उपकरण · नामाक्षर
नक्षत्र के अनुसार नाम का पहला अक्षर
अवकहड़ा चक्र हर नक्षत्र-पद को एक अक्षर देता है। नक्षत्र और पद चुनें, या जन्म का विवरण भरें, और ग्रंथों में दिया गया नामाक्षर देखें।
नक्षत्र और पद से
अपना जन्म-नक्षत्र और पद पता हो तो यहाँ चुनें।
नामाक्षर
श्रवण, 2 पद
खू
IAST: khū
अवकहड़ा चक्र में श्रवण के 2 पद का अक्षर “खू” है। यह पद मकर राशि में पड़ता है।
- 1 पदखीkhī
- 2 पदखूkhū
- 3 पदखेkhe
- 4 पदखोkho
यह ग्रंथों और पंचांगों में दी गई नामकरण की एक परम्परा है: नाम उस अक्षर से आरम्भ किया जाता है जो जन्म के समय चन्द्रमा के नक्षत्र-पद का हो। यह किसी नाम के फल के बारे में कुछ नहीं कहता।
जन्म विवरण से
जन्म के समय चन्द्रमा का नक्षत्र-पद निकालकर अक्षर दिखाया जाता है। विवरण केवल इस गणना के लिए भेजा जाता है और कहीं सहेजा नहीं जाता।
पूरा अवकहड़ा चक्र
27 नक्षत्र, हर एक के चार पद, और हर पद की राशि।
1. अश्विनीमेष
2. भरणीमेष
3. कृत्तिकामेष / वृषभ
4. रोहिणीवृषभ
5. मृगशिरावृषभ / मिथुन
6. आर्द्रामिथुन
7. पुनर्वसुमिथुन / कर्क
8. पुष्यकर्क
9. आश्लेषाकर्क
10. मघासिंह
12. उत्तर फाल्गुनीसिंह / कन्या
13. हस्तकन्या
14. चित्राकन्या / तुला
15. स्वातितुला
16. विशाखातुला / वृश्चिक
17. अनुराधावृश्चिक
18. ज्येष्ठावृश्चिक
19. मूलधनु
21. उत्तराषाढ़ाधनु / मकर
22. श्रवणमकर
23. धनिष्ठामकर / कुम्भ
24. शतभिषाकुम्भ
25. पूर्व भाद्रपदकुम्भ / मीन
27. रेवतीमीन
यह भी देखें: नक्षत्र · पद · अपना नक्षत्र · सभी उपकरण
समझें
अवकहड़ा चक्र क्या है
अवकहड़ा चक्र पंचांगों और जातक ग्रंथों में दी गई एक तालिका है जो 27 नक्षत्रों के 108 पदों में से हर एक को एक अक्षर देती है। इसका नाम उसके पहले अक्षरों (अ, व, क, ह, ड) से पड़ा है। इसी तालिका से जन्म-नक्षत्र, राशि, वर्ण, योनि, गण और नाडी भी पढ़े जाते हैं।
नामकरण में इसका उपयोग
गृह्यसूत्रों में नामकरण संस्कार का विधान है, और बाद के ग्रंथों तथा पंचांगों की परम्परा कहती है कि बच्चे का नाम उस अक्षर से रखा जाए जो जन्म के समय चन्द्रमा के नक्षत्र-पद का हो। कई परिवार इसे “नक्षत्र नाम” या पुकारने के नाम से अलग रखते हैं। यह एक परम्परा है; नाम चुनने के और भी कई आधार हैं।
नक्षत्र और पद
राशि-चक्र 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक 13°20′ का, और हर नक्षत्र चार पदों में (3°20′ प्रत्येक)। नौ पद मिलकर एक राशि बनाते हैं। जन्म का पद चन्द्रमा की निरयण स्थिति से निकलता है; उसी गणना को कार्य-विधि सहित देखने के लिए “अपना नक्षत्र” उपकरण खोलें।
तालिका के रूपान्तर
कुछ पंचांग “चु” और “चू” जैसे ह्रस्व-दीर्घ में भिन्न लिखते हैं, और जो पंचांग अभिजित को 28वाँ नक्षत्र गिनते हैं वे उत्तराषाढ़ा के अन्तिम पद और श्रवण के आरम्भ को “जू जे जो खा” देते हैं। यहाँ 27 नक्षत्रों वाली सामान्य उत्तर भारतीय तालिका है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- गोचरहर ग्रह का राशि-परिवर्तन, वक्री-मार्गी और अस्त।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
