पंचांग · गोचर
गोचर 2011: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2011 में गुरु (बृहस्पति) 8 मई को मेष में, राहु 6 जून को वृश्चिक में, शनि 14 नवंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय वैंकूवर के स्थानीय समय (America/Vancouver, PST/PDT) में।
1 जनवरी 2011 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2010 से, 14 जनवरी 2011 तक
- चन्द्रवृश्चिक में31 दिसंबर 2010 से, 2 जनवरी 2011 तक
- मंगलधनु में29 नवंबर 2010 से, 7 जनवरी 2011 तक
- बुधवृश्चिक में22 दिसंबर 2010 से, 7 जनवरी 2011 तक
- गुरु (बृहस्पति)मीन में5 दिसंबर 2010 से, 8 मई 2011 तक
- शुक्रतुला में31 अगस्त 2010 से, 1 जनवरी 2011 तक
- शनिकन्या में9 सितंबर 2009 से, 14 नवंबर 2011 तक
- राहुधनु में17 नवंबर 2009 से, 6 जून 2011 तक
- केतुमिथुन में17 नवंबर 2009 से, 6 जून 2011 तक
2011 का गोचर कैलेंडर
सभी समय वैंकूवर के स्थानीय समय (America/Vancouver, PST/PDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2011
1 जनवरीरात 3:01
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
7 जनवरीसुबह 10:48
बुध का धनु में प्रवेश
7 जनवरीरात 10:16
मंगल का मकर में प्रवेश
14 जनवरीसुबह 5:01
सूर्य का मकर में प्रवेश
25 जनवरीरात 9:38
शनि कन्या 23°13′ पर वक्री
29 जनवरीदोपहर 2:18
शुक्र का धनु में प्रवेश
30 जनवरीशाम 4:15
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2011
4 फ़रवरीरात 10:38
बुध अस्त (12 मार्च तक)†
12 फ़रवरीशाम 5:59
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
15 फ़रवरीरात 3:01
मंगल का कुम्भ में प्रवेश
18 फ़रवरीरात 3:56
बुध का कुम्भ में प्रवेश
24 फ़रवरीशाम 4:31
शुक्र का मकर में प्रवेश
मार्च 2011
6 मार्चसुबह 6:41
बुध का मीन में प्रवेश
12 मार्चशाम 5:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
14 मार्चदोपहर 3:50
सूर्य का मीन में प्रवेश
21 मार्चरात 11:59
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
22 मार्चदोपहर 2:19
गुरु (बृहस्पति) अस्त (21 अप्रैल तक)†
25 मार्चसुबह 5:52
मंगल का मीन में प्रवेश
28 मार्चसुबह 5:04
बुध का मेष में प्रवेश
30 मार्चदोपहर 1:47
बुध मेष 0°21′ पर वक्री
अप्रैल 2011
1 अप्रैलरात 8:25
बुध अस्त (16 अप्रैल तक)†
2 अप्रैलरात 12:00
बुध का मीन में प्रवेश (वक्री गति से)
14 अप्रैलरात 12:17
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलरात 10:10
शुक्र का मीन में प्रवेश
16 अप्रैलशाम 4:19
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 अप्रैलसुबह 4:56
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
23 अप्रैलरात 3:04
बुध मीन 18°53′ पर मार्गी
25 अप्रैलसुबह 11:55
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2011
3 मईरात 2:02
मंगल का मेष में प्रवेश
8 मईरात 12:51
गुरु (बृहस्पति) का मेष में प्रवेश
10 मईशाम 4:44
शुक्र का मेष में प्रवेश
10 मईरात 8:05
बुध का मेष में प्रवेश
14 मईरात 9:07
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
30 मईसुबह 11:30
बुध का वृषभ में प्रवेश
31 मईदोपहर 12:30
बुध अस्त (24 जून तक)†
जून 2011
4 जूनसुबह 9:21
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
6 जूनसुबह 6:16
राहु का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
6 जूनसुबह 6:16
केतु का वृषभ में प्रवेश (वक्री गति से)
12 जूनदोपहर 12:07
मंगल का वृषभ में प्रवेश
12 जूनरात 9:23
शनि कन्या 16°26′ पर मार्गी
13 जूनशाम 6:20
बुध का मिथुन में प्रवेश
15 जूनरात 3:43
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
24 जूनरात 10:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 जूनदोपहर 12:05
बुध का कर्क में प्रवेश
28 जूनरात 11:49
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
जुलाई 2011
10 जुलाईरात 8:03
शुक्र अस्त (22 सितंबर तक)†
16 जुलाईदोपहर 2:37
सूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुलाईरात 10:59
बुध का सिंह में प्रवेश
23 जुलाईसुबह 11:13
शुक्र का कर्क में प्रवेश
25 जुलाईसुबह 5:36
मंगल का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 2011
2 अगस्तरात 8:49
बुध सिंह 7°11′ पर वक्री
9 अगस्तशाम 6:51
बुध अस्त (24 अगस्त तक)†
16 अगस्तदोपहर 12:18
बुध का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
16 अगस्तशाम 7:05
शुक्र का सिंह में प्रवेश
16 अगस्तरात 11:05
सूर्य का सिंह में प्रवेश
24 अगस्तसुबह 6:32
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 अगस्तदोपहर 3:03
बुध कर्क 24°41′ पर मार्गी
30 अगस्तरात 2:00
गुरु (बृहस्पति) मेष 16°20′ पर वक्री
सितंबर 2011
4 सितंबरदोपहर 1:45
बुध का सिंह में प्रवेश
9 सितंबररात 2:55
मंगल का कर्क में प्रवेश
10 सितंबररात 12:00
शुक्र का कन्या में प्रवेश
12 सितंबरसुबह 5:43
बुध अस्त (19 अक्टूबर तक)†
16 सितंबररात 11:04
सूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सितंबररात 1:21
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
22 सितंबरसुबह 8:18
बुध का कन्या में प्रवेश
26 सितंबरसुबह 5:30
शनि अस्त (30 अक्टूबर तक)†
अक्टूबर 2011
4 अक्टूबररात 3:21
शुक्र का तुला में प्रवेश
9 अक्टूबरसुबह 10:54
बुध का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरसुबह 11:04
सूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टूबरशाम 7:56
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
28 अक्टूबरसुबह 6:23
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
29 अक्टूबररात 2:40
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
30 अक्टूबरसुबह 9:14
मंगल का सिंह में प्रवेश
30 अक्टूबरशाम 6:15
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
नवंबर 2011
14 नवंबरशाम 6:55
शनि का तुला में प्रवेश
16 नवंबरसुबह 9:52
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नवंबरसुबह 8:56
शुक्र का धनु में प्रवेश
23 नवंबररात 11:19
बुध वृश्चिक 26°06′ पर वक्री
28 नवंबरदोपहर 1:30
बुध अस्त (9 दिसंबर तक)†
दिसंबर 2011
9 दिसंबरदोपहर 1:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
13 दिसंबरशाम 5:43
बुध वृश्चिक 9°50′ पर मार्गी
15 दिसंबरदोपहर 2:09
शुक्र का मकर में प्रवेश
16 दिसंबररात 12:31
सूर्य का धनु में प्रवेश
25 दिसंबरदोपहर 2:23
गुरु (बृहस्पति) मेष 6°20′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
