पंचांग · गोचर
गोचर 2012: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2012 में शनि 15 मई को कन्या में, गुरु (बृहस्पति) 16 मई को वृषभ में, शनि 3 अगस्त को तुला में, राहु 23 दिसंबर को तुला में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में।
1 जनवरी 2012 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2011 से, 14 जनवरी 2012 तक
- चन्द्रमीन में30 दिसंबर 2011 से, 2 जनवरी 2012 तक
- मंगलसिंह में30 अक्टूबर 2011 से, 21 जून 2012 तक
- बुधवृश्चिक में29 अक्टूबर 2011 से, 3 जनवरी 2012 तक
- गुरु (बृहस्पति)मेष में8 मई 2011 से, 16 मई 2012 तक
- शुक्रमकर में15 दिसंबर 2011 से, 9 जनवरी 2012 तक
- शनितुला में14 नवंबर 2011 से, 15 मई 2012 तक
- राहुवृश्चिक में6 जून 2011 से, 23 दिसंबर 2012 तक
- केतुवृषभ में6 जून 2011 से, 23 दिसंबर 2012 तक
2012 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ह्यूस्टन के स्थानीय समय (America/Chicago, CST/CDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2012
3 जनवरीशाम 7:33
बुध का धनु में प्रवेश
9 जनवरीरात 1:58
शुक्र का कुम्भ में प्रवेश
14 जनवरीदोपहर 1:15
सूर्य का मकर में प्रवेश
15 जनवरीसुबह 6:40
बुध अस्त (24 फ़रवरी तक)†
23 जनवरीशाम 6:49
मंगल सिंह 29°04′ पर वक्री
23 जनवरीशाम 7:17
बुध का मकर में प्रवेश
फ़रवरी 2012
2 फ़रवरीरात 10:48
शुक्र का मीन में प्रवेश
7 फ़रवरीसुबह 7:31
शनि तुला 5°29′ पर वक्री
10 फ़रवरीदोपहर 12:33
बुध का कुम्भ में प्रवेश
13 फ़रवरीरात 2:15
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
24 फ़रवरीदोपहर 1:13
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 फ़रवरीसुबह 4:26
बुध का मीन में प्रवेश
28 फ़रवरीशाम 7:41
शुक्र का मेष में प्रवेश
मार्च 2012
12 मार्चरात 2:48
बुध मीन 12°48′ पर वक्री
14 मार्चरात 12:08
सूर्य का मीन में प्रवेश
14 मार्चसुबह 10:16
बुध अस्त (28 मार्च तक)†
28 मार्चरात 3:38
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
28 मार्चसुबह 5:09
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2012
2 अप्रैलसुबह 6:29
बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)
4 अप्रैलसुबह 5:11
बुध कुम्भ 29°49′ पर मार्गी
6 अप्रैलसुबह 4:40
बुध का मीन में प्रवेश
13 अप्रैलसुबह 8:37
सूर्य का मेष में प्रवेश
13 अप्रैलरात 10:57
मंगल सिंह 9°40′ पर मार्गी
28 अप्रैलसुबह 7:30
गुरु (बृहस्पति) अस्त (28 मई तक)†
मई 2012
5 मईसुबह 10:29
बुध का मेष में प्रवेश
14 मईसुबह 5:28
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
14 मईशाम 7:39
बुध अस्त (8 जून तक)†
15 मईसुबह 9:31
शुक्र वृषभ 29°58′ पर वक्री
15 मईरात 11:20
शनि का कन्या में प्रवेश (वक्री गति से)
16 मईरात 10:15
गुरु (बृहस्पति) का वृषभ में प्रवेश
21 मईसुबह 11:16
बुध का वृषभ में प्रवेश
28 मईसुबह 11:56
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
31 मईशाम 5:50
शुक्र अस्त (10 जून तक)†
जून 2012
4 जूनसुबह 7:54
बुध का मिथुन में प्रवेश
8 जूनसुबह 8:29
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
10 जूनरात 10:37
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
14 जूनदोपहर 12:02
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
21 जूनसुबह 7:58
बुध का कर्क में प्रवेश
21 जूनदोपहर 1:11
मंगल का कन्या में प्रवेश
25 जूनरात 3:33
शनि कन्या 28°44′ पर मार्गी
27 जूनसुबह 10:08
शुक्र वृषभ 13°28′ पर मार्गी
जुलाई 2012
14 जुलाईरात 9:15
बुध कर्क 18°31′ पर वक्री
15 जुलाईरात 10:53
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईरात 3:42
बुध अस्त (5 अगस्त तक)†
31 जुलाईसुबह 9:04
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 2012
3 अगस्तशाम 6:55
शनि का तुला में प्रवेश
5 अगस्तदोपहर 2:05
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 अगस्तरात 12:40
बुध कर्क 7°24′ पर मार्गी
13 अगस्तरात 11:01
मंगल का तुला में प्रवेश
16 अगस्तसुबह 7:16
सूर्य का सिंह में प्रवेश
26 अगस्तसुबह 11:52
बुध अस्त (29 सितंबर तक)†
28 अगस्तशाम 6:35
बुध का सिंह में प्रवेश
31 अगस्तशाम 7:32
शुक्र का कर्क में प्रवेश
सितंबर 2012
13 सितंबरसुबह 10:55
बुध का कन्या में प्रवेश
16 सितंबरसुबह 7:12
सूर्य का कन्या में प्रवेश
27 सितंबररात 10:02
शुक्र का सिंह में प्रवेश
28 सितंबरसुबह 9:58
मंगल का वृश्चिक में प्रवेश
29 सितंबररात 12:14
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
अक्टूबर 2012
1 अक्टूबरसुबह 7:02
बुध का तुला में प्रवेश
4 अक्टूबरसुबह 8:01
गुरु (बृहस्पति) वृषभ 22°21′ पर वक्री
7 अक्टूबररात 10:47
शनि अस्त (11 नवंबर तक)†
16 अक्टूबरशाम 7:09
सूर्य का तुला में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 4:10
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
23 अक्टूबरसुबह 9:14
शुक्र का कन्या में प्रवेश
नवंबर 2012
6 नवंबरशाम 5:03
बुध वृश्चिक 10°16′ पर वक्री
8 नवंबररात 9:55
मंगल का धनु में प्रवेश
11 नवंबररात 3:06
शनि का उदय (अस्त समाप्त)†
11 नवंबररात 9:46
बुध अस्त (23 नवंबर तक)†
15 नवंबरशाम 5:55
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
16 नवंबररात 11:14
शुक्र का तुला में प्रवेश
18 नवंबरदोपहर 3:51
बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
23 नवंबररात 1:34
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
26 नवंबरशाम 4:47
बुध तुला 24°08′ पर मार्गी
दिसंबर 2012
5 दिसंबररात 9:30
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
11 दिसंबररात 3:52
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
15 दिसंबरसुबह 8:33
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबररात 3:33
मंगल का मकर में प्रवेश
23 दिसंबरसुबह 10:14
राहु का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)
23 दिसंबरसुबह 10:14
केतु का मेष में प्रवेश (वक्री गति से)
23 दिसंबररात 11:26
बुध अस्त (6 फ़रवरी तक)†
27 दिसंबरसुबह 10:28
बुध का धनु में प्रवेश
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
