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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2000: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2000 में गुरु (बृहस्पति) 2 जून को वृषभ में, शनि 6 जून को वृषभ में, राहु 30 जुलाई को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय केप टाउन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में।

1 जनवरी 2000 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2000 का गोचर कैलेंडर

सभी समय केप टाउन के स्थानीय समय (Africa/Johannesburg, UTC+2) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2000

  • 12 जनवरीसुबह 7:28

    शनि मेष 16°26′ पर मार्गी

  • 14 जनवरीशाम 7:28

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीसुबह 7:41

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 19 जनवरीरात 9:28

    शुक्र का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 2000

  • 1 फ़रवरीरात 8:01

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 4 फ़रवरीरात 2:16

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 5 फ़रवरीरात 3:46

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 फ़रवरीसुबह 7:08

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीसुबह 8:28

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 21 फ़रवरीदोपहर 2:46

    बुध कुम्भ 23°19′ पर वक्री

  • 24 फ़रवरीरात 1:52

    बुध अस्त (7 मार्च तक)†

मार्च 2000

  • 7 मार्चरात 8:04

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 8 मार्चदोपहर 2:15

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 मार्चसुबह 5:22

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 14 मार्चशाम 7:41

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 14 मार्चरात 10:39

    बुध कुम्भ 8°55′ पर मार्गी

अप्रैल 2000

  • 1 अप्रैलरात 9:10

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 8 अप्रैलरात 8:45

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 13 अप्रैलदोपहर 1:52

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 23 अप्रैलरात 2:29

    शनि अस्त (28 मई तक)†

  • 23 अप्रैलसुबह 6:12

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (23 मई तक)†

  • 25 अप्रैलसुबह 4:22

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 26 अप्रैलसुबह 4:35

    बुध अस्त (21 मई तक)†

  • 26 अप्रैलसुबह 5:06

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 27 अप्रैलरात 2:03

    बुध का मेष में प्रवेश

मई 2000

  • 1 मईसुबह 11:16

    मंगल अस्त (25 अगस्त तक)†

  • 5 मईसुबह 4:17

    शुक्र अस्त (17 जुलाई तक)†

  • 11 मईदोपहर 1:15

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 14 मईसुबह 10:45

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 20 मईदोपहर 2:18

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 21 मईसुबह 10:38

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 मईसुबह 9:20

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 मईसुबह 11:45

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 28 मईरात 9:08

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

जून 2000

  • 2 जूनदोपहर 3:35

    गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश

  • 6 जूनरात 9:32

    शनि का वृषभ में प्रवेश

  • 7 जूनसुबह 11:54

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 14 जूनरात 12:16

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 14 जूनशाम 5:22

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 23 जूनसुबह 10:31

    बुध मिथुन 26°06′ पर वक्री

  • 28 जूनदोपहर 12:22

    बुध अस्त (14 जुलाई तक)†

जुलाई 2000

  • 8 जुलाईसुबह 10:10

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 14 जुलाईरात 11:01

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 जुलाईसुबह 4:16

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 17 जुलाईदोपहर 3:20

    बुध मिथुन 16°32′ पर मार्गी

  • 17 जुलाईरात 8:58

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 जुलाईशाम 4:37

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 30 जुलाईशाम 6:35

    राहु का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 30 जुलाईशाम 6:35

    केतु का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

अगस्त 2000

  • 1 अगस्तशाम 7:44

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 3 अगस्तदोपहर 3:08

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 8 अगस्तदोपहर 12:35

    बुध अस्त (7 सितंबर तक)†

  • 16 अगस्तदोपहर 12:42

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 19 अगस्तसुबह 10:38

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 25 अगस्तरात 11:46

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 26 अगस्तसुबह 5:36

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2000

  • 4 सितंबरसुबह 8:57

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 7 सितंबरसुबह 9:25

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 7 सितंबरसुबह 9:42

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 सितंबरदोपहर 1:03

    शनि वृषभ 7°07′ पर वक्री

  • 16 सितंबरदोपहर 12:41

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 19 सितंबरशाम 4:58

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 23 सितंबररात 9:57

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 29 सितंबरदोपहर 2:35

    गुरु (बृहस्पति) वृषभ 17°22′ पर वक्री

अक्टूबर 2000

  • 14 अक्टूबरसुबह 7:06

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 अक्टूबररात 12:38

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबरदोपहर 3:40

    बुध तुला 21°56′ पर वक्री

  • 24 अक्टूबरदोपहर 1:21

    बुध अस्त (5 नवंबर तक)†

  • 25 अक्टूबरसुबह 5:51

    मंगल का कन्या में प्रवेश

नवंबर 2000

  • 5 नवंबररात 1:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 8 नवंबररात 1:44

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 8 नवंबरसुबह 4:28

    बुध तुला 6°05′ पर मार्गी

  • 16 नवंबररात 12:25

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 29 नवंबररात 10:26

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 30 नवंबररात 1:37

    बुध अस्त (17 जनवरी तक)†

दिसंबर 2000

  • 3 दिसंबरसुबह 5:23

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 13 दिसंबरसुबह 9:23

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 15 दिसंबरदोपहर 3:01

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 19 दिसंबरसुबह 6:37

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 29 दिसंबरसुबह 6:59

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और