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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2003: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2003 में शनि 8 जनवरी को वृषभ में, शनि 7 अप्रैल को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 30 जुलाई को सिंह में, राहु 5 सितंबर को मेष में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय मैनचेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

1 जनवरी 2003 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2003 का गोचर कैलेंडर

सभी समय मैनचेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2003

  • 1 जनवरीसुबह 5:43

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 2 जनवरीशाम 6:18

    बुध मकर 4°34′ पर वक्री

  • 6 जनवरीरात 2:58

    बुध अस्त (17 जनवरी तक)†

  • 7 जनवरीशाम 5:04

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 8 जनवरीसुबह 8:21

    शनि का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 9 जनवरीशाम 5:27

    बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 जनवरीसुबह 11:57

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 17 जनवरीसुबह 7:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 जनवरीरात 1:08

    बुध धनु 18°24′ पर मार्गी

  • 30 जनवरीरात 2:32

    शुक्र का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 2003

  • 8 फ़रवरीरात 2:44

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीरात 12:54

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 22 फ़रवरीसुबह 8:09

    शनि वृषभ 28°14′ पर मार्गी

  • 23 फ़रवरीसुबह 8:06

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 25 फ़रवरीसुबह 7:52

    शुक्र का मकर में प्रवेश

मार्च 2003

  • 1 मार्चसुबह 8:47

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 5 मार्चसुबह 4:57

    बुध अस्त (4 अप्रैल तक)†

  • 14 मार्चरात 9:46

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 18 मार्चसुबह 9:13

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 22 मार्चदोपहर 3:53

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

अप्रैल 2003

  • 2 अप्रैलसुबह 10:16

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 4 अप्रैलसुबह 4:21

    गुरु (बृहस्पति) कर्क 14°10′ पर मार्गी

  • 4 अप्रैलरात 10:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 7 अप्रैलदोपहर 3:48

    शनि का मिथुन में प्रवेश

  • 12 अप्रैलरात 12:01

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 7:17

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 16 अप्रैलशाम 4:01

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 26 अप्रैलदोपहर 12:58

    बुध मेष 26°39′ पर वक्री

  • 29 अप्रैलरात 12:52

    बुध अस्त (15 मई तक)†

मई 2003

  • 11 मईसुबह 11:12

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 4:11

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 7:57

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 मईसुबह 8:33

    बुध मेष 17°13′ पर मार्गी

जून 2003

  • 3 जूनरात 9:18

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 5 जूनसुबह 4:13

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 6 जूनसुबह 10:47

    शनि अस्त (12 जुलाई तक)†

  • 8 जूनदोपहर 2:12

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 15 जूनसुबह 10:49

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 23 जूनसुबह 7:25

    बुध अस्त (18 जुलाई तक)†

  • 26 जूनदोपहर 1:29

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 29 जूनशाम 6:56

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2003

  • 10 जुलाईदोपहर 1:46

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 12 जुलाईशाम 7:17

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 जुलाईसुबह 9:46

    शुक्र अस्त (24 सितंबर तक)†

  • 16 जुलाईरात 9:42

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 18 जुलाईसुबह 7:24

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 जुलाईसुबह 6:29

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 26 जुलाईशाम 5:12

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 29 जुलाईसुबह 8:32

    मंगल कुम्भ 16°14′ पर वक्री

  • 30 जुलाईसुबह 7:22

    गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश

अगस्त 2003

  • 7 अगस्तदोपहर 3:47

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (6 सितंबर तक)†

  • 17 अगस्तसुबह 6:07

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तदोपहर 2:21

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 21 अगस्तरात 2:33

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 28 अगस्तदोपहर 2:40

    बुध कन्या 2°25′ पर वक्री

सितंबर 2003

  • 4 सितंबरदोपहर 1:10

    बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 4 सितंबरशाम 6:07

    बुध अस्त (18 सितंबर तक)†

  • 5 सितंबररात 11:30

    राहु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 5 सितंबररात 11:30

    केतु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 6 सितंबररात 3:32

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 सितंबरशाम 7:11

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरसुबह 6:04

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 18 सितंबररात 12:34

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 सितंबरसुबह 9:52

    बुध सिंह 18°18′ पर मार्गी

  • 24 सितंबरशाम 5:15

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 सितंबरसुबह 8:56

    मंगल कुम्भ 6°13′ पर मार्गी

अक्टूबर 2003

  • 3 अक्टूबरसुबह 8:38

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 4 अक्टूबररात 10:20

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 6 अक्टूबरसुबह 4:48

    बुध अस्त (19 नवंबर तक)†

  • 17 अक्टूबरशाम 6:01

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 20 अक्टूबररात 9:37

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 26 अक्टूबररात 12:12

    शनि मिथुन 19°20′ पर वक्री

  • 29 अक्टूबररात 12:07

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

नवंबर 2003

  • 8 नवंबरसुबह 8:26

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबरशाम 4:49

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 19 नवंबरसुबह 4:44

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 नवंबररात 3:22

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 28 नवंबरसुबह 10:38

    बुध का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2003

  • 5 दिसंबरशाम 6:45

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 7:28

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरसुबह 8:12

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 17 दिसंबरशाम 4:00

    बुध धनु 18°39′ पर वक्री

  • 21 दिसंबरसुबह 11:44

    बुध अस्त (1 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और