पंचांग · गोचर
गोचर 1994: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1994 में राहु 19 मई को तुला में, गुरु (बृहस्पति) 11 नवंबर को वृश्चिक में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ब्रैम्पटन के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में।
1 जनवरी 1994 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 1993 से, 13 जनवरी 1994 तक
- चन्द्रकर्क में29 दिसंबर 1993 से, 1 जनवरी 1994 तक
- मंगलधनु में11 दिसंबर 1993 से, 19 जनवरी 1994 तक
- बुधधनु में22 दिसंबर 1993 से, 10 जनवरी 1994 तक
- गुरु (बृहस्पति)तुला में12 अक्टूबर 1993 से, 11 नवंबर 1994 तक
- शुक्रधनु में21 दिसंबर 1993 से, 14 जनवरी 1994 तक
- शनिकुम्भ में9 नवंबर 1993 से, 1 जून 1995 तक
- राहुवृश्चिक में29 अक्टूबर 1992 से, 19 मई 1994 तक
- केतुवृषभ में29 अक्टूबर 1992 से, 19 मई 1994 तक
1994 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ब्रैम्पटन के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1994
10 जनवरीरात 1:50
बुध का मकर में प्रवेश
13 जनवरीरात 11:17
सूर्य का मकर में प्रवेश
14 जनवरीदोपहर 12:32
शुक्र का मकर में प्रवेश
19 जनवरीरात 10:18
मंगल का मकर में प्रवेश
25 जनवरीरात 3:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 जनवरीरात 12:04
बुध का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 1994
4 फ़रवरीदोपहर 3:38
शनि अस्त (10 मार्च तक)†
7 फ़रवरीसुबह 9:48
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
11 फ़रवरीरात 3:29
बुध कुम्भ 13°49′ पर वक्री
12 फ़रवरीदोपहर 12:20
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीशाम 5:16
बुध अस्त (26 फ़रवरी तक)†
26 फ़रवरीरात 1:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 फ़रवरीसुबह 7:55
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
27 फ़रवरीसुबह 8:09
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
28 फ़रवरीसुबह 8:32
गुरु (बृहस्पति) तुला 20°53′ पर वक्री
28 फ़रवरीदोपहर 12:54
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
मार्च 1994
3 मार्चसुबह 9:29
शुक्र का मीन में प्रवेश
5 मार्चरात 12:49
बुध मकर 28°51′ पर मार्गी
8 मार्चरात 10:03
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
9 मार्चरात 8:32
बुध का कुम्भ में प्रवेश
10 मार्चदोपहर 12:03
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मार्चसुबह 9:16
सूर्य का मीन में प्रवेश
27 मार्चदोपहर 1:16
शुक्र का मेष में प्रवेश
अप्रैल 1994
5 अप्रैलदोपहर 3:40
बुध का मीन में प्रवेश
6 अप्रैलदोपहर 2:14
मंगल का मीन में प्रवेश
13 अप्रैलशाम 6:49
सूर्य का मेष में प्रवेश
16 अप्रैलशाम 6:29
बुध अस्त (12 मई तक)†
20 अप्रैलरात 11:56
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
22 अप्रैलदोपहर 12:54
बुध का मेष में प्रवेश
मई 1994
6 मईशाम 5:40
बुध का वृषभ में प्रवेश
12 मईदोपहर 3:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मईदोपहर 3:42
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
15 मईदोपहर 12:33
मंगल का मेष में प्रवेश
15 मईशाम 5:11
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
19 मईरात 12:46
राहु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
19 मईरात 12:46
केतु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
23 मईसुबह 9:03
बुध का मिथुन में प्रवेश
जून 1994
9 जूनरात 8:33
शुक्र का कर्क में प्रवेश
12 जूनदोपहर 1:47
बुध मिथुन 14°38′ पर वक्री
14 जूनरात 10:17
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जूनरात 11:02
बुध अस्त (3 जुलाई तक)†
22 जूनरात 11:23
शनि कुम्भ 18°38′ पर वक्री
25 जूनरात 1:41
मंगल का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 1994
1 जुलाईरात 11:51
गुरु (बृहस्पति) तुला 10°59′ पर मार्गी
3 जुलाईशाम 6:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
5 जुलाईदोपहर 3:21
शुक्र का सिंह में प्रवेश
6 जुलाईदोपहर 3:43
बुध मिथुन 5°38′ पर मार्गी
16 जुलाईसुबह 9:08
सूर्य का कर्क में प्रवेश
30 जुलाईशाम 5:12
बुध अस्त (28 अगस्त तक)†
30 जुलाईरात 9:13
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 1994
1 अगस्तदोपहर 2:19
शुक्र का कन्या में प्रवेश
7 अगस्तसुबह 5:30
मंगल का मिथुन में प्रवेश
14 अगस्तशाम 4:58
बुध का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तशाम 5:32
सूर्य का सिंह में प्रवेश
28 अगस्तसुबह 4:40
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अगस्तरात 3:44
बुध का कन्या में प्रवेश
31 अगस्तसुबह 10:47
शुक्र का तुला में प्रवेश
सितंबर 1994
16 सितंबरशाम 5:27
सूर्य का कन्या में प्रवेश
21 सितंबरसुबह 7:39
बुध का तुला में प्रवेश
23 सितंबरशाम 5:28
मंगल का कर्क में प्रवेश
अक्टूबर 1994
9 अक्टूबररात 2:43
बुध तुला 12°42′ पर वक्री
13 अक्टूबररात 1:39
शुक्र तुला 24°14′ पर वक्री
15 अक्टूबरसुबह 8:18
बुध अस्त (27 अक्टूबर तक)†
17 अक्टूबरसुबह 5:23
सूर्य का तुला में प्रवेश
24 अक्टूबरसुबह 8:28
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
27 अक्टूबररात 2:37
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 अक्टूबरशाम 6:26
शुक्र अस्त (7 नवंबर तक)†
30 अक्टूबररात 12:05
बुध कन्या 27°02′ पर मार्गी
नवंबर 1994
3 नवंबरदोपहर 2:17
गुरु (बृहस्पति) अस्त (1 दिसंबर तक)†
4 नवंबररात 10:20
बुध का तुला में प्रवेश
7 नवंबरशाम 6:31
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
9 नवंबरसुबह 4:07
शनि कुम्भ 11°54′ पर मार्गी
11 नवंबररात 1:00
गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 4:09
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबरशाम 5:58
बुध अस्त (6 जनवरी तक)†
22 नवंबरसुबह 8:30
मंगल का सिंह में प्रवेश
23 नवंबरसुबह 11:58
शुक्र तुला 8°42′ पर मार्गी
26 नवंबररात 12:48
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
दिसंबर 1994
1 दिसंबरदोपहर 12:57
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
15 दिसंबररात 2:59
बुध का धनु में प्रवेश
15 दिसंबरशाम 6:45
सूर्य का धनु में प्रवेश
31 दिसंबरशाम 5:03
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
