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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1970: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1970 में गुरु (बृहस्पति) 11 दिसंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 1970 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1970 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1970

  • 4 जनवरीरात 3:05

    शनि मेष 8°37′ पर मार्गी

  • 4 जनवरीदोपहर 1:39

    बुध मकर 6°34′ पर वक्री

  • 7 जनवरीरात 9:04

    बुध अस्त (19 जनवरी तक)†

  • 13 जनवरीरात 2:51

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 जनवरीसुबह 6:07

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 16 जनवरीसुबह 6:23

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 16 जनवरीसुबह 7:35

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 19 जनवरीरात 2:15

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 जनवरीरात 10:08

    बुध धनु 20°26′ पर मार्गी

फ़रवरी 1970

  • 8 फ़रवरीसुबह 6:27

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 9 फ़रवरीसुबह 4:52

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 12 फ़रवरीशाम 7:08

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 20 फ़रवरीरात 3:10

    गुरु (बृहस्पति) तुला 12°32′ पर वक्री

  • 26 फ़रवरीरात 3:58

    मंगल का मेष में प्रवेश

मार्च 1970

  • 2 मार्चरात 12:50

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 5 मार्चसुबह 4:31

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 7 मार्चसुबह 7:36

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 मार्चसुबह 7:41

    बुध अस्त (6 अप्रैल तक)†

  • 14 मार्चशाम 4:05

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 19 मार्चसुबह 4:31

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 29 मार्चसुबह 8:06

    शुक्र का मेष में प्रवेश

अप्रैल 1970

  • 3 अप्रैलरात 3:41

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 6 अप्रैलदोपहर 3:41

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 अप्रैलदोपहर 12:32

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 14 अप्रैलरात 12:39

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 15 अप्रैलसुबह 11:41

    शनि अस्त (21 मई तक)†

  • 22 अप्रैलशाम 5:11

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 28 अप्रैलशाम 4:20

    बुध मेष 29°03′ पर वक्री

मई 1970

  • 1 मईसुबह 5:22

    बुध अस्त (17 मई तक)†

  • 14 मईरात 9:35

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 17 मईसुबह 9:13

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 17 मईदोपहर 3:06

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 मईरात 2:21

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 मईदोपहर 12:17

    बुध मेष 19°46′ पर मार्गी

  • 23 मईदोपहर 3:21

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

जून 1970

  • 8 जूनरात 3:35

    मंगल अस्त (23 सितंबर तक)†

  • 8 जूनदोपहर 1:56

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 11 जूनसुबह 10:19

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 15 जूनसुबह 4:14

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 23 जूनदोपहर 3:32

    गुरु (बृहस्पति) तुला 2°38′ पर मार्गी

  • 24 जूनरात 11:44

    बुध अस्त (20 जुलाई तक)†

  • 27 जूनसुबह 7:57

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 1970

  • 7 जुलाईरात 12:51

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 8 जुलाईसुबह 8:24

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 11 जुलाईसुबह 9:20

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईदोपहर 3:07

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 20 जुलाईरात 2:09

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 जुलाईसुबह 7:45

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 1970

  • 2 अगस्तदोपहर 2:53

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 16 अगस्तरात 11:31

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 20 अगस्तरात 12:04

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 24 अगस्तरात 3:13

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 30 अगस्तदोपहर 12:56

    बुध कन्या 4°34′ पर वक्री

  • 31 अगस्तसुबह 9:16

    शुक्र का तुला में प्रवेश

सितंबर 1970

  • 4 सितंबरशाम 6:56

    शनि मेष 29°11′ पर वक्री

  • 6 सितंबरशाम 4:04

    बुध अस्त (19 सितंबर तक)†

  • 9 सितंबररात 1:43

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 सितंबररात 11:25

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 19 सितंबररात 8:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 सितंबरसुबह 5:47

    बुध सिंह 20°20′ पर मार्गी

  • 23 सितंबरसुबह 7:00

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

अक्टूबर 1970

  • 3 अक्टूबरशाम 7:32

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 8 अक्टूबररात 1:31

    बुध अस्त (21 नवंबर तक)†

  • 10 अक्टूबरसुबह 8:31

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 11 अक्टूबररात 1:47

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरसुबह 11:19

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 20 अक्टूबररात 9:25

    शुक्र वृश्चिक 1°46′ पर वक्री

  • 21 अक्टूबरदोपहर 2:32

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 26 अक्टूबरसुबह 11:09

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (23 नवंबर तक)†

  • 30 अक्टूबरसुबह 8:01

    शुक्र का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

नवंबर 1970

  • 5 नवंबरदोपहर 1:52

    शुक्र अस्त (15 नवंबर तक)†

  • 9 नवंबररात 1:07

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 15 नवंबरदोपहर 2:17

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 नवंबरसुबह 11:02

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 21 नवंबरदोपहर 3:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 नवंबरसुबह 11:58

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 नवंबरदोपहर 2:29

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 28 नवंबररात 11:20

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 1970

  • 1 दिसंबरसुबह 5:34

    शुक्र तुला 16°20′ पर मार्गी

  • 11 दिसंबरदोपहर 3:08

    गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 दिसंबररात 1:36

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 19 दिसंबरसुबह 11:28

    बुध धनु 20°39′ पर वक्री

  • 23 दिसंबरसुबह 5:43

    बुध अस्त (3 जनवरी तक)†

  • 30 दिसंबरदोपहर 1:37

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और