पंचांग · गोचर
गोचर 2017: ग्रह कब राशि बदलते हैं
2017 में शनि 27 जनवरी को धनु में, शनि 21 जून को वृश्चिक में, राहु 18 अगस्त को कर्क में, गुरु (बृहस्पति) 12 सितंबर को तुला में, शनि 26 अक्टूबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।
सभी समय ऑकलैंड के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में।
1 जनवरी 2017 को ग्रह
निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।
- सूर्यधनु में16 दिसंबर 2016 से, 14 जनवरी 2017 तक
- चन्द्रमकर में31 दिसंबर 2016 से, 2 जनवरी 2017 तक
- मंगलकुम्भ में12 दिसंबर 2016 से, 20 जनवरी 2017 तक
- बुधवक्रीधनु में29 नवंबर 2016 से, 3 फ़रवरी 2017 तक
- गुरु (बृहस्पति)कन्या में12 अगस्त 2016 से, 12 सितंबर 2017 तक
- शुक्रकुम्भ में29 दिसंबर 2016 से, 28 जनवरी 2017 तक
- शनिवृश्चिक में3 नवंबर 2014 से, 27 जनवरी 2017 तक
- राहुसिंह में30 जनवरी 2016 से, 18 अगस्त 2017 तक
- केतुकुम्भ में30 जनवरी 2016 से, 18 अगस्त 2017 तक
2017 का गोचर कैलेंडर
सभी समय ऑकलैंड के स्थानीय समय (Pacific/Auckland, NZDT/NZST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।
राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय
जनवरी 2017
3 जनवरीशाम 6:12
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
8 जनवरीरात 10:43
बुध धनु 4°46′ पर मार्गी
14 जनवरीदोपहर 3:05
सूर्य का मकर में प्रवेश
20 जनवरीरात 9:13
मंगल का मीन में प्रवेश
27 जनवरीरात 2:26
शनि का धनु में प्रवेश
28 जनवरीरात 3:43
शुक्र का मीन में प्रवेश
फ़रवरी 2017
3 फ़रवरीरात 8:46
बुध का मकर में प्रवेश
6 फ़रवरीशाम 7:34
गुरु (बृहस्पति) कन्या 29°03′ पर वक्री
13 फ़रवरीसुबह 4:05
सूर्य का कुम्भ में प्रवेश
16 फ़रवरीरात 10:25
बुध अस्त (22 मार्च तक)†
23 फ़रवरीरात 2:14
बुध का कुम्भ में प्रवेश
मार्च 2017
2 मार्चसुबह 10:05
मंगल का मेष में प्रवेश
4 मार्चरात 10:07
शुक्र मीन 19°03′ पर वक्री
11 मार्चसुबह 10:05
बुध का मीन में प्रवेश
15 मार्चरात 1:00
सूर्य का मीन में प्रवेश
20 मार्चरात 11:46
शुक्र अस्त (30 मार्च तक)†
22 मार्चसुबह 10:36
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
27 मार्चदोपहर 3:03
बुध का मेष में प्रवेश
30 मार्चरात 11:19
शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†
अप्रैल 2017
6 अप्रैलशाम 4:32
शनि धनु 3°42′ पर वक्री
10 अप्रैलसुबह 11:13
बुध मेष 10°45′ पर वक्री
12 अप्रैलशाम 7:00
बुध अस्त (28 अप्रैल तक)†
13 अप्रैलसुबह 10:39
मंगल का वृषभ में प्रवेश
14 अप्रैलसुबह 8:32
सूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैलरात 10:19
शुक्र मीन 2°49′ पर मार्गी
28 अप्रैलसुबह 5:48
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
मई 2017
4 मईसुबह 4:33
बुध मेष 0°10′ पर मार्गी
15 मईसुबह 5:24
सूर्य का वृषभ में प्रवेश
27 मईसुबह 8:00
मंगल का मिथुन में प्रवेश
31 मईदोपहर 3:24
शुक्र का मेष में प्रवेश
31 मईरात 11:13
मंगल अस्त (17 सितंबर तक)†
जून 2017
4 जूनरात 2:22
बुध का वृषभ में प्रवेश
9 जूनरात 11:22
बुध अस्त (4 जुलाई तक)†
10 जूनरात 2:20
गुरु (बृहस्पति) कन्या 19°07′ पर मार्गी
15 जूनदोपहर 12:00
सूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जूनसुबह 5:21
बुध का मिथुन में प्रवेश
21 जूनसुबह 11:34
शनि का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
30 जूनरात 2:02
शुक्र का वृषभ में प्रवेश
जुलाई 2017
3 जुलाईसुबह 9:33
बुध का कर्क में प्रवेश
4 जुलाईदोपहर 12:07
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
11 जुलाईरात 9:26
मंगल का कर्क में प्रवेश
16 जुलाईरात 10:52
सूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुलाईशाम 4:48
बुध का सिंह में प्रवेश
26 जुलाईरात 11:36
शुक्र का मिथुन में प्रवेश
अगस्त 2017
