पंचांग · गोचर
गोचर 1995: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1995 में शनि 1 जून को मीन में, शनि 9 अगस्त को कुम्भ में, राहु 6 दिसंबर को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 6 दिसंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।
1 जनवरी 1995 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 1994 से, 14 जनवरी 1995 तक
- चन्द्रधनु में31 दिसंबर 1994 से, 2 जनवरी 1995 तक
- मंगलसिंह में22 नवंबर 1994 से, 9 फ़रवरी 1995 तक
- बुधधनु में15 दिसंबर 1994 से, 2 जनवरी 1995 तक
- गुरु (बृहस्पति)वृश्चिक में11 नवंबर 1994 से, 6 दिसंबर 1995 तक
- शुक्रवृश्चिक में31 दिसंबर 1994 से, 29 जनवरी 1995 तक
- शनिकुम्भ में9 नवंबर 1993 से, 1 जून 1995 तक
- राहुतुला में18 मई 1994 से, 6 दिसंबर 1995 तक
- केतुमेष में18 मई 1994 से, 6 दिसंबर 1995 तक
1995 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1995
2 जनवरीदोपहर 3:22
मंगल सिंह 8°53′ पर वक्री
2 जनवरीशाम 7:40
बुध का मकर में प्रवेश
6 जनवरीरात 9:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जनवरीसुबह 4:26
सूर्य का मकर में प्रवेश
25 जनवरीशाम 7:15
बुध मकर 27°29′ पर वक्री
28 जनवरीदोपहर 3:30
बुध अस्त (9 फ़रवरी तक)†
29 जनवरीरात 11:54
शुक्र का धनु में प्रवेश
फ़रवरी 1995
9 फ़रवरीसुबह 9:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
9 फ़रवरीदोपहर 3:34
मंगल का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
12 फ़रवरीशाम 5:25
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
15 फ़रवरीरात 11:06
बुध मकर 11°50′ पर मार्गी
16 फ़रवरीरात 8:12
शनि अस्त (22 मार्च तक)†
25 फ़रवरीसुबह 8:40
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 1995
10 मार्चरात 2:32
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चदोपहर 2:18
सूर्य का मीन में प्रवेश
22 मार्चशाम 6:21
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
22 मार्चरात 11:03
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
24 मार्चसुबह 11:22
मंगल कर्क 19°23′ पर मार्गी
29 मार्चदोपहर 2:27
बुध का मीन में प्रवेश
30 मार्चशाम 5:55
बुध अस्त (27 अप्रैल तक)†
अप्रैल 1995
1 अप्रैलसुबह 5:45
गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 21°36′ पर वक्री
13 अप्रैलरात 11:51
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 4:05
बुध का मेष में प्रवेश
16 अप्रैलशाम 7:28
शुक्र का मीन में प्रवेश
27 अप्रैलरात 3:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 अप्रैलरात 8:05
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 1995
10 मईशाम 5:30
मंगल का सिंह में प्रवेश
11 मईदोपहर 3:17
शुक्र का मेष में प्रवेश
14 मईरात 8:46
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
24 मईसुबह 4:01
बुध वृषभ 24°34′ पर वक्री
27 मईदोपहर 12:04
बुध अस्त (13 जून तक)†
जून 1995
1 जूनरात 9:07
शनि का मीन में प्रवेश
5 जूनसुबह 8:42
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
13 जूनदोपहर 1:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जूनरात 3:24
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जूनरात 1:59
बुध वृषभ 16°01′ पर मार्गी
29 जूनरात 11:42
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 1995
6 जुलाईरात 2:12
शनि मीन 0°58′ पर वक्री
6 जुलाईसुबह 10:12
बुध का मिथुन में प्रवेश
10 जुलाईसुबह 11:11
मंगल का कन्या में प्रवेश
15 जुलाईसुबह 7:15
बुध अस्त (10 अगस्त तक)†
15 जुलाईसुबह 9:31
शुक्र अस्त (26 सितंबर तक)†
16 जुलाईदोपहर 2:20
सूर्य का कर्क में प्रवेश
22 जुलाईशाम 7:06
बुध का कर्क में प्रवेश
24 जुलाईसुबह 11:23
शुक्र का कर्क में प्रवेश
अगस्त 1995
2 अगस्तदोपहर 12:01
गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 11°44′ पर मार्गी
6 अगस्तसुबह 10:47
बुध का सिंह में प्रवेश
9 अगस्तशाम 6:39
शनि का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
10 अगस्तरात 9:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 अगस्तरात 10:47
सूर्य का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तशाम 7:19
शुक्र का सिंह में प्रवेश
24 अगस्तसुबह 10:05
बुध का कन्या में प्रवेश
28 अगस्तदोपहर 2:14
मंगल का तुला में प्रवेश
सितंबर 1995
11 सितंबररात 12:06
शुक्र का कन्या में प्रवेश
16 सितंबररात 10:46
सूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सितंबरसुबह 4:14
बुध कन्या 26°23′ पर वक्री
26 सितंबरशाम 7:07
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
28 सितंबररात 10:02
बुध अस्त (11 अक्टूबर तक)†
अक्टूबर 1995
5 अक्टूबररात 3:05
शुक्र का तुला में प्रवेश
11 अक्टूबरसुबह 5:04
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 अक्टूबररात 10:11
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
13 अक्टूबरशाम 7:47
बुध कन्या 11°12′ पर मार्गी
17 अक्टूबरसुबह 10:44
सूर्य का तुला में प्रवेश
29 अक्टूबरसुबह 4:37
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
31 अक्टूबररात 12:08
बुध अस्त (18 दिसंबर तक)†
31 अक्टूबरसुबह 6:54
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 1995
16 नवंबरसुबह 9:30
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबरशाम 6:58
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
21 नवंबरदोपहर 2:18
शनि कुम्भ 24°12′ पर मार्गी
22 नवंबररात 2:20
मंगल का धनु में प्रवेश
22 नवंबरसुबह 7:33
शुक्र का धनु में प्रवेश
दिसंबर 1995
4 दिसंबरशाम 5:12
गुरु (बृहस्पति) अस्त (1 जनवरी तक)†
6 दिसंबररात 1:43
राहु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
6 दिसंबररात 1:43
केतु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
6 दिसंबरशाम 6:49
गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश
7 दिसंबररात 9:26
बुध का धनु में प्रवेश
16 दिसंबररात 12:05
सूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिसंबरसुबह 11:59
शुक्र का मकर में प्रवेश
18 दिसंबरदोपहर 2:19
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 दिसंबरदोपहर 2:21
बुध का मकर में प्रवेश
31 दिसंबरसुबह 6:30
मंगल का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
