पंचांग · गोचर
गोचर 2017: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2017 में शनि 26 जनवरी को धनु में, शनि 21 जून को वृश्चिक में, राहु 18 अगस्त को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 12 सितंबर को तुला में, शनि 26 अक्टूबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
1 जनवरी 2017 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में15 दिसंबर 2016 से, 14 जनवरी 2017 तक
- चन्द्रमकर में30 दिसंबर 2016 से, 2 जनवरी 2017 तक
- मंगलकुम्भ में11 दिसंबर 2016 से, 20 जनवरी 2017 तक
- बुधवक्रीधनु में28 नवंबर 2016 से, 3 फ़रवरी 2017 तक
- गुरु (बृहस्पति)कन्या में11 अगस्त 2016 से, 12 सितंबर 2017 तक
- शुक्रकुम्भ में29 दिसंबर 2016 से, 27 जनवरी 2017 तक
- शनिवृश्चिक में2 नवंबर 2014 से, 26 जनवरी 2017 तक
- राहुसिंह में30 जनवरी 2016 से, 18 अगस्त 2017 तक
- केतुकुम्भ में30 जनवरी 2016 से, 18 अगस्त 2017 तक
2017 का गोचर कैलेंडर
समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2017
3 जनवरीसुबह 10:42
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 जनवरीदोपहर 3:13
बुध धनु 4°46′ पर मार्गी
14 जनवरीसुबह 7:35
सूर्य का मकर में प्रवेश
20 जनवरीदोपहर 1:43
मंगल का मीन में प्रवेश
26 जनवरीशाम 6:56
शनि का धनु में प्रवेश
27 जनवरीरात 8:13
शुक्र का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2017
3 फ़रवरीदोपहर 1:16
बुध का मकर में प्रवेश
6 फ़रवरीदोपहर 12:04
गुरु (बृहस्पति) कन्या 29°03′ पर वक्री
12 फ़रवरीरात 8:35
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीदोपहर 2:55
बुध अस्त (22 मार्च तक)†
22 फ़रवरीशाम 6:44
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2017
2 मार्चरात 2:35
मंगल का मेष में प्रवेश
4 मार्चदोपहर 2:37
शुक्र मीन 19°03′ पर वक्री
11 मार्चरात 2:35
बुध का मीन में प्रवेश
14 मार्चशाम 5:30
सूर्य का मीन में प्रवेश
20 मार्चशाम 4:16
शुक्र अस्त (30 मार्च तक)†
22 मार्चरात 3:06
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 मार्चसुबह 7:33
बुध का मेष में प्रवेश
30 मार्चदोपहर 3:49
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2017
6 अप्रैलसुबह 10:02
शनि धनु 3°42′ पर वक्री
10 अप्रैलसुबह 4:43
बुध मेष 10°45′ पर वक्री
12 अप्रैलदोपहर 12:30
बुध अस्त (27 अप्रैल तक)†
13 अप्रैलसुबह 4:09
मंगल का वृषभ में प्रवेश
14 अप्रैलरात 2:02
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलदोपहर 3:49
शुक्र मीन 2°49′ पर मार्गी
27 अप्रैलरात 11:18
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2017
3 मईरात 10:03
बुध मेष 0°10′ पर मार्गी
14 मईरात 10:54
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
27 मईरात 1:30
मंगल का मिथुन में प्रवेश
31 मईसुबह 8:54
शुक्र का मेष में प्रवेश
31 मईशाम 4:43
मंगल अस्त (17 सितंबर तक)†
जून 2017
3 जूनशाम 7:52
बुध का वृषभ में प्रवेश
9 जूनशाम 4:52
बुध अस्त (4 जुलाई तक)†
9 जूनशाम 7:50
गुरु (बृहस्पति) कन्या 19°07′ पर मार्गी
15 जूनसुबह 5:30
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जूनरात 10:51
बुध का मिथुन में प्रवेश
21 जूनसुबह 5:04
शनि का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
29 जूनशाम 7:32
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2017
3 जुलाईरात 3:03
बुध का कर्क में प्रवेश
4 जुलाईसुबह 5:37
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 जुलाईदोपहर 2:56
मंगल का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईशाम 4:22
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईसुबह 10:18
बुध का सिंह में प्रवेश
26 जुलाईशाम 5:06
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 2017
13 अगस्तसुबह 6:29
बुध सिंह 17°32′ पर वक्री
17 अगस्तरात 12:45
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तसुबह 6:36
राहु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
18 अगस्तसुबह 6:36
केतु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
20 अगस्तसुबह 9:11
बुध अस्त (3 सितंबर तक)†
21 अगस्तसुबह 10:50
शुक्र का कर्क में प्रवेश
25 अगस्तशाम 6:12
शनि वृश्चिक 27°05′ पर मार्गी
27 अगस्तसुबह 8:26
मंगल का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2017
3 सितंबरसुबह 8:30
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
5 सितंबरशाम 4:59
बुध सिंह 4°19′ पर मार्गी
12 सितंबरसुबह 6:43
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश
15 सितंबरसुबह 10:30
शुक्र का सिंह में प्रवेश
17 सितंबररात 12:38
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरसुबह 10:09
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
21 सितंबरशाम 5:20
बुध अस्त (31 अक्टूबर तक)†
27 सितंबररात 12:28
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2017
9 अक्टूबररात 9:24
शुक्र का कन्या में प्रवेश
12 अक्टूबरशाम 7:39
गुरु (बृहस्पति) अस्त (10 नवंबर तक)†
13 अक्टूबरशाम 4:01
मंगल का कन्या में प्रवेश
13 अक्टूबररात 11:51
बुध का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबरदोपहर 12:34
सूर्य का तुला में प्रवेश
26 अक्टूबरदोपहर 3:18
शनि का धनु में प्रवेश
31 अक्टूबररात 10:16
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
नवंबर 2017
2 नवंबररात 12:43
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
3 नवंबररात 12:00
शुक्र का तुला में प्रवेश
10 नवंबररात 12:43
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबरदोपहर 12:21
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
24 नवंबरदोपहर 1:53
बुध का धनु में प्रवेश
26 नवंबररात 10:08
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
29 नवंबररात 12:30
शुक्र अस्त (20 फ़रवरी तक)†
30 नवंबरसुबह 5:20
मंगल का तुला में प्रवेश
दिसंबर 2017
3 दिसंबरदोपहर 1:03
बुध धनु 5°12′ पर वक्री
5 दिसंबरसुबह 10:31
शनि अस्त (7 जनवरी तक)†
7 दिसंबरशाम 7:33
बुध अस्त (18 दिसंबर तक)†
11 दिसंबरसुबह 4:18
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
16 दिसंबररात 2:59
सूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिसंबरशाम 6:27
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
20 दिसंबरशाम 6:31
शुक्र का धनु में प्रवेश
23 दिसंबरसुबह 7:21
बुध वृश्चिक 18°54′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
