पंचांग · पर्व और व्रत
2047 के पर्व और व्रत
हर तारीख इंजन ने चन्द्र-तिथि, नक्षत्र या सूर्य की संक्रान्ति से निकाली है, चुने गए नगर के सूर्योदय के अनुसार। पर्व खोलें तो यह भी पढ़ें कि तारीख कैसे तय हुई।
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मास-नाम: नियम अमान्त मास से चलते हैं, जो अमावस्या पर समाप्त होता है (जैसे दक्षिण और पश्चिम भारत में)। कृष्ण पक्ष में उत्तर भारत का पूर्णिमान्त मास अगले मास में पहुँच चुका होता है, इसलिए कृष्ण पक्ष की प्रविष्टियों पर दोनों नाम दिए हैं, जैसे कामिका एकादशी: श्रावण कृष्ण (पूर्णिमान्त) = आषाढ़ कृष्ण (अमान्त)। श्रावण सोमवार पूर्णिमान्त मास से गिने जाते हैं, जैसे दिल्ली के पंचांग छापते हैं।
जनवरी 2047
14 जनवरीसोम
लोहड़ीपंजाब का अलाव-पर्व, मकर संक्रांति से एक संध्या पहले।
15 जनवरीमंगल
मकर संक्रांतिसूर्य का निरयण मकर राशि में प्रवेश, लगभग 14 जनवरी।
15 जनवरीमंगल
थाई पोंगलतमिल सौर मास थाई का पहला दिन, सूर्य के निरयण मकर राशि में प्रवेश के बाद।
31 जनवरीगुरु
वसंत पंचमीमाघ शुक्ल पंचमी; सरस्वती का दिन और वसंत का पहला संकेत।
फ़रवरी 2047
2 फ़रवरीशनि
रथ सप्तमीमाघ शुक्ल सप्तमी, भोर से पहले स्नान के साथ सूर्य के लिए।
मार्च 2047
11 मार्चसोम
होलिका दहनहोली का अलाव, फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या में भद्रा से बाहर जलाया जाता है।
12 मार्चमंगल
होलीरंगों का पर्व, होलिका दहन के अगले दिन।
27 मार्चबुध
उगादि / गुड़ी पड़वादक्कन और महाराष्ट्र में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का चांद्र नववर्ष।
27 मार्चबुध
चैत्र नवरात्रिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा से राम नवमी तक देवी की नौ रातें।
29 मार्चशुक्र
गणगौरचैत्र शुक्ल तृतीया, राजस्थान की गौरी-पूजा का समापन।
अप्रैल 2047
4 अप्रैलगुरु
राम नवमीराम का जन्मोत्सव, चैत्र शुक्ल नवमी के मध्याह्न में।
8 अप्रैलसोम
महावीर जयंतीचौबीसवें तीर्थंकर वर्धमान महावीर का जन्म, चैत्र शुक्ल त्रयोदशी।
10 अप्रैलबुध
हनुमान जयंतीउत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को हनुमान का जन्मोत्सव।
28 अप्रैलरवि
अक्षय तृतीयावैशाख शुक्ल तृतीया, साढ़े तीन 'अबूझ' मुहूर्त दिनों में से एक।
मई 2047
9 मईगुरु
बुद्ध पूर्णिमावैशाख पूर्णिमा, बुद्ध के जन्म, बोधि और परिनिर्वाण का स्मरण।
जून 2047
3 जूनसोम
गंगा दशहराज्येष्ठ शुक्ल दशमी, गंगा का अवतरण।
25 जूनमंगल
रथ यात्रापुरी में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथ की रथ यात्रा।
जुलाई 2047
7 जुलाईरवि
गुरु पूर्णिमाआषाढ़ पूर्णिमा, गुरु और व्यास को समर्पित।
27 जुलाईशनि
नाग पंचमीश्रावण शुक्ल पंचमी, नाग देवताओं का दिन।
अगस्त 2047
5 अगस्तसोम
रक्षाबंधनश्रावण पूर्णिमा; राखी दोपहर में, भद्रा से बाहर, बाँधी जाती है।
13 अगस्तमंगल
कृष्ण जन्माष्टमीश्रावण पूर्णिमा के बाद की अष्टमी की अर्धरात्रि में कृष्ण का जन्म।
24 अगस्तशनि
गणेश चतुर्थीभाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के मध्याह्न में गणेश की स्थापना।
सितंबर 2047
2 सितंबरसोम
ओणमचिंगम मास में तिरुवोणम (श्रवण) नक्षत्र को केरल का फसल-पर्व।
3 सितंबरमंगल
अनंत चतुर्दशीभाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी; अनंत व्रत और गणेश विसर्जन।
4 सितंबरबुध
पितृ पक्ष आरंभपितरों का पखवाड़ा, भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से अमावस्या तक।
20 सितंबरशुक्र
शारदीय नवरात्रि आरंभआश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक दुर्गा की नौ रातें।
26 सितंबरगुरु
दुर्गाष्टमीशारदीय नवरात्रि का आठवाँ दिन, दुर्गा पूजन का प्रमुख दिन।
27 सितंबरशुक्र
महानवमीशारदीय नवरात्रि की नौवीं और अंतिम रात; दक्षिण में आयुध पूजा।
28 सितंबरशनि
विजयादशमीआश्विन शुक्ल दशमी, अपराह्न में; रावण-दहन और शमी पूजन।
अक्टूबर 2047
3 अक्टूबरगुरु
शरद पूर्णिमाआश्विन पूर्णिमा की रात (कोजागरी), चंद्रोदय से मनाई जाती है।
16 अक्टूबरबुध
धनतेरसदीपावली-काल का पहला दिन, आश्विन अमावस्या से पहले की त्रयोदशी।
17 अक्टूबरगुरु
काली चौदसकार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (पूर्णिमान्त) की रात, गुजरात में काली के लिए।
18 अक्टूबरशुक्र
नरक चतुर्दशीकार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (पूर्णिमान्त): भोर से पहले, घटते चंद्रमा के रहते, तेल-स्नान।
18 अक्टूबरशुक्र
दीपावलीआश्विन का समापन करने वाली अमावस्या को दीपों का पर्व और लक्ष्मी पूजन।
19 अक्टूबरशनि
गोवर्धन पूजाकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, प्रायः दीपावली के अगले दिन; अन्नकूट।
20 अक्टूबररवि
भाई दूजकार्तिक शुक्ल द्वितीया, भाई-बहन का दिन जो दीपावली का समापन करता है।
23 अक्टूबरबुध
छठ पूजाबिहार का चार दिवसीय सूर्य-पर्व, कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर केंद्रित।
23 अक्टूबरबुध
स्कन्द षष्ठीतमिल गणना में कार्तिक शुक्ल षष्ठी, सूरसंहारम् का दिन।
29 अक्टूबरमंगल
तुलसी विवाहकार्तिक शुक्ल द्वादशी को तुलसी का विष्णु से प्रतीकात्मक विवाह।
नवंबर 2047
2 नवंबरशनि
कार्तिक पूर्णिमाकार्तिक की पूर्णिमा; वाराणसी में दीप और गुरु नानक जयंती।
27 नवंबरबुध
गीता जयंतीमार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, जिसे गीता के उपदेश का दिन माना जाता है।
दिसंबर 2047
1 दिसंबररवि
दत्तात्रेय जयंतीमार्गशीर्ष पूर्णिमा की संध्या में दत्तात्रेय का जन्म।
सरल भाषा की टिप्पणियाँ प्रचलित पंचांग-परम्परा का विद्यालय द्वारा किया गया सार हैं, अध्ययन के लिए। ये सलाह नहीं हैं।
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