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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2005: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2005 में शनि 13 जनवरी को मिथुन में, राहु 25 मार्च को मीन में, शनि 26 मई को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 28 सितंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।

1 जनवरी 2005 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2005 का गोचर कैलेंडर

सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2005

  • 4 जनवरीरात 8:28

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 5 जनवरीदोपहर 2:11

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 13 जनवरीसुबह 10:13

    शनि का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 जनवरीरात 12:08

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 23 जनवरीशाम 6:46

    बुध अस्त (3 मार्च तक)†

  • 26 जनवरीसुबह 9:30

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 28 जनवरीशाम 7:17

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 29 जनवरीरात 3:28

    मंगल का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 2005

  • 2 फ़रवरीरात 2:08

    गुरु (बृहस्पति) कन्या 24°56′ पर वक्री

  • 12 फ़रवरीदोपहर 1:09

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीसुबह 9:03

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 18 फ़रवरीरात 9:46

    शुक्र अस्त (8 मई तक)†

  • 21 फ़रवरीशाम 6:27

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

मार्च 2005

  • 1 मार्चदोपहर 2:10

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 3 मार्चरात 1:46

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 मार्चसुबह 7:43

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 14 मार्चसुबह 10:04

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 17 मार्चशाम 7:18

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 20 मार्चरात 12:13

    बुध मीन 20°10′ पर वक्री

  • 22 मार्चरात 3:23

    शनि मिथुन 26°28′ पर मार्गी

  • 22 मार्चसुबह 7:02

    बुध अस्त (5 अप्रैल तक)†

  • 25 मार्चरात 1:27

    राहु का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 25 मार्चरात 1:27

    केतु का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

अप्रैल 2005

  • 5 अप्रैलदोपहर 1:14

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 अप्रैलरात 11:54

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 12 अप्रैलसुबह 8:46

    बुध मीन 7°49′ पर मार्गी

  • 13 अप्रैलशाम 7:35

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 22 अप्रैलशाम 7:08

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

मई 2005

  • 5 मईसुबह 6:50

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 8 मईसुबह 10:46

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 8 मईशाम 5:52

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 मईशाम 4:29

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 22 मईरात 2:57

    बुध अस्त (15 जून तक)†

  • 25 मईदोपहर 1:41

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 26 मईरात 2:22

    शनि का कर्क में प्रवेश

  • 29 मईशाम 5:12

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जून 2005

  • 3 जूनसुबह 11:51

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 5 जूनसुबह 8:38

    गुरु (बृहस्पति) कन्या 15°00′ पर मार्गी

  • 8 जूनसुबह 11:18

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 14 जूनरात 11:06

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 15 जूनदोपहर 1:09

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 जूनसुबह 7:02

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 24 जूनसुबह 5:42

    बुध का कर्क में प्रवेश

जुलाई 2005

  • 5 जुलाईदोपहर 1:57

    शनि अस्त (10 अगस्त तक)†

  • 16 जुलाईसुबह 9:59

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 18 जुलाईरात 1:07

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 18 जुलाईसुबह 4:36

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 23 जुलाईरात 3:59

    बुध कर्क 26°32′ पर वक्री

  • 29 जुलाईशाम 6:34

    बुध अस्त (13 अगस्त तक)†

अगस्त 2005

  • 10 अगस्तरात 8:24

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 अगस्तरात 1:34

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 13 अगस्तशाम 7:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 अगस्तसुबह 4:51

    बुध कर्क 14°49′ पर मार्गी

  • 16 अगस्तशाम 6:23

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2005

  • 1 सितंबरसुबह 8:55

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 2 सितंबरशाम 5:51

    बुध अस्त (7 अक्टूबर तक)†

  • 6 सितंबरदोपहर 12:03

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 16 सितंबरशाम 6:17

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरसुबह 10:02

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 28 सितंबररात 12:45

    गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2005

  • 1 अक्टूबररात 10:59

    मंगल मेष 29°26′ पर वक्री

  • 2 अक्टूबरदोपहर 3:44

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 4 अक्टूबररात 9:06

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 7 अक्टूबररात 9:37

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 8 अक्टूबरसुबह 8:55

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (5 नवंबर तक)†

  • 17 अक्टूबरसुबह 6:12

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 25 अक्टूबरदोपहर 12:35

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 30 अक्टूबरसुबह 8:00

    शुक्र का धनु में प्रवेश

नवंबर 2005

  • 5 नवंबरदोपहर 2:29

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 नवंबरसुबह 5:42

    बुध वृश्चिक 17°00′ पर वक्री

  • 16 नवंबरसुबह 4:57

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 19 नवंबरसुबह 4:12

    बुध अस्त (30 नवंबर तक)†

  • 22 नवंबरसुबह 8:31

    शनि कर्क 17°23′ पर वक्री

  • 30 नवंबरसुबह 5:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

दिसंबर 2005

  • 3 दिसंबरसुबह 11:54

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 4 दिसंबररात 2:23

    बुध वृश्चिक 0°48′ पर मार्गी

  • 10 दिसंबरसुबह 4:07

    मंगल मेष 14°18′ पर मार्गी

  • 15 दिसंबरशाम 7:34

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 24 दिसंबरसुबह 9:35

    शुक्र मकर 7°32′ पर वक्री

  • 30 दिसंबररात 8:13

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और