पंचांग · गोचर
गोचर 1995: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1995 में शनि 2 जून को मीन में, शनि 10 अगस्त को कुम्भ में, राहु 6 दिसंबर को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 7 दिसंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ऑकलैंड के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।
1 जनवरी 1995 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 1994 से, 14 जनवरी 1995 तक
- चन्द्रधनु में31 दिसंबर 1994 से, 2 जनवरी 1995 तक
- मंगलसिंह में23 नवंबर 1994 से, 10 फ़रवरी 1995 तक
- बुधधनु में15 दिसंबर 1994 से, 3 जनवरी 1995 तक
- गुरु (बृहस्पति)वृश्चिक में11 नवंबर 1994 से, 7 दिसंबर 1995 तक
- शुक्रतुला में1 सितंबर 1994 से, 1 जनवरी 1995 तक
- शनिकुम्भ में10 नवंबर 1993 से, 2 जून 1995 तक
- राहुतुला में19 मई 1994 से, 6 दिसंबर 1995 तक
- केतुमेष में19 मई 1994 से, 6 दिसंबर 1995 तक
1995 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ऑकलैंड के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1995
1 जनवरीसुबह 11:03
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
3 जनवरीसुबह 10:22
मंगल सिंह 8°53′ पर वक्री
3 जनवरीदोपहर 2:40
बुध का मकर में प्रवेश
7 जनवरीशाम 4:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीरात 11:26
सूर्य का मकर में प्रवेश
26 जनवरीदोपहर 2:15
बुध मकर 27°29′ पर वक्री
29 जनवरीसुबह 10:30
बुध अस्त (10 फ़रवरी तक)†
30 जनवरीशाम 6:54
शुक्र का धनु में प्रवेश
फ़रवरी 1995
10 फ़रवरीसुबह 4:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 फ़रवरीसुबह 10:34
मंगल का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
13 फ़रवरीदोपहर 12:25
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीशाम 6:06
बुध मकर 11°50′ पर मार्गी
17 फ़रवरीदोपहर 3:12
शनि अस्त (23 मार्च तक)†
26 फ़रवरीरात 3:40
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 1995
10 मार्चरात 9:32
बुध का कुम्भ में प्रवेश
15 मार्चसुबह 9:18
सूर्य का मीन में प्रवेश
23 मार्चदोपहर 12:21
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
23 मार्चशाम 5:03
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
25 मार्चसुबह 5:22
मंगल कर्क 19°23′ पर मार्गी
30 मार्चसुबह 8:27
बुध का मीन में प्रवेश
31 मार्चसुबह 11:55
बुध अस्त (27 अप्रैल तक)†
अप्रैल 1995
1 अप्रैलरात 11:45
गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 21°36′ पर वक्री
14 अप्रैलशाम 4:51
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलरात 9:05
बुध का मेष में प्रवेश
17 अप्रैलदोपहर 12:28
शुक्र का मीन में प्रवेश
27 अप्रैलरात 8:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 अप्रैलदोपहर 1:05
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 1995
11 मईसुबह 10:30
मंगल का सिंह में प्रवेश
12 मईसुबह 8:17
शुक्र का मेष में प्रवेश
15 मईदोपहर 1:46
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
24 मईरात 9:01
बुध वृषभ 24°34′ पर वक्री
28 मईसुबह 5:04
बुध अस्त (14 जून तक)†
जून 1995
2 जूनदोपहर 2:07
शनि का मीन में प्रवेश
6 जूनरात 1:42
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
14 जूनसुबह 6:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जूनरात 8:24
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनशाम 6:59
बुध वृषभ 16°01′ पर मार्गी
30 जूनशाम 4:42
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 1995
6 जुलाईशाम 7:12
शनि मीन 0°58′ पर वक्री
7 जुलाईरात 3:12
बुध का मिथुन में प्रवेश
11 जुलाईसुबह 4:11
मंगल का कन्या में प्रवेश
16 जुलाईरात 12:15
बुध अस्त (11 अगस्त तक)†
16 जुलाईरात 2:31
शुक्र अस्त (27 सितंबर तक)†
17 जुलाईसुबह 7:20
सूर्य का कर्क में प्रवेश
23 जुलाईदोपहर 12:06
बुध का कर्क में प्रवेश
25 जुलाईसुबह 4:23
शुक्र का कर्क में प्रवेश
अगस्त 1995
3 अगस्तसुबह 5:01
गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 11°44′ पर मार्गी
7 अगस्तरात 3:47
बुध का सिंह में प्रवेश
10 अगस्तसुबह 11:39
शनि का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
11 अगस्तदोपहर 2:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
17 अगस्तदोपहर 3:47
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तदोपहर 12:19
शुक्र का सिंह में प्रवेश
25 अगस्तरात 3:05
बुध का कन्या में प्रवेश
29 अगस्तसुबह 7:14
मंगल का तुला में प्रवेश
सितंबर 1995
11 सितंबरशाम 5:06
शुक्र का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरदोपहर 3:46
सूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सितंबररात 9:14
बुध कन्या 26°23′ पर वक्री
27 सितंबरदोपहर 12:07
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
29 सितंबरदोपहर 3:02
बुध अस्त (11 अक्टूबर तक)†
अक्टूबर 1995
5 अक्टूबररात 9:05
शुक्र का तुला में प्रवेश
11 अक्टूबररात 11:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 अक्टूबरशाम 4:11
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
14 अक्टूबरदोपहर 1:47
बुध कन्या 11°12′ पर मार्गी
18 अक्टूबरसुबह 4:44
सूर्य का तुला में प्रवेश
29 अक्टूबररात 11:37
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
31 अक्टूबरशाम 7:08
बुध अस्त (19 दिसंबर तक)†
नवंबर 1995
1 नवंबररात 1:54
बुध का तुला में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 4:30
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नवंबरदोपहर 1:58
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
22 नवंबरसुबह 9:18
शनि कुम्भ 24°12′ पर मार्गी
22 नवंबररात 9:20
मंगल का धनु में प्रवेश
23 नवंबररात 2:33
शुक्र का धनु में प्रवेश
दिसंबर 1995
5 दिसंबरदोपहर 12:12
गुरु (बृहस्पति) अस्त (2 जनवरी तक)†
6 दिसंबररात 8:43
राहु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
6 दिसंबररात 8:43
केतु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
7 दिसंबरदोपहर 1:49
गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश
8 दिसंबरशाम 4:26
बुध का धनु में प्रवेश
16 दिसंबरशाम 7:05
सूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिसंबरसुबह 6:59
शुक्र का मकर में प्रवेश
19 दिसंबरसुबह 9:19
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 दिसंबरसुबह 9:21
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
