है।

कैसे मनाया जाता है

पूर्वजों की मृत्यु-तिथि पर तर्पण और पिंडदान, तथा ब्राह्मणों और कौओं को भोजन अर्पण।

पंचांग में और