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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2012: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2012 में शनि 16 मई को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 17 मई को वृषभ में, शनि 4 अगस्त को तुला में, राहु 23 दिसंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2012 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2012 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2012

  • 4 जनवरीसुबह 7:03

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 9 जनवरीदोपहर 1:28

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 जनवरीरात 12:45

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 15 जनवरीशाम 6:10

    बुध अस्त (25 फ़रवरी तक)†

  • 24 जनवरीसुबह 6:19

    मंगल सिंह 29°04′ पर वक्री

  • 24 जनवरीसुबह 6:47

    बुध का मकर में प्रवेश

फ़रवरी 2012

  • 3 फ़रवरीसुबह 10:18

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 7 फ़रवरीशाम 7:01

    शनि तुला 5°29′ पर वक्री

  • 11 फ़रवरीरात 12:03

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीदोपहर 1:45

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 25 फ़रवरीरात 12:43

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 फ़रवरीदोपहर 3:56

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 29 फ़रवरीसुबह 7:11

    शुक्र का मेष में प्रवेश

मार्च 2012

  • 12 मार्चदोपहर 1:18

    बुध मीन 12°48′ पर वक्री

  • 14 मार्चसुबह 10:38

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 14 मार्चरात 8:46

    बुध अस्त (28 मार्च तक)†

  • 28 मार्चदोपहर 2:08

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 28 मार्चदोपहर 3:39

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अप्रैल 2012

  • 2 अप्रैलशाम 4:59

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 4 अप्रैलदोपहर 3:41

    बुध कुम्भ 29°49′ पर मार्गी

  • 6 अप्रैलदोपहर 3:10

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 13 अप्रैलशाम 7:07

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 9:27

    मंगल सिंह 9°40′ पर मार्गी

  • 28 अप्रैलशाम 6:00

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (28 मई तक)†

मई 2012

  • 5 मईरात 8:59

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 14 मईदोपहर 3:58

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 6:09

    बुध अस्त (8 जून तक)†

  • 15 मईरात 8:01

    शुक्र वृषभ 29°58′ पर वक्री

  • 16 मईसुबह 9:50

    शनि का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 मईसुबह 8:45

    गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश

  • 21 मईरात 9:46

    बुध का वृषभ में प्रवेश

  • 28 मईरात 10:26

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

जून 2012

  • 1 जूनसुबह 4:20

    शुक्र अस्त (11 जून तक)†

  • 4 जूनशाम 6:24

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 8 जूनशाम 6:59

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 जूनसुबह 9:07

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 14 जूनरात 10:32

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 21 जूनशाम 6:28

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 21 जूनरात 11:41

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 25 जूनदोपहर 2:03

    शनि कन्या 28°44′ पर मार्गी

  • 27 जूनरात 8:38

    शुक्र वृषभ 13°28′ पर मार्गी

जुलाई 2012

  • 15 जुलाईसुबह 7:45

    बुध कर्क 18°31′ पर वक्री

  • 16 जुलाईसुबह 9:23

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 21 जुलाईदोपहर 2:12

    बुध अस्त (6 अगस्त तक)†

  • 31 जुलाईशाम 7:34

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

अगस्त 2012

  • 4 अगस्तसुबह 5:25

    शनि का तुला में प्रवेश

  • 6 अगस्तरात 12:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 8 अगस्तसुबह 11:10

    बुध कर्क 7°24′ पर मार्गी

  • 14 अगस्तसुबह 9:31

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 16 अगस्तशाम 5:46

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 26 अगस्तरात 10:22

    बुध अस्त (29 सितंबर तक)†

  • 29 अगस्तसुबह 5:05

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2012

  • 1 सितंबरसुबह 6:02

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 13 सितंबररात 9:25

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 16 सितंबरशाम 5:42

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 28 सितंबरसुबह 8:32

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 28 सितंबररात 8:28

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 29 सितंबरसुबह 10:44

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

अक्टूबर 2012

  • 1 अक्टूबरशाम 5:32

    बुध का तुला में प्रवेश

  • 4 अक्टूबरशाम 6:31

    गुरु (बृहस्पति) वृषभ 22°21′ पर वक्री

  • 8 अक्टूबरसुबह 9:17

    शनि अस्त (11 नवंबर तक)†

  • 17 अक्टूबरसुबह 5:39

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 23 अक्टूबरदोपहर 2:40

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 23 अक्टूबरशाम 7:44

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

नवंबर 2012

  • 7 नवंबरसुबह 4:33

    बुध वृश्चिक 10°16′ पर वक्री

  • 9 नवंबरसुबह 9:25

    मंगल का धनु में प्रवेश

  • 11 नवंबरदोपहर 2:36

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 12 नवंबरसुबह 9:16

    बुध अस्त (23 नवंबर तक)†

  • 16 नवंबरसुबह 5:25

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 नवंबरसुबह 10:44

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 19 नवंबररात 3:21

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 23 नवंबरदोपहर 1:04

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 नवंबरसुबह 4:17

    बुध तुला 24°08′ पर मार्गी

दिसंबर 2012

  • 6 दिसंबरसुबह 9:00

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 11 दिसंबरदोपहर 3:22

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 15 दिसंबररात 8:03

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 18 दिसंबरदोपहर 3:03

    मंगल का मकर में प्रवेश

  • 23 दिसंबररात 9:44

    राहु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 23 दिसंबररात 9:44

    केतु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 24 दिसंबरसुबह 10:56

    बुध अस्त (7 फ़रवरी तक)†

  • 27 दिसंबररात 9:58

    बुध का धनु में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और