1993
शुक्रवार, 29 अक्टूबर 1993
1993 में तिथि 29 अक्टूबर, दोपहर 3:45 से 30 अक्टूबर, शाम 6:07 तक है; यह चन्द्रोदय के समय दो दिन चल रही है (शुक्रवार, 29 अक्टूबर 1993 और शनिवार, 30 अक्टूबर 1993)। अधिकांश पंचांगों की तरह पहला दिन लिया गया है।
1994
मंगलवार, 18 अक्टूबर 1994
1994 में तिथि 18 अक्टूबर, दोपहर 3:40 से 19 अक्टूबर, शाम 5:47 तक है; यह चन्द्रोदय के समय दो दिन चल रही है (मंगलवार, 18 अक्टूबर 1994 और बुधवार, 19 अक्टूबर 1994)। अधिकांश पंचांगों की तरह पहला दिन लिया गया है।
आश्विन पूर्णिमा (शनिवार, 30 अक्टूबर 1993): आज सूर्योदय पर पूर्णिमा है: पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान का दिन। शरद पूर्णिमा (29 अक्टूबर) इसी पूर्णिमा का पर्व है, चन्द्रोदय पर, उसी रात।
तारीख कैसे तय होती है
शरद पूर्णिमा चान्द्र मास आश्विन की पूर्णिमा (पूरे चाँद का दिन) को पड़ता है। तारीख वह दिन है जिस दिन चन्द्रोदय के समय यह तिथि चल रही हो।
परिचय
शरद पूर्णिमा आश्विन की पूर्णिमा है, अक्टूबर में, वर्षा के छँटने के बाद की पहली पूर्णिमा। यह रात्रि-पर्व है, इसलिए जिस दिन की रात में पूर्णिमा हो वही दिन चुना जाता है, और चंद्रोदय ही महत्त्वपूर्ण क्षण है। बंगाल और मिथिला का कोजागरी जागरण लक्ष्मी के लिए रखा जाता है, जो पूछती हैं 'कौन जाग रहा है' (को जागर्ति); ब्रज में यह रात कृष्ण के रास का स्मरण है। खीर चाँदनी में रखी जाती है और अगली सुबह खाई जाती है। जब पूर्णिमा दिन में आरंभ होकर अगली सुबह समाप्त हो, जैसा प्रायः होता है, तो रात पहले दिन की होती है, जबकि जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो, जिसे यहाँ आश्विन पूर्णिमा लिखा है, वह पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान का दिन है: एक ही पूर्णिमा, दो दिन।
कैसे मनाया जाता है
लक्ष्मी पूजन के साथ रात्रि-जागरण, और पूर्ण चंद्रमा के नीचे रखी खीर।
