पंचांग · गोचर
गोचर 1997: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1997 में राहु 24 जून को सिंह में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
1 जनवरी 1997 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 1996 से, 13 जनवरी 1997 तक
- चन्द्रकन्या में31 दिसंबर 1996 से, 2 जनवरी 1997 तक
- मंगलकन्या में17 दिसंबर 1996 से, 24 मार्च 1997 तक
- बुधवक्रीधनु में30 नवंबर 1996 से, 4 फ़रवरी 1997 तक
- गुरु (बृहस्पति)मकर में25 दिसंबर 1996 से, 8 जनवरी 1998 तक
- शुक्रवृश्चिक में11 दिसंबर 1996 से, 4 जनवरी 1997 तक
- शनिमीन में16 फ़रवरी 1996 से, 17 अप्रैल 1998 तक
- राहुकन्या में5 दिसंबर 1995 से, 24 जून 1997 तक
- केतुमीन में5 दिसंबर 1995 से, 24 जून 1997 तक
1997 का गोचर कैलेंडर
सभी समय सैन फ़्रांसिस्को के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1997
4 जनवरीरात 10:53
शुक्र का धनु में प्रवेश
5 जनवरीसुबह 4:34
गुरु (बृहस्पति) अस्त (2 फ़रवरी तक)†
7 जनवरीरात 3:53
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 जनवरीदोपहर 12:41
बुध धनु 9°10′ पर मार्गी
13 जनवरीदोपहर 2:51
सूर्य का मकर में प्रवेश
28 जनवरीरात 9:52
शुक्र का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 1997
2 फ़रवरीसुबह 6:59
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
4 फ़रवरीसुबह 11:52
बुध का मकर में प्रवेश
5 फ़रवरीशाम 4:32
मंगल कन्या 12°07′ पर वक्री
12 फ़रवरीरात 3:48
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
21 फ़रवरीरात 2:30
शुक्र अस्त (10 मई तक)†
21 फ़रवरीसुबह 8:03
बुध अस्त (25 मार्च तक)†
21 फ़रवरीरात 9:11
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
24 फ़रवरीसुबह 4:52
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 1997
12 मार्चशाम 4:58
बुध का मीन में प्रवेश
13 मार्चसुबह 7:26
शनि अस्त (17 अप्रैल तक)†
14 मार्चरात 12:42
सूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्चरात 10:08
शुक्र का मीन में प्रवेश
24 मार्चदोपहर 2:49
मंगल का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
25 मार्चरात 8:32
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 मार्चसुबह 6:18
बुध का मेष में प्रवेश
अप्रैल 1997
11 अप्रैलरात 2:48
शुक्र का मेष में प्रवेश
13 अप्रैलसुबह 10:15
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलशाम 5:00
बुध मेष 15°50′ पर वक्री
17 अप्रैलरात 1:36
बुध अस्त (2 मई तक)†
17 अप्रैलरात 2:47
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अप्रैलदोपहर 12:13
मंगल सिंह 22°55′ पर मार्गी
मई 1997
2 मईशाम 7:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
5 मईसुबह 9:46
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
8 मईसुबह 11:05
बुध मेष 5°40′ पर मार्गी
10 मईशाम 5:42
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मईसुबह 7:11
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
29 मईरात 8:04
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जून 1997
3 जूनसुबह 7:36
मंगल का कन्या में प्रवेश
4 जूनरात 11:24
बुध का वृषभ में प्रवेश
9 जूनशाम 5:06
गुरु (बृहस्पति) मकर 28°07′ पर वक्री
13 जूनसुबह 9:25
बुध अस्त (8 जुलाई तक)†
14 जूनदोपहर 1:50
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
20 जूनशाम 5:30
बुध का मिथुन में प्रवेश
23 जूनसुबह 9:39
शुक्र का कर्क में प्रवेश
24 जूनरात 3:41
राहु का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
24 जूनरात 3:41
केतु का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
जुलाई 1997
4 जुलाईशाम 6:26
बुध का कर्क में प्रवेश
8 जुलाईरात 12:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईरात 12:45
सूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुलाईरात 3:16
शुक्र का सिंह में प्रवेश
22 जुलाईसुबह 4:35
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 1997
1 अगस्तसुबह 9:24
शनि मीन 26°32′ पर वक्री
3 अगस्तशाम 7:24
मंगल का तुला में प्रवेश
12 अगस्तरात 2:56
शुक्र का कन्या में प्रवेश
16 अगस्तसुबह 9:09
सूर्य का सिंह में प्रवेश
17 अगस्तदोपहर 12:48
बुध सिंह 22°25′ पर वक्री
24 अगस्तशाम 4:30
बुध अस्त (7 सितंबर तक)†
सितंबर 1997
6 सितंबरदोपहर 12:09
शुक्र का तुला में प्रवेश
7 सितंबरसुबह 10:10
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
9 सितंबरशाम 6:42
बुध सिंह 8°53′ पर मार्गी
16 सितंबरसुबह 9:05
सूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सितंबरशाम 4:39
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
25 सितंबरदोपहर 3:15
बुध अस्त (6 नवंबर तक)†
28 सितंबरसुबह 11:42
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 1997
2 अक्टूबरदोपहर 1:29
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
7 अक्टूबररात 9:53
गुरु (बृहस्पति) मकर 18°16′ पर मार्गी
15 अक्टूबरदोपहर 12:09
बुध का तुला में प्रवेश
16 अक्टूबररात 9:03
सूर्य का तुला में प्रवेश
30 अक्टूबररात 12:12
शुक्र का धनु में प्रवेश
31 अक्टूबरदोपहर 3:08
मंगल का धनु में प्रवेश
नवंबर 1997
3 नवंबरसुबह 6:52
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
6 नवंबररात 1:48
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 नवंबरशाम 7:51
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
24 नवंबरदोपहर 3:02
बुध का धनु में प्रवेश
दिसंबर 1997
1 दिसंबररात 8:36
शुक्र का मकर में प्रवेश
7 दिसंबरसुबह 8:55
बुध धनु 9°33′ पर वक्री
10 दिसंबररात 12:26
मंगल का मकर में प्रवेश
11 दिसंबरसुबह 11:44
बुध अस्त (22 दिसंबर तक)†
15 दिसंबरसुबह 10:29
सूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिसंबररात 2:59
शनि मीन 19°43′ पर मार्गी
18 दिसंबररात 3:31
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
22 दिसंबरसुबह 10:38
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 दिसंबरदोपहर 1:19
शुक्र मकर 10°07′ पर वक्री
27 दिसंबररात 3:41
बुध वृश्चिक 23°14′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
