पंचांग · गोचर
गोचर 2001: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2001 में गुरु (बृहस्पति) 16 जून को मिथुन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय दुबई के स्थानीय समय (Asia/Dubai, GST) में।
1 जनवरी 2001 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2000 से, 14 जनवरी 2001 तक
- चन्द्रकुम्भ में30 दिसंबर 2000 से, 1 जनवरी 2001 तक
- मंगलतुला में13 दिसंबर 2000 से, 3 फ़रवरी 2001 तक
- बुधधनु में19 दिसंबर 2000 से, 7 जनवरी 2001 तक
- गुरु (बृहस्पति)वक्रीवृषभ में2 जून 2000 से, 16 जून 2001 तक
- शुक्रकुम्भ में29 दिसंबर 2000 से, 27 जनवरी 2001 तक
- शनिवक्रीवृषभ में6 जून 2000 से, 23 जुलाई 2002 तक
- राहुमिथुन में30 जुलाई 2000 से, 16 फ़रवरी 2002 तक
- केतुधनु में30 जुलाई 2000 से, 16 फ़रवरी 2002 तक
2001 का गोचर कैलेंडर
सभी समय दुबई के स्थानीय समय (Asia/Dubai, GST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2001
7 जनवरीरात 12:39
बुध का मकर में प्रवेश
14 जनवरीरात 3:43
सूर्य का मकर में प्रवेश
17 जनवरीदोपहर 2:18
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 जनवरीसुबह 4:53
शनि वृषभ 0°11′ पर मार्गी
25 जनवरीदोपहर 12:53
गुरु (बृहस्पति) वृषभ 7°19′ पर मार्गी
25 जनवरीरात 9:58
बुध का कुम्भ में प्रवेश
27 जनवरीसुबह 4:24
शुक्र का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2001
3 फ़रवरीदोपहर 1:02
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
4 फ़रवरीसुबह 5:57
बुध कुम्भ 6°50′ पर वक्री
6 फ़रवरीरात 10:19
बुध अस्त (18 फ़रवरी तक)†
12 फ़रवरीशाम 4:44
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीदोपहर 2:18
बुध का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
18 फ़रवरीरात 11:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 फ़रवरीशाम 7:41
बुध मकर 21°32′ पर मार्गी
मार्च 2001
9 मार्चसुबह 5:05
शुक्र मीन 23°52′ पर वक्री
12 मार्चरात 12:10
बुध का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चदोपहर 1:40
सूर्य का मीन में प्रवेश
25 मार्चसुबह 8:32
शुक्र अस्त (4 अप्रैल तक)†
अप्रैल 2001
2 अप्रैलरात 8:34
बुध का मीन में प्रवेश
4 अप्रैलसुबह 8:23
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
9 अप्रैलदोपहर 3:58
बुध अस्त (6 मई तक)†
10 अप्रैलशाम 4:45
मंगल का धनु में प्रवेश
13 अप्रैलरात 10:13
सूर्य का मेष में प्रवेश
19 अप्रैलरात 1:19
बुध का मेष में प्रवेश
20 अप्रैलसुबह 8:35
शुक्र मीन 7°35′ पर मार्गी
मई 2001
3 मईसुबह 6:35
बुध का वृषभ में प्रवेश
6 मईरात 2:08
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
7 मईशाम 5:36
शनि अस्त (12 जून तक)†
11 मईरात 8:03
मंगल धनु 5°11′ पर वक्री
14 मईशाम 7:05
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
22 मईशाम 5:48
बुध का मिथुन में प्रवेश
30 मईदोपहर 1:14
गुरु (बृहस्पति) अस्त (29 जून तक)†
30 मईरात 10:23
शुक्र का मेष में प्रवेश
जून 2001
4 जूनसुबह 9:21
बुध मिथुन 6°05′ पर वक्री
8 जूनसुबह 7:17
बुध अस्त (25 जून तक)†
10 जूनसुबह 9:56
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
12 जूनशाम 6:44
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
15 जूनरात 1:39
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जूनसुबह 6:01
गुरु (बृहस्पति) का मिथुन में प्रवेश
19 जूनदोपहर 2:27
बुध का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
25 जूनसुबह 6:58
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 जूनसुबह 9:49
बुध वृषभ 27°23′ पर मार्गी
29 जूनरात 8:56
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जूनरात 3:57
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2001
6 जुलाईसुबह 10:19
बुध का मिथुन में प्रवेश
16 जुलाईदोपहर 12:28
सूर्य का कर्क में प्रवेश
20 जुलाईरात 2:48
मंगल वृश्चिक 21°14′ पर मार्गी
24 जुलाईसुबह 4:47
बुध अस्त (20 अगस्त तक)†
27 जुलाईसुबह 7:36
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
27 जुलाईदोपहर 2:38
बुध का कर्क में प्रवेश
अगस्त 2001
11 अगस्तसुबह 4:54
बुध का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तरात 8:48
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तशाम 7:12
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
22 अगस्तसुबह 4:08
शुक्र का कर्क में प्रवेश
26 अगस्तशाम 7:47
मंगल का धनु में प्रवेश
28 अगस्तसुबह 4:23
बुध का कन्या में प्रवेश
सितंबर 2001
16 सितंबरसुबह 5:17
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 सितंबररात 8:42
सूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सितंबरदोपहर 2:45
बुध का तुला में प्रवेश
27 सितंबररात 3:34
शनि वृषभ 21°05′ पर वक्री
अक्टूबर 2001
1 अक्टूबररात 11:22
बुध तुला 5°49′ पर वक्री
8 अक्टूबरसुबह 10:41
बुध अस्त (20 अक्टूबर तक)†
10 अक्टूबरशाम 5:00
शुक्र का कन्या में प्रवेश
11 अक्टूबरदोपहर 3:13
बुध का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
17 अक्टूबरसुबह 8:39
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबरशाम 7:31
मंगल का मकर में प्रवेश
20 अक्टूबरसुबह 10:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
23 अक्टूबरसुबह 4:23
बुध कन्या 20°19′ पर मार्गी
नवंबर 2001
2 नवंबरशाम 7:18
गुरु (बृहस्पति) मिथुन 21°49′ पर वक्री
3 नवंबरशाम 7:15
बुध का तुला में प्रवेश
3 नवंबररात 8:00
शुक्र का तुला में प्रवेश
10 नवंबरशाम 4:55
बुध अस्त (29 दिसंबर तक)†
16 नवंबरसुबह 8:27
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
23 नवंबररात 1:44
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
27 नवंबरशाम 6:18
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
30 नवंबरदोपहर 3:35
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
दिसंबर 2001
4 दिसंबररात 12:32
शुक्र अस्त (25 फ़रवरी तक)†
12 दिसंबररात 2:46
बुध का धनु में प्रवेश
15 दिसंबररात 11:06
सूर्य का धनु में प्रवेश
21 दिसंबरदोपहर 2:43
शुक्र का धनु में प्रवेश
29 दिसंबररात 10:44
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 दिसंबररात 1:41
बुध का मकर में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
