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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 1999: ग्रह कब राशि बदलते हैं

1999 में राहु 11 जनवरी को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 12 जनवरी को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 26 मई को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

1 जनवरी 1999 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

1999 का गोचर कैलेंडर

सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 1999

  • 2 जनवरीशाम 7:46

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 11 जनवरीदोपहर 1:38

    राहु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 जनवरीदोपहर 1:38

    केतु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 11 जनवरीरात 11:25

    बुध अस्त (21 फ़रवरी तक)†

  • 12 जनवरीसुबह 9:10

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 12 जनवरीरात 9:39

    गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश

  • 14 जनवरीसुबह 11:28

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 22 जनवरीदोपहर 2:27

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 23 जनवरीशाम 5:45

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

फ़रवरी 1999

  • 9 फ़रवरीसुबह 5:59

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीरात 12:27

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 16 फ़रवरीरात 9:06

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 21 फ़रवरीरात 10:44

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 फ़रवरीसुबह 5:11

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 1999

  • 10 मार्चसुबह 9:10

    बुध मीन 10°13′ पर वक्री

  • 12 मार्चशाम 4:54

    बुध अस्त (26 मार्च तक)†

  • 13 मार्चसुबह 8:07

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 14 मार्चरात 9:18

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 17 मार्चदोपहर 2:05

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (16 अप्रैल तक)†

  • 18 मार्चदोपहर 1:36

    मंगल तुला 18°22′ पर वक्री

  • 25 मार्चसुबह 11:05

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 26 मार्चसुबह 8:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अप्रैल 1999

  • 2 अप्रैलसुबह 10:19

    बुध कुम्भ 27°02′ पर मार्गी

  • 7 अप्रैलसुबह 8:55

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 9 अप्रैलरात 8:55

    शनि अस्त (15 मई तक)†

  • 10 अप्रैलरात 8:23

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 6:45

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 16 अप्रैलरात 3:03

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

मई 1999

  • 3 मईसुबह 5:58

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 5 मईसुबह 8:23

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 13 मईसुबह 7:16

    बुध अस्त (6 जून तक)†

  • 15 मईरात 3:34

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 7:49

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 मईरात 1:55

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 26 मईसुबह 11:58

    गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश

  • 30 मईरात 8:36

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

जून 1999

  • 3 जूनरात 11:25

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 4 जूनसुबह 7:14

    मंगल तुला 0°36′ पर मार्गी

  • 6 जूनरात 9:30

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 जूनसुबह 10:07

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 21 जूनदोपहर 1:53

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 1999

  • 3 जुलाईरात 12:15

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 13 जुलाईरात 12:32

    बुध कर्क 15°38′ पर वक्री

  • 16 जुलाईरात 8:59

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 19 जुलाईरात 3:43

    बुध अस्त (3 अगस्त तक)†

  • 30 जुलाईरात 2:40

    शुक्र सिंह 11°17′ पर वक्री

अगस्त 1999

  • 3 अगस्तशाम 5:27

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 6 अगस्तसुबह 4:27

    बुध कर्क 4°44′ पर मार्गी

  • 15 अगस्तसुबह 10:13

    शुक्र अस्त (25 अगस्त तक)†

  • 17 अगस्तसुबह 5:25

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 23 अगस्तशाम 6:09

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 25 अगस्तरात 12:32

    बुध अस्त (27 सितंबर तक)†

  • 25 अगस्तरात 3:20

    गुरु (बृहस्पति) मेष 11°08′ पर वक्री

  • 25 अगस्तदोपहर 3:12

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 अगस्तशाम 7:09

    शुक्र का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 28 अगस्तदोपहर 12:15

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 30 अगस्तरात 1:51

    शनि मेष 23°20′ पर वक्री

सितंबर 1999

  • 11 सितंबररात 1:24

    शुक्र कर्क 24°56′ पर मार्गी

  • 13 सितंबररात 3:25

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरसुबह 5:23

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 27 सितंबररात 12:00

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 सितंबरसुबह 5:28

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अक्टूबर 1999

  • 1 अक्टूबररात 3:27

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 8 अक्टूबरसुबह 11:54

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 17 अक्टूबरशाम 5:21

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 23 अक्टूबरशाम 4:17

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 1999

  • 3 नवंबरसुबह 4:37

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 5 नवंबररात 2:58

    बुध वृश्चिक 7°53′ पर वक्री

  • 10 नवंबरसुबह 9:50

    बुध अस्त (21 नवंबर तक)†

  • 15 नवंबरसुबह 8:33

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 16 नवंबरशाम 4:07

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 18 नवंबरसुबह 5:13

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 21 नवंबरदोपहर 2:30

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 नवंबररात 3:55

    बुध तुला 21°46′ पर मार्गी

  • 30 नवंबरदोपहर 3:01

    शुक्र का तुला में प्रवेश

दिसंबर 1999

  • 6 दिसंबरसुबह 8:31

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 6:45

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 20 दिसंबरदोपहर 3:04

    गुरु (बृहस्पति) मेष 1°10′ पर मार्गी

  • 21 दिसंबरशाम 4:15

    बुध अस्त (5 फ़रवरी तक)†

  • 26 दिसंबररात 2:23

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 27 दिसंबरसुबह 4:47

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 27 दिसंबरसुबह 7:00

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और