पंचांग · गोचर
गोचर 2004: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2004 में गुरु (बृहस्पति) 27 अगस्त को कन्या में, शनि 5 सितंबर को कर्क में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय सैन होज़े के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में।
1 जनवरी 2004 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2003 से, 14 जनवरी 2004 तक
- चन्द्रमेष में31 दिसंबर 2003 से, 2 जनवरी 2004 तक
- मंगलमीन में5 दिसंबर 2003 से, 24 जनवरी 2004 तक
- बुधवक्रीधनु में28 नवंबर 2003 से, 2 फ़रवरी 2004 तक
- गुरु (बृहस्पति)सिंह में29 जुलाई 2003 से, 27 अगस्त 2004 तक
- शुक्रमकर में16 दिसंबर 2003 से, 9 जनवरी 2004 तक
- शनिवक्रीमिथुन में7 अप्रैल 2003 से, 5 सितंबर 2004 तक
- राहुमेष में5 सितंबर 2003 से, 24 मार्च 2005 तक
- केतुतुला में5 सितंबर 2003 से, 24 मार्च 2005 तक
2004 का गोचर कैलेंडर
सभी समय सैन होज़े के स्थानीय समय (America/Los Angeles, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2004
1 जनवरीरात 3:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
3 जनवरीदोपहर 3:40
गुरु (बृहस्पति) सिंह 24°59′ पर वक्री
6 जनवरीसुबह 5:44
बुध धनु 2°22′ पर मार्गी
9 जनवरीसुबह 9:24
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
14 जनवरीसुबह 10:11
सूर्य का मकर में प्रवेश
24 जनवरीसुबह 11:04
मंगल का मेष में प्रवेश
फ़रवरी 2004
2 फ़रवरीशाम 5:11
बुध का मकर में प्रवेश
3 फ़रवरीसुबह 5:10
शुक्र का मीन में प्रवेश
12 फ़रवरीरात 11:09
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीशाम 5:54
बुध अस्त (18 मार्च तक)†
21 फ़रवरीशाम 5:14
बुध का कुम्भ में प्रवेश
28 फ़रवरीरात 11:48
शुक्र का मेष में प्रवेश
मार्च 2004
7 मार्चसुबह 9:20
शनि मिथुन 12°22′ पर मार्गी
8 मार्चरात 11:14
बुध का मीन में प्रवेश
11 मार्चसुबह 11:37
मंगल का वृषभ में प्रवेश
13 मार्चरात 8:01
सूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्चशाम 7:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
25 मार्चशाम 5:42
बुध का मेष में प्रवेश
28 मार्चरात 12:18
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
अप्रैल 2004
6 अप्रैलदोपहर 1:26
बुध मेष 8°01′ पर वक्री
8 अप्रैलरात 8:52
बुध अस्त (24 अप्रैल तक)†
13 अप्रैलसुबह 5:31
सूर्य का मेष में प्रवेश
21 अप्रैलशाम 5:52
बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
24 अप्रैलरात 3:51
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 अप्रैलसुबह 11:40
मंगल का मिथुन में प्रवेश
30 अप्रैलसुबह 6:05
बुध मीन 27°12′ पर मार्गी
मई 2004
4 मईरात 8:24
गुरु (बृहस्पति) सिंह 15°00′ पर मार्गी
6 मईदोपहर 1:15
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
8 मईशाम 6:50
बुध का मेष में प्रवेश
14 मईरात 2:24
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मईदोपहर 3:26
शुक्र मिथुन 2°13′ पर वक्री
28 मईसुबह 5:02
शुक्र का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
जून 2004
1 जूनरात 9:55
बुध का वृषभ में प्रवेश
2 जूनरात 11:19
शुक्र अस्त (13 जून तक)†
6 जूनसुबह 11:20
बुध अस्त (30 जून तक)†
13 जूनसुबह 4:19
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
13 जूनरात 10:05
मंगल का कर्क में प्रवेश
14 जूनसुबह 9:01
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जूनशाम 6:19
बुध का मिथुन में प्रवेश
20 जूनसुबह 5:02
शनि अस्त (26 जुलाई तक)†
29 जूनशाम 4:16
शुक्र वृषभ 15°43′ पर मार्गी
30 जूनरात 10:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
जुलाई 2004
1 जुलाईरात 1:13
बुध का कर्क में प्रवेश
15 जुलाईशाम 7:53
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईरात 10:49
बुध का सिंह में प्रवेश
25 जुलाईसुबह 9:31
मंगल अस्त (4 नवंबर तक)†
26 जुलाईदोपहर 1:42
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जुलाईशाम 7:10
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
31 जुलाईदोपहर 12:25
मंगल का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2004
9 अगस्तशाम 5:32
बुध सिंह 14°52′ पर वक्री
16 अगस्तसुबह 4:15
सूर्य का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तशाम 7:16
बुध अस्त (30 अगस्त तक)†
27 अगस्तसुबह 10:57
गुरु (बृहस्पति) का कन्या में प्रवेश
30 अगस्तरात 9:43
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अगस्तरात 9:26
शुक्र का कर्क में प्रवेश
सितंबर 2004
2 सितंबरसुबह 6:09
बुध सिंह 1°49′ पर मार्गी
5 सितंबरदोपहर 3:42
शनि का कर्क में प्रवेश
7 सितंबरसुबह 5:05
गुरु (बृहस्पति) अस्त (6 अक्टूबर तक)†
16 सितंबरसुबह 4:08
सूर्य का कन्या में प्रवेश
16 सितंबरदोपहर 3:40
मंगल का कन्या में प्रवेश
18 सितंबरसुबह 9:26
बुध अस्त (27 अक्टूबर तक)†
24 सितंबररात 11:34
बुध का कन्या में प्रवेश
28 सितंबररात 3:41
शुक्र का सिंह में प्रवेश
अक्टूबर 2004
6 अक्टूबररात 1:13
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
11 अक्टूबररात 11:11
बुध का तुला में प्रवेश
16 अक्टूबरशाम 4:02
सूर्य का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरशाम 4:25
शुक्र का कन्या में प्रवेश
27 अक्टूबररात 9:52
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 अक्टूबररात 2:23
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
नवंबर 2004
1 नवंबरशाम 4:53
मंगल का तुला में प्रवेश
4 नवंबरदोपहर 1:43
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
7 नवंबररात 10:25
शनि कर्क 3°25′ पर वक्री
15 नवंबरदोपहर 2:47
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 7:09
शुक्र का तुला में प्रवेश
23 नवंबरशाम 7:01
बुध का धनु में प्रवेश
30 नवंबरसुबह 4:16
बुध धनु 2°49′ पर वक्री
दिसंबर 2004
4 दिसंबरदोपहर 12:44
बुध अस्त (15 दिसंबर तक)†
5 दिसंबरशाम 6:52
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
11 दिसंबरदोपहर 12:11
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
15 दिसंबरसुबह 5:24
सूर्य का धनु में प्रवेश
15 दिसंबरसुबह 11:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 दिसंबरसुबह 10:35
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
19 दिसंबररात 10:29
बुध वृश्चिक 16°32′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
