पंचांग · गोचर
गोचर 2010: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2010 में गुरु (बृहस्पति) 1 मई को मीन में, गुरु (बृहस्पति) 1 नवंबर को कुम्भ में, गुरु (बृहस्पति) 5 दिसंबर को मीन में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय शिकागो के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।
1 जनवरी 2010 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2009 से, 14 जनवरी 2010 तक
- चन्द्रमिथुन में30 दिसंबर 2009 से, 1 जनवरी 2010 तक
- मंगलवक्रीकर्क में4 अक्टूबर 2009 से, 26 मई 2010 तक
- बुधवक्रीधनु में1 दिसंबर 2009 से, 5 फ़रवरी 2010 तक
- गुरु (बृहस्पति)कुम्भ में19 दिसंबर 2009 से, 1 मई 2010 तक
- शुक्रधनु में20 दिसंबर 2009 से, 13 जनवरी 2010 तक
- शनिकन्या में9 सितंबर 2009 से, 14 नवंबर 2011 तक
- राहुधनु में17 नवंबर 2009 से, 6 जून 2011 तक
- केतुमिथुन में17 नवंबर 2009 से, 6 जून 2011 तक
2010 का गोचर कैलेंडर
सभी समय शिकागो के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2010
9 जनवरीरात 11:45
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 जनवरीसुबह 9:26
शनि कन्या 10°40′ पर वक्री
13 जनवरीदोपहर 1:56
शुक्र का मकर में प्रवेश
14 जनवरीरात 12:55
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीसुबह 10:52
बुध धनु 11°34′ पर मार्गी
फ़रवरी 2010
5 फ़रवरीशाम 5:35
बुध का मकर में प्रवेश
6 फ़रवरीसुबह 11:10
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
12 फ़रवरीदोपहर 1:55
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीरात 8:22
गुरु (बृहस्पति) अस्त (14 मार्च तक)†
22 फ़रवरीसुबह 5:43
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
24 फ़रवरीदोपहर 3:40
बुध अस्त (28 मार्च तक)†
25 फ़रवरीशाम 6:09
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2010
2 मार्चसुबह 10:51
शुक्र का मीन में प्रवेश
10 मार्चसुबह 11:13
मंगल कर्क 6°18′ पर मार्गी
14 मार्चसुबह 10:04
बुध का मीन में प्रवेश
14 मार्चसुबह 11:47
सूर्य का मीन में प्रवेश
14 मार्चशाम 5:15
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
26 मार्चदोपहर 3:48
शुक्र का मेष में प्रवेश
28 मार्चशाम 5:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
29 मार्चशाम 6:01
बुध का मेष में प्रवेश
अप्रैल 2010
13 अप्रैलरात 8:15
सूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैलरात 11:05
बुध मेष 18°38′ पर वक्री
20 अप्रैलरात 1:55
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
20 अप्रैलसुबह 8:15
बुध अस्त (6 मई तक)†
मई 2010
1 मईरात 8:37
गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश
6 मईसुबह 5:35
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 मईशाम 5:27
बुध मेष 8°40′ पर मार्गी
14 मईशाम 5:04
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
14 मईरात 8:04
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
26 मईसुबह 5:02
मंगल का सिंह में प्रवेश
30 मईदोपहर 1:41
शनि कन्या 3°50′ पर मार्गी
जून 2010
6 जूनसुबह 6:25
बुध का वृषभ में प्रवेश
9 जूनरात 1:05
शुक्र का कर्क में प्रवेश
14 जूनरात 11:37
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जूनसुबह 4:10
बुध अस्त (10 जुलाई तक)†
22 जूनसुबह 10:54
बुध का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2010
4 जुलाईरात 11:03
शुक्र का सिंह में प्रवेश
6 जुलाईसुबह 10:50
बुध का कर्क में प्रवेश
10 जुलाईरात 9:31
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 जुलाईसुबह 10:27
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईशाम 7:44
मंगल का कन्या में प्रवेश
23 जुलाईसुबह 6:45
गुरु (बृहस्पति) मीन 9°24′ पर वक्री
23 जुलाईसुबह 11:27
बुध का सिंह में प्रवेश
अगस्त 2010
1 अगस्तसुबह 5:05
शुक्र का कन्या में प्रवेश
16 अगस्तशाम 6:50
सूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अगस्तदोपहर 2:57
बुध सिंह 25°04′ पर वक्री
27 अगस्तशाम 6:50
बुध अस्त (10 सितंबर तक)†
सितंबर 2010
1 सितंबररात 1:15
शुक्र का तुला में प्रवेश
5 सितंबरशाम 4:15
मंगल का तुला में प्रवेश
10 सितंबरसुबह 9:30
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
12 सितंबरशाम 6:09
बुध सिंह 11°22′ पर मार्गी
13 सितंबरसुबह 6:52
शनि अस्त (18 अक्टूबर तक)†
16 सितंबरशाम 6:46
सूर्य का कन्या में प्रवेश
28 सितंबरदोपहर 1:31
बुध अस्त (9 नवंबर तक)†
30 सितंबररात 12:17
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2010
8 अक्टूबररात 2:03
शुक्र तुला 19°14′ पर वक्री
17 अक्टूबररात 2:19
बुध का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 6:44
सूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टूबररात 3:38
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
19 अक्टूबरदोपहर 3:34
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
23 अक्टूबरशाम 7:22
शुक्र अस्त (2 नवंबर तक)†
नवंबर 2010
1 नवंबरसुबह 5:50
गुरु (बृहस्पति) का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
2 नवंबररात 8:35
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
4 नवंबरशाम 7:37
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
9 नवंबरशाम 4:24
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबरसुबह 5:35
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नवंबरसुबह 11:09
गुरु (बृहस्पति) कुम्भ 29°29′ पर मार्गी
18 नवंबरदोपहर 3:18
शुक्र तुला 3°39′ पर मार्गी
25 नवंबरशाम 4:20
बुध का धनु में प्रवेश
27 नवंबरसुबह 4:48
मंगल अस्त (25 अप्रैल तक)†
29 नवंबरशाम 6:39
मंगल का धनु में प्रवेश
दिसंबर 2010
5 दिसंबरशाम 6:09
गुरु (बृहस्पति) का मीन में प्रवेश
10 दिसंबरसुबह 6:04
बुध धनु 11°56′ पर वक्री
14 दिसंबरसुबह 6:56
बुध अस्त (25 दिसंबर तक)†
15 दिसंबररात 8:16
सूर्य का धनु में प्रवेश
22 दिसंबररात 8:44
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
25 दिसंबरसुबह 5:58
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
30 दिसंबररात 1:20
बुध वृश्चिक 25°37′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
