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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2001: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2001 में गुरु (बृहस्पति) 16 जून को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय पर्थ के स्थानीय समय (Australia/Perth, AWST) में।

1 जनवरी 2001 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2001 का गोचर कैलेंडर

सभी समय पर्थ के स्थानीय समय (Australia/Perth, AWST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2001

  • 7 जनवरीसुबह 4:39

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 14 जनवरीसुबह 7:43

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 17 जनवरीशाम 6:18

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 जनवरीसुबह 8:53

    शनि वृषभ 0°11′ पर मार्गी

  • 25 जनवरीशाम 4:53

    गुरु (बृहस्पति) वृषभ 7°19′ पर मार्गी

  • 26 जनवरीरात 1:58

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 27 जनवरीसुबह 8:24

    शुक्र का मीन में प्रवेश

फ़रवरी 2001

  • 3 फ़रवरीशाम 5:02

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 4 फ़रवरीसुबह 9:57

    बुध कुम्भ 6°50′ पर वक्री

  • 7 फ़रवरीरात 2:19

    बुध अस्त (19 फ़रवरी तक)†

  • 12 फ़रवरीरात 8:44

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीशाम 6:18

    बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 19 फ़रवरीरात 3:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 फ़रवरीरात 11:41

    बुध मकर 21°32′ पर मार्गी

मार्च 2001

  • 9 मार्चसुबह 9:05

    शुक्र मीन 23°52′ पर वक्री

  • 12 मार्चसुबह 4:10

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 मार्चशाम 5:40

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 25 मार्चदोपहर 12:32

    शुक्र अस्त (4 अप्रैल तक)†

अप्रैल 2001

  • 3 अप्रैलरात 12:34

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 4 अप्रैलदोपहर 12:23

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 अप्रैलशाम 7:58

    बुध अस्त (6 मई तक)†

  • 10 अप्रैलरात 8:45

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 14 अप्रैलरात 2:13

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 19 अप्रैलसुबह 5:19

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 20 अप्रैलदोपहर 12:35

    शुक्र मीन 7°35′ पर मार्गी

मई 2001

  • 3 मईसुबह 10:35

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 6 मईसुबह 6:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 मईरात 9:36

    शनि अस्त (12 जून तक)†

  • 12 मईरात 12:03

    मंगल धनु 5°11′ पर वक्री

  • 14 मईरात 11:05

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 22 मईरात 9:48

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 30 मईशाम 5:14

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (30 जून तक)†

  • 31 मईरात 2:23

    शुक्र का मेष में प्रवेश

जून 2001

  • 4 जूनदोपहर 1:21

    बुध मिथुन 6°05′ पर वक्री

  • 8 जूनसुबह 11:17

    बुध अस्त (25 जून तक)†

  • 10 जूनदोपहर 1:56

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 12 जूनरात 10:44

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 जूनसुबह 5:39

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जूनसुबह 10:01

    गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश

  • 19 जूनशाम 6:27

    बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 25 जूनसुबह 10:58

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 जूनदोपहर 1:49

    बुध वृषभ 27°23′ पर मार्गी

  • 30 जूनरात 12:56

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 जूनसुबह 7:57

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

जुलाई 2001

  • 6 जुलाईदोपहर 2:19

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जुलाईशाम 4:28

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 20 जुलाईसुबह 6:48

    मंगल वृश्चिक 21°14′ पर मार्गी

  • 24 जुलाईसुबह 8:47

    बुध अस्त (20 अगस्त तक)†

  • 27 जुलाईसुबह 11:36

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 27 जुलाईशाम 6:38

    बुध का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2001

  • 11 अगस्तसुबह 8:54

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तरात 12:48

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 20 अगस्तरात 11:12

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 अगस्तसुबह 8:08

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 26 अगस्तरात 11:47

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 28 अगस्तसुबह 8:23

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2001

  • 16 सितंबरसुबह 9:17

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 17 सितंबररात 12:42

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 20 सितंबरशाम 6:45

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 27 सितंबरसुबह 7:34

    शनि वृषभ 21°05′ पर वक्री

अक्टूबर 2001

  • 2 अक्टूबररात 3:22

    बुध तुला 5°49′ पर वक्री

  • 8 अक्टूबरदोपहर 2:41

    बुध अस्त (20 अक्टूबर तक)†

  • 10 अक्टूबररात 9:00

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 11 अक्टूबरशाम 7:13

    बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 अक्टूबरदोपहर 12:39

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबररात 11:31

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 20 अक्टूबरदोपहर 2:05

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 अक्टूबरसुबह 8:23

    बुध कन्या 20°19′ पर मार्गी

नवंबर 2001

  • 2 नवंबररात 11:18

    गुरु (बृहस्पति) मिथुन 21°49′ पर वक्री

  • 3 नवंबररात 11:15

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 4 नवंबररात 12:00

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 10 नवंबररात 8:55

    बुध अस्त (30 दिसंबर तक)†

  • 16 नवंबरदोपहर 12:27

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 23 नवंबरसुबह 5:44

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 27 नवंबररात 10:18

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 30 नवंबरशाम 7:35

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

दिसंबर 2001

  • 4 दिसंबरसुबह 4:32

    शुक्र अस्त (25 फ़रवरी तक)†

  • 12 दिसंबरसुबह 6:46

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबररात 3:06

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 21 दिसंबरशाम 6:43

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 30 दिसंबररात 2:44

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 31 दिसंबरसुबह 5:41

    बुध का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और