पंचांग · गोचर
गोचर 1999: ग्रह कब राशि बदलते हैं
1999 में राहु 11 जनवरी को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 13 जनवरी को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 26 मई को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय क्वालालंपुर के स्थानीय समय (Asia/Kuala Lumpur, UTC+8) में।
1 जनवरी 1999 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 1998 से, 14 जनवरी 1999 तक
- चन्द्रवृषभ में30 दिसंबर 1998 से, 1 जनवरी 1999 तक
- मंगलकन्या में16 नवंबर 1998 से, 12 जनवरी 1999 तक
- बुधवृश्चिक में28 अक्टूबर 1998 से, 3 जनवरी 1999 तक
- गुरु (बृहस्पति)कुम्भ में10 सितंबर 1998 से, 13 जनवरी 1999 तक
- शुक्रमकर में31 दिसंबर 1998 से, 24 जनवरी 1999 तक
- शनिमेष में17 अप्रैल 1998 से, 7 जून 2000 तक
- राहुसिंह में24 जून 1997 से, 11 जनवरी 1999 तक
- केतुकुम्भ में24 जून 1997 से, 11 जनवरी 1999 तक
1999 का गोचर कैलेंडर
सभी समय क्वालालंपुर के स्थानीय समय (Asia/Kuala Lumpur, UTC+8) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 1999
3 जनवरीरात 3:46
बुध का धनु में प्रवेश
11 जनवरीरात 9:38
राहु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
11 जनवरीरात 9:38
केतु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
12 जनवरीसुबह 7:25
बुध अस्त (22 फ़रवरी तक)†
12 जनवरीशाम 5:10
मंगल का तुला में प्रवेश
13 जनवरीसुबह 5:39
गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश
14 जनवरीशाम 7:28
सूर्य का मकर में प्रवेश
22 जनवरीरात 10:27
बुध का मकर में प्रवेश
24 जनवरीरात 1:45
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
फ़रवरी 1999
9 फ़रवरीदोपहर 1:59
बुध का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीसुबह 8:27
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
17 फ़रवरीसुबह 5:06
शुक्र का मीन में प्रवेश
22 फ़रवरीसुबह 6:44
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 फ़रवरीदोपहर 1:11
बुध का मीन में प्रवेश
मार्च 1999
10 मार्चशाम 5:10
बुध मीन 10°13′ पर वक्री
13 मार्चरात 12:54
बुध अस्त (26 मार्च तक)†
13 मार्चशाम 4:07
शुक्र का मेष में प्रवेश
15 मार्चसुबह 5:18
सूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्चरात 10:05
गुरु (बृहस्पति) अस्त (16 अप्रैल तक)†
18 मार्चरात 9:36
मंगल तुला 18°22′ पर वक्री
25 मार्चशाम 7:05
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
26 मार्चशाम 4:17
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 1999
2 अप्रैलशाम 5:19
बुध कुम्भ 27°02′ पर मार्गी
7 अप्रैलदोपहर 3:55
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
10 अप्रैलरात 3:55
शनि अस्त (15 मई तक)†
11 अप्रैलरात 3:23
बुध का मीन में प्रवेश
14 अप्रैलदोपहर 1:45
सूर्य का मेष में प्रवेश
16 अप्रैलसुबह 10:03
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 1999
3 मईदोपहर 12:58
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
5 मईदोपहर 3:23
बुध का मेष में प्रवेश
13 मईदोपहर 2:16
बुध अस्त (7 जून तक)†
15 मईसुबह 10:34
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
15 मईदोपहर 2:49
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
21 मईसुबह 8:55
बुध का वृषभ में प्रवेश
26 मईशाम 6:58
गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश
31 मईरात 3:36
शुक्र का कर्क में प्रवेश
जून 1999
4 जूनसुबह 6:25
बुध का मिथुन में प्रवेश
4 जूनदोपहर 2:14
मंगल तुला 0°36′ पर मार्गी
7 जूनसुबह 4:30
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जूनशाम 5:07
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
21 जूनरात 8:53
बुध का कर्क में प्रवेश
जुलाई 1999
3 जुलाईसुबह 7:15
शुक्र का सिंह में प्रवेश
13 जुलाईसुबह 7:32
बुध कर्क 15°38′ पर वक्री
17 जुलाईरात 3:59
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईसुबह 10:43
बुध अस्त (4 अगस्त तक)†
30 जुलाईसुबह 9:40
शुक्र सिंह 11°17′ पर वक्री
अगस्त 1999
4 अगस्तरात 12:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अगस्तसुबह 11:27
बुध कर्क 4°44′ पर मार्गी
15 अगस्तशाम 5:13
शुक्र अस्त (25 अगस्त तक)†
17 अगस्तदोपहर 12:25
सूर्य का सिंह में प्रवेश
24 अगस्तरात 1:09
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
25 अगस्तसुबह 7:32
बुध अस्त (27 सितंबर तक)†
25 अगस्तसुबह 10:20
गुरु (बृहस्पति) मेष 11°08′ पर वक्री
25 अगस्तरात 10:12
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
26 अगस्तरात 2:09
शुक्र का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
28 अगस्तशाम 7:15
बुध का सिंह में प्रवेश
30 अगस्तसुबह 8:51
शनि मेष 23°20′ पर वक्री
सितंबर 1999
11 सितंबरसुबह 8:24
शुक्र कर्क 24°56′ पर मार्गी
13 सितंबरसुबह 10:25
बुध का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरदोपहर 12:23
सूर्य का कन्या में प्रवेश
27 सितंबरसुबह 7:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 सितंबरदोपहर 12:28
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अक्टूबर 1999
1 अक्टूबरसुबह 10:27
बुध का तुला में प्रवेश
8 अक्टूबरशाम 6:54
मंगल का धनु में प्रवेश
18 अक्टूबररात 12:21
सूर्य का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबररात 11:17
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 1999
3 नवंबरदोपहर 12:37
शुक्र का कन्या में प्रवेश
5 नवंबरसुबह 10:58
बुध वृश्चिक 7°53′ पर वक्री
10 नवंबरशाम 5:50
बुध अस्त (21 नवंबर तक)†
15 नवंबरशाम 4:33
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
17 नवंबररात 12:07
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबरदोपहर 1:13
मंगल का मकर में प्रवेश
21 नवंबररात 10:30
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 नवंबरसुबह 11:55
बुध तुला 21°46′ पर मार्गी
30 नवंबररात 11:01
शुक्र का तुला में प्रवेश
दिसंबर 1999
6 दिसंबरशाम 4:31
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 दिसंबरदोपहर 2:45
सूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिसंबररात 11:04
गुरु (बृहस्पति) मेष 1°10′ पर मार्गी
22 दिसंबररात 12:15
बुध अस्त (5 फ़रवरी तक)†
26 दिसंबरसुबह 10:23
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
27 दिसंबरदोपहर 12:47
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
27 दिसंबरदोपहर 3:00
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
