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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2011: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2011 में गुरु (बृहस्पति) 8 मई को मेष में, राहु 6 जून को वृश्चिक में, शनि 15 नवंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय सिंगापुर के स्थानीय समय (Asia/Singapore, UTC+8) में।

1 जनवरी 2011 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2011 का गोचर कैलेंडर

सभी समय सिंगापुर के स्थानीय समय (Asia/Singapore, UTC+8) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2011

  • 1 जनवरीशाम 7:01

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 8 जनवरीरात 2:48

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 8 जनवरीदोपहर 2:16

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 14 जनवरीरात 9:01

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 26 जनवरीदोपहर 1:38

    शनि कन्या 23°13′ पर वक्री

  • 30 जनवरीसुबह 6:18

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 31 जनवरीसुबह 8:15

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2011

  • 5 फ़रवरीदोपहर 2:38

    बुध अस्त (13 मार्च तक)†

  • 13 फ़रवरीसुबह 9:59

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 फ़रवरीशाम 7:01

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 18 फ़रवरीशाम 7:56

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 25 फ़रवरीसुबह 8:31

    शुक्र का मकर में प्रवेश

मार्च 2011

  • 6 मार्चरात 10:41

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 13 मार्चसुबह 9:09

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 मार्चसुबह 6:50

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 22 मार्चदोपहर 2:59

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 23 मार्चसुबह 5:19

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (21 अप्रैल तक)†

  • 25 मार्चरात 8:52

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 28 मार्चरात 8:04

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 31 मार्चसुबह 4:47

    बुध मेष 0°21′ पर वक्री

अप्रैल 2011

  • 2 अप्रैलसुबह 11:25

    बुध अस्त (17 अप्रैल तक)†

  • 2 अप्रैलदोपहर 3:00

    बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 14 अप्रैलदोपहर 3:17

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 16 अप्रैलदोपहर 1:10

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 17 अप्रैलसुबह 7:19

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 अप्रैलशाम 7:56

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 अप्रैलशाम 6:04

    बुध मीन 18°53′ पर मार्गी

  • 26 अप्रैलरात 2:55

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

मई 2011

  • 3 मईशाम 5:02

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 8 मईदोपहर 3:51

    गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश

  • 11 मईसुबह 7:44

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 11 मईसुबह 11:05

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 15 मईदोपहर 12:07

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 31 मईरात 2:30

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 2011

  • 1 जूनरात 3:30

    बुध अस्त (25 जून तक)†

  • 5 जूनरात 12:21

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 6 जूनरात 9:16

    राहु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 6 जूनरात 9:16

    केतु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 13 जूनरात 3:07

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 13 जूनदोपहर 12:23

    शनि कन्या 16°26′ पर मार्गी

  • 14 जूनसुबह 9:20

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 15 जूनशाम 6:43

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 25 जूनदोपहर 1:14

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 29 जूनरात 3:05

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 29 जूनदोपहर 2:49

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2011

  • 11 जुलाईसुबह 11:03

    शुक्र अस्त (22 सितंबर तक)†

  • 17 जुलाईसुबह 5:37

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 20 जुलाईदोपहर 1:59

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 24 जुलाईरात 2:13

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 25 जुलाईरात 8:36

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

अगस्त 2011

  • 3 अगस्तसुबह 11:49

    बुध सिंह 7°11′ पर वक्री

  • 10 अगस्तसुबह 9:51

    बुध अस्त (24 अगस्त तक)†

  • 17 अगस्तरात 3:18

    बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 अगस्तसुबह 10:05

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तदोपहर 2:05

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 24 अगस्तरात 9:32

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 अगस्तसुबह 6:03

    बुध कर्क 24°41′ पर मार्गी

  • 30 अगस्तशाम 5:00

    गुरु (बृहस्पति) मेष 16°20′ पर वक्री

सितंबर 2011

  • 5 सितंबरसुबह 4:45

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 9 सितंबरशाम 5:55

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 10 सितंबरदोपहर 3:00

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 12 सितंबररात 8:43

    बुध अस्त (20 अक्टूबर तक)†

  • 17 सितंबरदोपहर 2:04

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 22 सितंबरशाम 4:21

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 सितंबररात 11:18

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 26 सितंबररात 8:30

    शनि अस्त (31 अक्टूबर तक)†

अक्टूबर 2011

  • 4 अक्टूबरशाम 6:21

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 10 अक्टूबररात 1:54

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबररात 2:04

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 20 अक्टूबरसुबह 10:56

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 28 अक्टूबररात 9:23

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 29 अक्टूबरशाम 5:40

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 31 अक्टूबररात 12:14

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 31 अक्टूबरसुबह 9:15

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

नवंबर 2011

  • 15 नवंबरसुबह 10:55

    शनि का तुला में प्रवेश

  • 17 नवंबररात 1:52

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 22 नवंबररात 12:56

    शुक्र का धनु में प्रवेश

  • 24 नवंबरदोपहर 3:19

    बुध वृश्चिक 26°06′ पर वक्री

  • 29 नवंबरसुबह 5:30

    बुध अस्त (10 दिसंबर तक)†

दिसंबर 2011

  • 10 दिसंबरसुबह 5:13

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 दिसंबरसुबह 9:43

    बुध वृश्चिक 9°50′ पर मार्गी

  • 16 दिसंबरसुबह 6:09

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 16 दिसंबरशाम 4:31

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 26 दिसंबरसुबह 6:23

    गुरु (बृहस्पति) मेष 6°20′ पर मार्गी

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और