13 अगस्तदोपहर 12:59
बुध सिंह 17°32′ पर वक्री
17 अगस्तसुबह 7:15
सूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अगस्तदोपहर 1:06
राहु का कर्क में प्रवेश (वक्री गति से)
18 अगस्तदोपहर 1:06
केतु का मकर में प्रवेश (वक्री गति से)
20 अगस्तदोपहर 3:41
बुध अस्त (3 सितंबर तक)†
21 अगस्तशाम 5:20
शुक्र का कर्क में प्रवेश
26 अगस्तरात 12:42
शनि वृश्चिक 27°05′ पर मार्गी
27 अगस्तदोपहर 2:56
मंगल का सिंह में प्रवेश
सितंबर 2017
3 सितंबरदोपहर 3:00
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
5 सितंबररात 11:29
बुध सिंह 4°19′ पर मार्गी
12 सितंबरदोपहर 1:13
गुरु (बृहस्पति) का तुला में प्रवेश
15 सितंबरशाम 5:00
शुक्र का सिंह में प्रवेश
17 सितंबरसुबह 7:08
सूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सितंबरशाम 4:39
मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†
21 सितंबररात 11:50
बुध अस्त (1 नवंबर तक)†
27 सितंबरसुबह 7:58
बुध का कन्या में प्रवेश
अक्टूबर 2017
10 अक्टूबरसुबह 4:54
शुक्र का कन्या में प्रवेश
13 अक्टूबररात 3:09
गुरु (बृहस्पति) अस्त (10 नवंबर तक)†
13 अक्टूबररात 11:31
मंगल का कन्या में प्रवेश
14 अक्टूबरसुबह 7:21
बुध का तुला में प्रवेश
17 अक्टूबररात 8:04
सूर्य का तुला में प्रवेश
26 अक्टूबररात 10:48
शनि का धनु में प्रवेश
नवंबर 2017
1 नवंबरसुबह 5:46
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
2 नवंबरसुबह 8:13
बुध का वृश्चिक में प्रवेश
3 नवंबरसुबह 7:30
शुक्र का तुला में प्रवेश
10 नवंबरसुबह 8:13
गुरु (बृहस्पति) का उदय (अस्त समाप्त)†
16 नवंबरशाम 7:51
सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
24 नवंबररात 9:23
बुध का धनु में प्रवेश
27 नवंबरसुबह 5:38
शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश
29 नवंबरसुबह 8:00
शुक्र अस्त (20 फ़रवरी तक)†
30 नवंबरदोपहर 12:50
मंगल का तुला में प्रवेश
दिसंबर 2017
3 दिसंबररात 8:33
बुध धनु 5°12′ पर वक्री
5 दिसंबरशाम 6:01
शनि अस्त (8 जनवरी तक)†
8 दिसंबररात 3:03
बुध अस्त (19 दिसंबर तक)†
11 दिसंबरसुबह 11:48
बुध का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)
16 दिसंबरसुबह 10:29
सूर्य का धनु में प्रवेश
19 दिसंबररात 1:57
बुध का उदय (अस्त समाप्त)†
21 दिसंबररात 2:01
शुक्र का धनु में प्रवेश
23 दिसंबरदोपहर 2:51
बुध वृश्चिक 18°54′ पर मार्गी
† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।
यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति
समझें
गोचर क्या है
गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।
वक्री और मार्गी
पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।
अस्त (दहन)
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।
निरयण राशियाँ
भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।
यह गणना कैसे हुई
NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।
पंचांग में और
- आजआज के पाँच अंग, शुभ-अशुभ समय और चौघड़िया।
- मासिक कैलेंडरपूरे मास की तिथियाँ, नक्षत्र और पर्व।
- पर्व और व्रतवर्ष भर के पर्व, व्रत, एकादशी और पूर्णिमा।
- मुहूर्त खोजेंरोज़ के कामों के लिए शुभ समय, कारण सहित।
- चौघड़ियादिन-रात के आठ-आठ भाग, अभी कौन-सा चल रहा है।
- राहु कालआज का राहु काल, गुलिक और यमगण्ड।
- पंचकआने वाले महीनों के पंचक, और ग्रंथ इनके बारे में क्या कहते हैं।
- भद्राभद्रा (विष्टि करण) कब है और उसका वास कहाँ है।
- संक्रान्तिवर्ष की बारह संक्रान्तियाँ, समय और पुण्य काल सहित।
- ग्रहणवर्ष के सूर्य और चन्द्र ग्रहण, स्पर्श-मोक्ष के समय और सूतक।
- तिथि परिवर्तककिसी भी अंग्रेज़ी तारीख की हिन्दू तिथि।
- जन्म तिथिअपनी जन्म तिथि और अगले वर्षों की तारीखें।
- नामाक्षरनक्षत्र-पद के अनुसार नाम के आरम्भिक अक्षर।
