मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1994: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1994 में राहु 19 मई को तुला में, गुरु (बृहस्पति) 11 नवंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 1994 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1994 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1994

  • 10 जनवरीदोपहर 12:20

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 14 जनवरीसुबह 9:47

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 14 जनवरीरात 11:02

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 20 जनवरीसुबह 8:48

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 25 जनवरीदोपहर 1:57

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 जनवरीसुबह 10:34

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

फ़रवरी 1994

  • 5 फ़रवरीरात 2:08

    शनि अस्त (10 मार्च तक)†

  • 7 फ़रवरीरात 8:18

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 11 फ़रवरीदोपहर 1:59

    बुध कुम्भ 13°49′ पर वक्री

  • 12 फ़रवरीरात 10:50

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 फ़रवरीरात 3:46

    बुध अस्त (26 फ़रवरी तक)†

  • 26 फ़रवरीसुबह 11:43

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 फ़रवरीशाम 6:25

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 27 फ़रवरीशाम 6:39

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 फ़रवरीशाम 7:02

    गुरु (बृहस्पति) तुला 20°53′ पर वक्री

  • 28 फ़रवरीरात 11:24

    बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

मार्च 1994

  • 3 मार्चशाम 7:59

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 5 मार्चसुबह 11:19

    बुध मकर 28°51′ पर मार्गी

  • 9 मार्चसुबह 8:33

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 मार्चसुबह 7:02

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 मार्चरात 10:33

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मार्चशाम 7:46

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 27 मार्चरात 11:46

    शुक्र का मेष में प्रवेश

अप्रैल 1994

  • 6 अप्रैलरात 1:10

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 6 अप्रैलरात 11:44

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 4:19

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 17 अप्रैलरात 3:59

    बुध अस्त (13 मई तक)†

  • 21 अप्रैलसुबह 9:26

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 22 अप्रैलरात 10:24

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 1994

  • 7 मईरात 3:10

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 13 मईरात 12:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 मईरात 1:12

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईरात 10:03

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 16 मईरात 2:41

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 19 मईसुबह 10:16

    राहु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 19 मईसुबह 10:16

    केतु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 23 मईशाम 6:33

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जून 1994

  • 10 जूनसुबह 6:03

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 12 जूनरात 11:17

    बुध मिथुन 14°38′ पर वक्री

  • 15 जूनसुबह 7:47

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 17 जूनसुबह 8:32

    बुध अस्त (4 जुलाई तक)†

  • 23 जूनसुबह 8:53

    शनि कुम्भ 18°38′ पर वक्री

  • 25 जूनसुबह 11:11

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

जुलाई 1994

  • 2 जुलाईसुबह 9:21

    गुरु (बृहस्पति) तुला 10°59′ पर मार्गी

  • 4 जुलाईसुबह 4:01

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 6 जुलाईरात 12:51

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 7 जुलाईरात 1:13

    बुध मिथुन 5°38′ पर मार्गी

  • 16 जुलाईशाम 6:38

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 31 जुलाईरात 2:42

    बुध अस्त (28 अगस्त तक)†

  • 31 जुलाईसुबह 6:43

    बुध का कर्क में प्रवेश

अगस्त 1994

  • 1 अगस्तरात 11:49

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 7 अगस्तदोपहर 3:00

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 15 अगस्तरात 2:28

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तरात 3:02

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 28 अगस्तदोपहर 2:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 31 अगस्तदोपहर 1:14

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 31 अगस्तरात 8:17

    शुक्र का तुला में प्रवेश

सितंबर 1994

  • 17 सितंबररात 2:57

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 21 सितंबरशाम 5:09

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 24 सितंबररात 2:58

    मंगल का कर्क में प्रवेश

अक्टूबर 1994

  • 9 अक्टूबरदोपहर 12:13

    बुध तुला 12°42′ पर वक्री

  • 13 अक्टूबरसुबह 11:09

    शुक्र तुला 24°14′ पर वक्री

  • 15 अक्टूबरशाम 5:48

    बुध अस्त (27 अक्टूबर तक)†

  • 17 अक्टूबरदोपहर 2:53

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 24 अक्टूबरशाम 5:58

    बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 27 अक्टूबरदोपहर 12:07

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 अक्टूबररात 3:56

    शुक्र अस्त (8 नवंबर तक)†

  • 30 अक्टूबरसुबह 9:35

    बुध कन्या 27°02′ पर मार्गी

नवंबर 1994

  • 4 नवंबररात 12:47

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (1 दिसंबर तक)†

  • 5 नवंबरसुबह 8:50

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 8 नवंबरसुबह 5:01

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 नवंबरदोपहर 2:37

    शनि कुम्भ 11°54′ पर मार्गी

  • 11 नवंबरसुबह 11:30

    गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबरदोपहर 2:39

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 19 नवंबरसुबह 4:28

    बुध अस्त (7 जनवरी तक)†

  • 22 नवंबरशाम 7:00

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 23 नवंबररात 10:28

    शुक्र तुला 8°42′ पर मार्गी

  • 26 नवंबरसुबह 11:18

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 1994

  • 1 दिसंबररात 11:27

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 दिसंबरदोपहर 1:29

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 5:15

    सूर्य का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और