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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1997: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1997 में राहु 24 जून को सिंह में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।

1 जनवरी 1997 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1997 का गोचर कैलेंडर

सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1997

  • 5 जनवरीरात 12:53

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 5 जनवरीसुबह 6:34

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (2 फ़रवरी तक)†

  • 7 जनवरीसुबह 5:53

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 जनवरीदोपहर 2:41

    बुध धनु 9°10′ पर मार्गी

  • 13 जनवरीशाम 4:51

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 28 जनवरीरात 11:52

    शुक्र का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 1997

  • 2 फ़रवरीसुबह 8:59

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 4 फ़रवरीदोपहर 1:52

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 5 फ़रवरीशाम 6:32

    मंगल कन्या 12°07′ पर वक्री

  • 12 फ़रवरीसुबह 5:48

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 21 फ़रवरीसुबह 4:30

    शुक्र अस्त (10 मई तक)†

  • 21 फ़रवरीसुबह 10:03

    बुध अस्त (25 मार्च तक)†

  • 21 फ़रवरीरात 11:11

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 24 फ़रवरीसुबह 6:52

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 1997

  • 12 मार्चशाम 6:58

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 13 मार्चसुबह 9:26

    शनि अस्त (17 अप्रैल तक)†

  • 14 मार्चरात 2:42

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 18 मार्चरात 12:08

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 24 मार्चशाम 4:49

    मंगल का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 25 मार्चरात 10:32

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 मार्चसुबह 8:18

    बुध का मेष में प्रवेश

अप्रैल 1997

  • 11 अप्रैलसुबह 4:48

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 13 अप्रैलदोपहर 12:15

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलशाम 7:00

    बुध मेष 15°50′ पर वक्री

  • 17 अप्रैलरात 3:36

    बुध अस्त (2 मई तक)†

  • 17 अप्रैलसुबह 4:47

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 अप्रैलदोपहर 2:13

    मंगल सिंह 22°55′ पर मार्गी

मई 1997

  • 2 मईरात 9:20

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 5 मईसुबह 11:46

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 8 मईदोपहर 1:05

    बुध मेष 5°40′ पर मार्गी

  • 10 मईशाम 7:42

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मईसुबह 9:11

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 29 मईरात 10:04

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जून 1997

  • 3 जूनसुबह 9:36

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 5 जूनरात 1:24

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 9 जूनशाम 7:06

    गुरु (बृहस्पति) मकर 28°07′ पर वक्री

  • 13 जूनसुबह 11:25

    बुध अस्त (8 जुलाई तक)†

  • 14 जूनदोपहर 3:50

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 20 जूनशाम 7:30

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 23 जूनसुबह 11:39

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 24 जूनसुबह 5:41

    राहु का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 24 जूनसुबह 5:41

    केतु का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

जुलाई 1997

  • 4 जुलाईरात 8:26

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 8 जुलाईरात 2:57

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 जुलाईरात 2:45

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 18 जुलाईसुबह 5:16

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 22 जुलाईसुबह 6:35

    बुध का सिंह में प्रवेश

अगस्त 1997

  • 1 अगस्तसुबह 11:24

    शनि मीन 26°32′ पर वक्री

  • 3 अगस्तरात 9:24

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 12 अगस्तसुबह 4:56

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 16 अगस्तसुबह 11:09

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तदोपहर 2:48

    बुध सिंह 22°25′ पर वक्री

  • 24 अगस्तशाम 6:30

    बुध अस्त (7 सितंबर तक)†

सितंबर 1997

  • 6 सितंबरदोपहर 2:09

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 7 सितंबरदोपहर 12:10

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 सितंबररात 8:42

    बुध सिंह 8°53′ पर मार्गी

  • 16 सितंबरसुबह 11:05

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 19 सितंबरशाम 6:39

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 25 सितंबरशाम 5:15

    बुध अस्त (6 नवंबर तक)†

  • 28 सितंबरदोपहर 1:42

    बुध का कन्या में प्रवेश

अक्टूबर 1997

  • 2 अक्टूबरदोपहर 3:29

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 7 अक्टूबररात 11:53

    गुरु (बृहस्पति) मकर 18°16′ पर मार्गी

  • 15 अक्टूबरदोपहर 2:09

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 16 अक्टूबररात 11:03

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 30 अक्टूबररात 2:12

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 31 अक्टूबरशाम 5:08

    मंगल का धनु में प्रवेश

नवंबर 1997

  • 3 नवंबरसुबह 8:52

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 6 नवंबररात 3:48

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 नवंबररात 9:51

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 24 नवंबरशाम 5:02

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 1997

  • 1 दिसंबररात 10:36

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 7 दिसंबरसुबह 10:55

    बुध धनु 9°33′ पर वक्री

  • 10 दिसंबररात 2:26

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 11 दिसंबरदोपहर 1:44

    बुध अस्त (22 दिसंबर तक)†

  • 15 दिसंबरदोपहर 12:29

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 4:59

    शनि मीन 19°43′ पर मार्गी

  • 18 दिसंबरसुबह 5:31

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 22 दिसंबरदोपहर 12:38

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 दिसंबरदोपहर 3:19

    शुक्र मकर 10°07′ पर वक्री

  • 27 दिसंबरसुबह 5:41

    बुध वृश्चिक 23°14′ पर मार्गी

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और