पंचांग · गोचर
गोचर 1996: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1996 में शनि 16 फ़रवरी को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 25 दिसंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय मॉन्ट्रियल के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में।
1 जनवरी 1996 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 1995 से, 14 जनवरी 1996 तक
- चन्द्रमेष में29 दिसंबर 1995 से, 1 जनवरी 1996 तक
- मंगलमकर में31 दिसंबर 1995 से, 7 फ़रवरी 1996 तक
- बुधमकर में27 दिसंबर 1995 से, 22 जनवरी 1996 तक
- गुरु (बृहस्पति)धनु में6 दिसंबर 1995 से, 25 दिसंबर 1996 तक
- शुक्रमकर में16 दिसंबर 1995 से, 9 जनवरी 1996 तक
- शनिकुम्भ में9 अगस्त 1995 से, 16 फ़रवरी 1996 तक
- राहुकन्या में6 दिसंबर 1995 से, 24 जून 1997 तक
- केतुमीन में6 दिसंबर 1995 से, 24 जून 1997 तक
1996 का गोचर कैलेंडर
सभी समय मॉन्ट्रियल के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1996
1 जनवरीदोपहर 2:19
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
9 जनवरीशाम 4:50
बुध मकर 11°22′ पर वक्री
9 जनवरीरात 9:37
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
12 जनवरीरात 9:30
बुध अस्त (24 जनवरी तक)†
14 जनवरीसुबह 11:44
सूर्य का मकर में प्रवेश
22 जनवरीरात 2:46
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
24 जनवरीसुबह 4:54
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जनवरीसुबह 5:17
बुध धनु 25°19′ पर मार्गी
फ़रवरी 1996
3 फ़रवरीशाम 4:21
शुक्र का मीन में प्रवेश
7 फ़रवरीसुबह 10:39
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
8 फ़रवरीशाम 6:38
बुध का मकर में प्रवेश
13 फ़रवरीरात 12:41
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीसुबह 6:33
शनि का मीन में प्रवेश
29 फ़रवरीसुबह 8:53
शुक्र का मेष में प्रवेश
29 फ़रवरीसुबह 11:09
शनि अस्त (3 अप्रैल तक)†
मार्च 1996
3 मार्चसुबह 8:44
बुध का कुम्भ में प्रवेश
12 मार्चरात 2:34
बुध अस्त (10 अप्रैल तक)†
13 मार्चरात 9:34
सूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्चसुबह 11:46
मंगल का मीन में प्रवेश
20 मार्चरात 9:30
बुध का मीन में प्रवेश
28 मार्चरात 3:34
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
अप्रैल 1996
3 अप्रैलरात 9:24
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
4 अप्रैलरात 8:31
बुध का मेष में प्रवेश
10 अप्रैलशाम 4:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 अप्रैलसुबह 7:06
सूर्य का मेष में प्रवेश
23 अप्रैलसुबह 11:20
बुध का वृषभ में प्रवेश
24 अप्रैलसुबह 9:21
मंगल का मेष में प्रवेश
मई 1996
3 मईशाम 6:39
बुध वृषभ 4°50′ पर वक्री
3 मईरात 11:10
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
4 मईसुबह 11:19
गुरु (बृहस्पति) धनु 23°51′ पर वक्री
6 मईसुबह 10:46
बुध अस्त (23 मई तक)†
14 मईसुबह 4:01
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मईरात 1:15
बुध का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
20 मईरात 2:06
शुक्र मिथुन 4°30′ पर वक्री
22 मईसुबह 9:40
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
23 मईरात 2:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 मईदोपहर 3:02
बुध मेष 25°51′ पर मार्गी
जून 1996
3 जूनरात 8:03
मंगल का वृषभ में प्रवेश
4 जूनसुबह 6:41
शुक्र का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
5 जूनसुबह 9:47
शुक्र अस्त (15 जून तक)†
7 जूनसुबह 6:40
बुध का वृषभ में प्रवेश
14 जूनसुबह 10:39
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
15 जूनदोपहर 3:00
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
28 जूनरात 11:14
बुध अस्त (24 जुलाई तक)†
29 जूनरात 12:59
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 1996
2 जुलाईरात 2:52
शुक्र वृषभ 17°58′ पर मार्गी
13 जुलाईसुबह 7:07
बुध का कर्क में प्रवेश
15 जुलाईरात 9:32
सूर्य का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 11:27
मंगल का मिथुन में प्रवेश
18 जुलाईदोपहर 3:56
शनि मीन 13°36′ पर वक्री
24 जुलाईसुबह 8:01
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 जुलाईशाम 7:01
बुध का सिंह में प्रवेश
30 जुलाईसुबह 6:23
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 1996
16 अगस्तसुबह 5:57
सूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अगस्तरात 3:05
बुध का कन्या में प्रवेश
30 अगस्तरात 9:04
मंगल का कर्क में प्रवेश
सितंबर 1996
1 सितंबररात 3:34
शुक्र का कर्क में प्रवेश
3 सितंबरसुबह 10:54
गुरु (बृहस्पति) धनु 14°01′ पर मार्गी
4 सितंबररात 1:46
बुध कन्या 9°41′ पर वक्री
11 सितंबररात 3:47
बुध अस्त (24 सितंबर तक)†
16 सितंबरसुबह 5:52
सूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सितंबरसुबह 10:46
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
24 सितंबररात 2:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 सितंबरदोपहर 1:08
बुध सिंह 25°11′ पर मार्गी
28 सितंबरदोपहर 1:57
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अक्टूबर 1996
4 अक्टूबरसुबह 8:43
बुध का कन्या में प्रवेश
12 अक्टूबरदोपहर 12:12
बुध अस्त (27 नवंबर तक)†
16 अक्टूबरशाम 5:49
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरसुबह 4:15
मंगल का सिंह में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 5:02
बुध का तुला में प्रवेश
24 अक्टूबरसुबह 4:22
शुक्र का कन्या में प्रवेश
नवंबर 1996
10 नवंबरदोपहर 12:31
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
15 नवंबरशाम 4:34
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरशाम 7:54
शुक्र का तुला में प्रवेश
27 नवंबरसुबह 5:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 नवंबररात 3:17
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 1996
3 दिसंबरसुबह 8:09
शनि मीन 6°48′ पर मार्गी
12 दिसंबररात 1:21
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
15 दिसंबरसुबह 7:10
सूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिसंबरसुबह 7:03
मंगल का कन्या में प्रवेश
23 दिसंबरदोपहर 2:45
बुध धनु 25°25′ पर वक्री
25 दिसंबररात 9:00
गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश
27 दिसंबरसुबह 5:37
बुध अस्त (7 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
