पंचांग · गोचर
गोचर 2009: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2009 में गुरु (बृहस्पति) 1 मई को कुम्भ में, गुरु (बृहस्पति) 30 जुलाई को मकर में, शनि 9 सितंबर को कन्या में, राहु 17 नवंबर को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 19 दिसंबर को कुम्भ में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में।
1 जनवरी 2009 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2008 से, 14 जनवरी 2009 तक
- चन्द्रकुम्भ में31 दिसंबर 2008 से, 2 जनवरी 2009 तक
- मंगलधनु में19 दिसंबर 2008 से, 27 जनवरी 2009 तक
- बुधमकर में28 दिसंबर 2008 से, 26 जनवरी 2009 तक
- गुरु (बृहस्पति)मकर में9 दिसंबर 2008 से, 1 मई 2009 तक
- शुक्रकुम्भ में29 दिसंबर 2008 से, 27 जनवरी 2009 तक
- शनिवक्रीसिंह में15 जुलाई 2007 से, 9 सितंबर 2009 तक
- राहुमकर में30 अप्रैल 2008 से, 17 नवंबर 2009 तक
- केतुकर्क में30 अप्रैल 2008 से, 17 नवंबर 2009 तक
2009 का गोचर कैलेंडर
सभी समय लेस्टर के स्थानीय समय (Europe/London, GMT/BST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2009
10 जनवरीसुबह 4:19
गुरु (बृहस्पति) अस्त (7 फ़रवरी तक)†
11 जनवरीशाम 4:43
बुध मकर 13°47′ पर वक्री
14 जनवरीरात 12:45
सूर्य का मकर में प्रवेश
14 जनवरीरात 8:01
बुध अस्त (26 जनवरी तक)†
26 जनवरीसुबह 4:40
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 जनवरीदोपहर 3:32
बुध का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
27 जनवरीसुबह 6:19
शुक्र का मीन में प्रवेश
27 जनवरीरात 8:41
मंगल का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2009
1 फ़रवरीसुबह 7:10
बुध धनु 27°46′ पर मार्गी
7 फ़रवरीसुबह 8:31
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
7 फ़रवरीशाम 4:14
बुध का मकर में प्रवेश
8 फ़रवरीरात 10:58
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
12 फ़रवरीदोपहर 1:42
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2009
4 मार्चरात 10:03
बुध का कुम्भ में प्रवेश
6 मार्चशाम 5:15
शुक्र मीन 21°29′ पर वक्री
7 मार्चसुबह 10:47
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
14 मार्चसुबह 10:34
सूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्चसुबह 9:24
बुध अस्त (13 अप्रैल तक)†
22 मार्चशाम 4:01
बुध का मीन में प्रवेश
22 मार्चशाम 7:44
शुक्र अस्त (1 अप्रैल तक)†
अप्रैल 2009
1 अप्रैलरात 8:29
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
6 अप्रैलशाम 4:47
बुध का मेष में प्रवेश
13 अप्रैलदोपहर 2:20
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 अप्रैलरात 8:05
सूर्य का मेष में प्रवेश
14 अप्रैलरात 8:47
मंगल का मीन में प्रवेश
17 अप्रैलरात 8:25
शुक्र मीन 5°13′ पर मार्गी
24 अप्रैलरात 1:06
बुध का वृषभ में प्रवेश
मई 2009
1 मईदोपहर 12:41
गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश
7 मईसुबह 5:59
बुध वृषभ 7°46′ पर वक्री
9 मईरात 11:50
बुध अस्त (26 मई तक)†
14 मईशाम 4:58
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मईरात 3:38
शनि सिंह 20°56′ पर मार्गी
23 मईरात 10:16
मंगल का मेष में प्रवेश
25 मईसुबह 11:03
बुध का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
26 मईशाम 5:25
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
31 मईरात 12:20
शुक्र का मेष में प्रवेश
31 मईरात 2:22
बुध मेष 28°53′ पर मार्गी
जून 2009
5 जूनदोपहर 1:46
बुध का वृषभ में प्रवेश
14 जूनरात 11:34
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
15 जूनसुबह 8:32
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 3°02′ पर वक्री
29 जूनशाम 7:57
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
30 जूनशाम 6:03
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2009
1 जुलाईरात 8:37
बुध अस्त (27 जुलाई तक)†
3 जुलाईशाम 4:26
मंगल का वृषभ में प्रवेश
15 जुलाईरात 3:49
बुध का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईसुबह 10:25
सूर्य का कर्क में प्रवेश
26 जुलाईरात 8:28
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
27 जुलाईसुबह 9:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 जुलाईसुबह 11:15
बुध का सिंह में प्रवेश
30 जुलाईशाम 4:59
गुरु (बृहस्पति) का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
अगस्त 2009
16 अगस्तसुबह 10:38
मंगल का मिथुन में प्रवेश
16 अगस्तशाम 6:46
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तरात 12:43
बुध का कन्या में प्रवेश
21 अगस्तदोपहर 3:35
शुक्र का कर्क में प्रवेश
31 अगस्तरात 2:34
शनि अस्त (5 अक्टूबर तक)†
सितंबर 2009
7 सितंबरसुबह 5:44
बुध कन्या 12°14′ पर वक्री
9 सितंबरशाम 5:54
शनि का कन्या में प्रवेश
14 सितंबरसुबह 6:57
बुध अस्त (27 सितंबर तक)†
15 सितंबरदोपहर 3:59
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 सितंबरशाम 6:41
सूर्य का कन्या में प्रवेश
24 सितंबररात 3:57
बुध का सिंह में प्रवेश (वक्री गति से)
27 सितंबररात 3:16
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 सितंबरदोपहर 2:13
बुध सिंह 27°37′ पर मार्गी
अक्टूबर 2009
4 अक्टूबररात 11:05
बुध का कन्या में प्रवेश
5 अक्टूबरसुबह 4:29
मंगल का कर्क में प्रवेश
5 अक्टूबरसुबह 7:32
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
10 अक्टूबररात 3:17
शुक्र का कन्या में प्रवेश
13 अक्टूबरसुबह 5:50
गुरु (बृहस्पति) मकर 23°11′ पर मार्गी
15 अक्टूबरशाम 4:00
बुध अस्त (30 नवंबर तक)†
17 अक्टूबरसुबह 6:38
सूर्य का तुला में प्रवेश
24 अक्टूबररात 9:40
बुध का तुला में प्रवेश
नवंबर 2009
3 नवंबरसुबह 5:05
शुक्र का तुला में प्रवेश
12 नवंबरसुबह 4:31
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 5:29
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नवंबरसुबह 10:19
राहु का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)
17 नवंबरसुबह 10:19
केतु का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)
27 नवंबररात 3:18
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
30 नवंबररात 9:55
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
दिसंबर 2009
1 दिसंबरसुबह 7:31
शुक्र अस्त (22 फ़रवरी तक)†
1 दिसंबरशाम 4:25
बुध का धनु में प्रवेश
15 दिसंबररात 8:10
सूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिसंबरशाम 5:39
गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश
20 दिसंबरदोपहर 1:22
मंगल कर्क 25°42′ पर वक्री
20 दिसंबररात 11:43
शुक्र का धनु में प्रवेश
26 दिसंबरदोपहर 2:37
बुध धनु 27°48′ पर वक्री
30 दिसंबररात 3:49
बुध अस्त (10 जनवरी तक)†
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
