मुख्य सामग्री पर जाएँ
School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2008: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2008 में राहु 30 अप्रैल को मकर में, गुरु (बृहस्पति) 10 दिसंबर को मकर में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय ऑकलैंड के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।

1 जनवरी 2008 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2008 का गोचर कैलेंडर

सभी समय ऑकलैंड के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2008

  • 5 जनवरीरात 12:50

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 6 जनवरीशाम 5:00

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 जनवरीरात 8:49

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 जनवरीसुबह 7:28

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 19 जनवरीरात 11:01

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 29 जनवरीसुबह 9:30

    बुध मकर 29°55′ पर वक्री

  • 31 जनवरीसुबह 11:37

    मंगल मिथुन 0°07′ पर मार्गी

फ़रवरी 2008

  • 1 फ़रवरीसुबह 4:43

    बुध अस्त (13 फ़रवरी तक)†

  • 13 फ़रवरीरात 12:09

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 13 फ़रवरीसुबह 8:04

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीरात 8:25

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 19 फ़रवरीदोपहर 3:57

    बुध मकर 14°21′ पर मार्गी

मार्च 2008

  • 8 मार्चदोपहर 2:45

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 10 मार्चरात 9:56

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 मार्चशाम 5:17

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 30 मार्चरात 9:00

    बुध का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2008

  • 1 अप्रैलरात 9:22

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 2 अप्रैलसुबह 11:47

    बुध अस्त (29 अप्रैल तक)†

  • 14 अप्रैलरात 12:49

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 15 अप्रैलदोपहर 12:14

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 26 अप्रैलसुबह 4:03

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 28 अप्रैलरात 8:58

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 29 अप्रैलदोपहर 1:08

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 अप्रैलरात 12:05

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 30 अप्रैलशाम 7:21

    राहु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 30 अप्रैलशाम 7:21

    केतु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

मई 2008

  • 3 मईसुबह 6:26

    शुक्र अस्त (16 जुलाई तक)†

  • 3 मईदोपहर 3:37

    शनि सिंह 7°43′ पर मार्गी

  • 9 मईरात 11:53

    गुरु (बृहस्पति) धनु 28°24′ पर वक्री

  • 14 मईरात 9:44

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 20 मईदोपहर 1:07

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 27 मईरात 3:46

    बुध वृषभ 27°34′ पर वक्री

  • 30 मईदोपहर 3:15

    बुध अस्त (16 जून तक)†

जून 2008

  • 13 जूनरात 11:01

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 15 जूनसुबह 4:22

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 16 जूनशाम 4:28

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 जूनरात 2:31

    बुध वृषभ 19°01′ पर मार्गी

  • 21 जूनरात 11:10

    मंगल का सिंह में प्रवेश

जुलाई 2008

  • 7 जुलाईरात 1:23

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 8 जुलाईसुबह 8:57

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 16 जुलाईरात 1:35

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 जुलाईदोपहर 3:16

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 17 जुलाईशाम 4:32

    बुध अस्त (13 अगस्त तक)†

  • 24 जुलाईरात 3:16

    बुध का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2008

  • 1 अगस्तशाम 6:40

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 7 अगस्तशाम 5:45

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 10 अगस्तसुबह 9:06

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 13 अगस्तदोपहर 12:50

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 अगस्तरात 11:42

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तशाम 5:28

    शनि अस्त (22 सितंबर तक)†

  • 25 अगस्तसुबह 9:57

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 26 अगस्तसुबह 4:48

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2008

  • 8 सितंबरशाम 4:33

    गुरु (बृहस्पति) धनु 18°34′ पर मार्गी

  • 16 सितंबररात 11:41

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 19 सितंबरशाम 4:36

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 22 सितंबरसुबह 6:25

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 सितंबरशाम 7:16

    बुध कन्या 28°52′ पर वक्री

  • 25 सितंबरशाम 5:15

    मंगल का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2008

  • 1 अक्टूबरदोपहर 12:31

    बुध अस्त (13 अक्टूबर तक)†

  • 10 अक्टूबररात 3:39

    मंगल अस्त (9 फ़रवरी तक)†

  • 13 अक्टूबरशाम 5:29

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 अक्टूबरसुबह 8:21

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 अक्टूबरसुबह 9:06

    बुध कन्या 13°35′ पर मार्गी

  • 17 अक्टूबरदोपहर 12:40

    सूर्य का तुला में प्रवेश

नवंबर 2008

  • 1 नवंबरसुबह 10:11

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 2 नवंबररात 9:25

    बुध अस्त (21 दिसंबर तक)†

  • 8 नवंबररात 3:55

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 8 नवंबरसुबह 10:02

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबरदोपहर 12:28

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 20 नवंबररात 1:08

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

दिसंबर 2008

  • 3 दिसंबरसुबह 9:04

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 9 दिसंबररात 2:52

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 10 दिसंबरसुबह 6:22

    गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश

  • 16 दिसंबररात 3:04

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 19 दिसंबरशाम 6:48

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 21 दिसंबरशाम 5:27

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 दिसंबरदोपहर 1:15

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 29 दिसंबरदोपहर 1:45

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और