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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1996: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1996 में शनि 16 फ़रवरी को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 26 दिसंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में।

1 जनवरी 1996 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1996 का गोचर कैलेंडर

सभी समय एडिलेड के स्थानीय समय (Australia/Adelaide, ACDT/ACST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1996

  • 2 जनवरीसुबह 5:49

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 जनवरीसुबह 8:20

    बुध मकर 11°22′ पर वक्री

  • 10 जनवरीदोपहर 1:07

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 जनवरीदोपहर 1:00

    बुध अस्त (24 जनवरी तक)†

  • 15 जनवरीरात 3:14

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 22 जनवरीशाम 6:16

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 24 जनवरीरात 8:24

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 जनवरीरात 8:47

    बुध धनु 25°19′ पर मार्गी

फ़रवरी 1996

  • 4 फ़रवरीसुबह 7:51

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 8 फ़रवरीरात 2:09

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 9 फ़रवरीसुबह 10:08

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीशाम 4:11

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीरात 10:03

    शनि का मीन में प्रवेश

मार्च 1996

  • 1 मार्चरात 12:23

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 1 मार्चरात 2:39

    शनि अस्त (4 अप्रैल तक)†

  • 4 मार्चरात 12:14

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 12 मार्चशाम 6:04

    बुध अस्त (11 अप्रैल तक)†

  • 14 मार्चदोपहर 1:04

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 17 मार्चरात 3:16

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 21 मार्चदोपहर 1:00

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 28 मार्चशाम 7:04

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

अप्रैल 1996

  • 4 अप्रैलसुबह 11:54

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 5 अप्रैलसुबह 11:01

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 11 अप्रैलसुबह 5:55

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 अप्रैलरात 8:36

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 24 अप्रैलरात 12:50

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 24 अप्रैलरात 10:51

    मंगल का मेष में प्रवेश

मई 1996

  • 4 मईसुबह 8:09

    बुध वृषभ 4°50′ पर वक्री

  • 4 मईदोपहर 12:40

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 5 मईरात 12:49

    गुरु (बृहस्पति) धनु 23°51′ पर वक्री

  • 7 मईरात 12:16

    बुध अस्त (23 मई तक)†

  • 14 मईशाम 5:31

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 16 मईदोपहर 2:45

    बुध का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 20 मईदोपहर 3:36

    शुक्र मिथुन 4°30′ पर वक्री

  • 22 मईरात 11:10

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 मईदोपहर 3:30

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 मईसुबह 4:32

    बुध मेष 25°51′ पर मार्गी

जून 1996

  • 4 जूनसुबह 9:33

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 4 जूनरात 8:11

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 5 जूनरात 11:17

    शुक्र अस्त (16 जून तक)†

  • 7 जूनरात 8:10

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 15 जूनरात 12:09

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जूनसुबह 4:30

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जूनदोपहर 12:44

    बुध अस्त (24 जुलाई तक)†

  • 29 जूनदोपहर 2:29

    बुध का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 1996

  • 2 जुलाईशाम 4:22

    शुक्र वृषभ 17°58′ पर मार्गी

  • 13 जुलाईरात 8:37

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईसुबह 11:02

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 17 जुलाईरात 12:57

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 19 जुलाईसुबह 5:26

    शनि मीन 13°36′ पर वक्री

  • 24 जुलाईरात 9:31

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जुलाईसुबह 8:31

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 30 जुलाईशाम 7:53

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

अगस्त 1996

  • 16 अगस्तशाम 7:27

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 19 अगस्तशाम 4:35

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 31 अगस्तसुबह 10:34

    मंगल का कर्क में प्रवेश

सितंबर 1996

  • 1 सितंबरशाम 5:04

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 4 सितंबररात 12:24

    गुरु (बृहस्पति) धनु 14°01′ पर मार्गी

  • 4 सितंबरदोपहर 3:16

    बुध कन्या 9°41′ पर वक्री

  • 11 सितंबरशाम 5:17

    बुध अस्त (24 सितंबर तक)†

  • 16 सितंबरशाम 7:22

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 19 सितंबररात 12:16

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 24 सितंबरशाम 4:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 सितंबररात 2:38

    बुध सिंह 25°11′ पर मार्गी

  • 29 सितंबररात 3:27

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अक्टूबर 1996

  • 4 अक्टूबररात 10:13

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 13 अक्टूबररात 1:42

    बुध अस्त (27 नवंबर तक)†

  • 17 अक्टूबरसुबह 7:19

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 19 अक्टूबरशाम 5:45

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 23 अक्टूबरशाम 6:32

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 24 अक्टूबरशाम 5:52

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

नवंबर 1996

  • 11 नवंबरसुबह 4:01

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबरसुबह 8:04

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 18 नवंबरसुबह 11:24

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 27 नवंबररात 8:40

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 नवंबरशाम 6:47

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 1996

  • 3 दिसंबररात 11:39

    शनि मीन 6°48′ पर मार्गी

  • 12 दिसंबरशाम 4:51

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 15 दिसंबररात 10:40

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 17 दिसंबररात 10:33

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 24 दिसंबरसुबह 6:15

    बुध धनु 25°25′ पर वक्री

  • 26 दिसंबरदोपहर 12:30

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश

  • 27 दिसंबररात 9:07

    बुध अस्त (7 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और