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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2015: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2015 में गुरु (बृहस्पति) 13 जुलाई को सिंह में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

सभी समय मॉन्ट्रियल के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में।

1 जनवरी 2015 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2015 का गोचर कैलेंडर

सभी समय मॉन्ट्रियल के स्थानीय समय (America/Toronto, EST/EDT) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2015

  • 1 जनवरीरात 1:08

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 1 जनवरीशाम 7:24

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 4 जनवरीदोपहर 3:19

    मंगल का कुम्भ में प्रवेश

  • 14 जनवरीसुबह 8:50

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 21 जनवरीसुबह 10:53

    बुध मकर 23°01′ पर वक्री

  • 22 जनवरीदोपहर 3:42

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 24 जनवरीसुबह 9:13

    बुध अस्त (4 फ़रवरी तक)†

फ़रवरी 2015

  • 4 फ़रवरीरात 11:31

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 फ़रवरीसुबह 9:57

    बुध मकर 7°14′ पर मार्गी

  • 12 फ़रवरीरात 2:32

    मंगल का मीन में प्रवेश

  • 12 फ़रवरीरात 9:49

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 15 फ़रवरीशाम 7:34

    शुक्र का मीन में प्रवेश

मार्च 2015

  • 8 मार्चरात 8:55

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 12 मार्चसुबह 8:31

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 14 मार्चसुबह 10:29

    शनि वृश्चिक 10°52′ पर वक्री

  • 14 मार्चशाम 7:41

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 23 मार्चदोपहर 1:08

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 26 मार्चरात 2:30

    बुध अस्त (22 अप्रैल तक)†

  • 27 मार्चशाम 4:02

    बुध का मीन में प्रवेश

अप्रैल 2015

  • 6 अप्रैलसुबह 10:08

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 8 अप्रैलदोपहर 1:14

    गुरु (बृहस्पति) कर्क 18°31′ पर मार्गी

  • 10 अप्रैलरात 1:47

    मंगल अस्त (11 अगस्त तक)†

  • 11 अप्रैलरात 11:07

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 14 अप्रैलसुबह 4:10

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 22 अप्रैलरात 11:52

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 27 अप्रैलरात 2:25

    बुध का वृषभ में प्रवेश

मई 2015

  • 2 मईसुबह 10:57

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

  • 3 मईदोपहर 2:15

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 15 मईरात 1:01

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 18 मईरात 9:48

    बुध वृषभ 19°05′ पर वक्री

  • 22 मईरात 12:13

    बुध अस्त (7 जून तक)†

  • 30 मईसुबह 11:18

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

जून 2015

  • 7 जूनरात 11:59

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 जूनशाम 6:33

    बुध वृषभ 10°29′ पर मार्गी

  • 15 जूनसुबह 7:35

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 15 जूनदोपहर 3:30

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2015

  • 5 जुलाईरात 12:06

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 5 जुलाईरात 2:44

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 11 जुलाईसुबह 4:16

    बुध अस्त (6 अगस्त तक)†

  • 13 जुलाईरात 8:21

    गुरु (बृहस्पति) का सिंह में प्रवेश

  • 16 जुलाईशाम 6:25

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 20 जुलाईदोपहर 1:29

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 25 जुलाईसुबह 5:27

    शुक्र सिंह 6°42′ पर वक्री

  • 30 जुलाईशाम 4:39

    मंगल का कर्क में प्रवेश

अगस्त 2015

  • 2 अगस्तरात 2:27

    शनि वृश्चिक 4°13′ पर मार्गी

  • 4 अगस्तसुबह 8:39

    बुध का सिंह में प्रवेश

  • 6 अगस्तसुबह 9:17

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 10 अगस्तदोपहर 12:30

    शुक्र अस्त (20 अगस्त तक)†

  • 11 अगस्तशाम 4:50

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 11 अगस्तरात 11:51

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (10 सितंबर तक)†

  • 13 अगस्तसुबह 8:07

    शुक्र का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 17 अगस्तरात 2:48

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 20 अगस्तशाम 5:50

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 अगस्तरात 11:02

    बुध का कन्या में प्रवेश

सितंबर 2015

  • 6 सितंबरसुबह 4:30

    शुक्र कर्क 20°19′ पर मार्गी

  • 10 सितंबरसुबह 9:24

    गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 15 सितंबरसुबह 11:50

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 17 सितंबररात 2:43

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरदोपहर 2:08

    बुध कन्या 21°51′ पर वक्री

  • 24 सितंबरसुबह 10:39

    बुध अस्त (6 अक्टूबर तक)†

  • 30 सितंबरशाम 6:38

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

अक्टूबर 2015

  • 6 अक्टूबररात 9:45

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 9 अक्टूबरसुबह 10:57

    बुध कन्या 6°50′ पर मार्गी

  • 17 अक्टूबरदोपहर 2:40

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 26 अक्टूबरसुबह 5:05

    बुध अस्त (13 दिसंबर तक)†

  • 29 अक्टूबरदोपहर 1:10

    बुध का तुला में प्रवेश

नवंबर 2015

  • 2 नवंबररात 8:56

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 2 नवंबररात 9:29

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 12 नवंबररात 11:37

    शनि अस्त (16 दिसंबर तक)†

  • 16 नवंबरदोपहर 1:28

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 16 नवंबररात 8:57

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 29 नवंबररात 9:12

    शुक्र का तुला में प्रवेश

दिसंबर 2015

  • 6 दिसंबररात 1:28

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 13 दिसंबरसुबह 4:12

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 16 दिसंबरसुबह 4:07

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 16 दिसंबरदोपहर 12:12

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 दिसंबरशाम 7:18

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 25 दिसंबरसुबह 4:40

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 26 दिसंबरदोपहर 1:13

    बुध का मकर में प्रवेश

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और