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School of Vedic Sciences, FORE

पंचांग · गोचर

गोचर 2019: ग्रह कब राशि बदलते हैं

2019 में राहु 7 मार्च को मिथुन में, गुरु (बृहस्पति) 29 मार्च को धनु में, गुरु (बृहस्पति) 23 अप्रैल को वृश्चिक में, गुरु (बृहस्पति) 5 नवंबर को धनु में जाता है। नीचे हर ग्रह का हर राशि परिवर्तन, वक्री-मार्गी होना और अस्त-काल है।

1 जनवरी 2019 को ग्रह

निरयण (लाहिरी) राशि, और वह कब से कब तक है। किसी ग्रह पर क्लिक करें तो उसका पूरा वर्ष दिखेगा।

2019 का गोचर कैलेंडर

समय भारतीय मानक समय (IST) में। ये क्षण पृथ्वी पर हर जगह एक ही हैं। चन्द्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलता है, इसलिए उसकी सूची उसके अपने पृष्ठ पर है।

राशि परिवर्तनवक्री / मार्गीअस्त / उदय

जनवरी 2019

  • 1 जनवरीसुबह 9:50

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 1 जनवरीरात 8:43

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 6 जनवरीसुबह 9:37

    बुध अस्त (17 फ़रवरी तक)†

  • 14 जनवरीशाम 7:51

    सूर्य का मकर में प्रवेश

  • 19 जनवरीरात 2:32

    शनि का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 20 जनवरीरात 9:06

    बुध का मकर में प्रवेश

  • 29 जनवरीरात 11:28

    शुक्र का धनु में प्रवेश

फ़रवरी 2019

  • 5 फ़रवरीरात 11:47

    मंगल का मेष में प्रवेश

  • 7 फ़रवरीसुबह 10:10

    बुध का कुम्भ में प्रवेश

  • 13 फ़रवरीसुबह 8:48

    सूर्य का कुम्भ में प्रवेश

  • 17 फ़रवरीदोपहर 3:51

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 24 फ़रवरीरात 10:45

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 25 फ़रवरीसुबह 8:53

    बुध का मीन में प्रवेश

मार्च 2019

  • 5 मार्चरात 11:48

    बुध मीन 5°32′ पर वक्री

  • 7 मार्चसुबह 9:33

    राहु का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 7 मार्चसुबह 9:33

    केतु का धनु में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 8 मार्चसुबह 8:09

    बुध अस्त (21 मार्च तक)†

  • 15 मार्चसुबह 5:40

    सूर्य का मीन में प्रवेश

  • 15 मार्चसुबह 8:59

    बुध का कुम्भ में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 21 मार्चशाम 5:15

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 मार्चरात 3:45

    शुक्र का कुम्भ में प्रवेश

  • 22 मार्चदोपहर 3:05

    मंगल का वृषभ में प्रवेश

  • 28 मार्चशाम 7:29

    बुध कुम्भ 21°58′ पर मार्गी

  • 29 मार्चरात 8:23

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश

अप्रैल 2019

  • 10 अप्रैलरात 10:13

    गुरु (बृहस्पति) धनु 0°14′ पर वक्री

  • 12 अप्रैलसुबह 4:24

    बुध का मीन में प्रवेश

  • 14 अप्रैलदोपहर 2:09

    सूर्य का मेष में प्रवेश

  • 16 अप्रैलरात 1:05

    शुक्र का मीन में प्रवेश

  • 23 अप्रैलरात 12:41

    गुरु (बृहस्पति) का वृश्चिक में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 30 अप्रैलसुबह 5:50

    शनि धनु 26°24′ पर वक्री

मई 2019

  • 3 मईशाम 5:03

    बुध का मेष में प्रवेश

  • 7 मईसुबह 6:55

    मंगल का मिथुन में प्रवेश

  • 9 मईरात 3:32

    बुध अस्त (2 जून तक)†

  • 10 मईशाम 7:06

    शुक्र का मेष में प्रवेश

  • 15 मईसुबह 11:02

    सूर्य का वृषभ में प्रवेश

  • 18 मईरात 11:35

    बुध का वृषभ में प्रवेश

जून 2019

  • 2 जूनरात 12:17

    बुध का मिथुन में प्रवेश

  • 2 जूनरात 9:00

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 4 जूनसुबह 11:21

    शुक्र का वृषभ में प्रवेश

  • 15 जूनशाम 5:39

    सूर्य का मिथुन में प्रवेश

  • 21 जूनरात 2:27

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 22 जूनरात 11:23

    मंगल का कर्क में प्रवेश

  • 29 जूनरात 1:34

    शुक्र का मिथुन में प्रवेश

जुलाई 2019

  • 8 जुलाईसुबह 4:43

    बुध कर्क 10°20′ पर वक्री

  • 9 जुलाईरात 2:39

    शुक्र अस्त (20 सितंबर तक)†

  • 12 जुलाईरात 3:55

    मंगल अस्त (22 अक्टूबर तक)†

  • 14 जुलाईरात 1:34

    बुध अस्त (29 जुलाई तक)†

  • 17 जुलाईसुबह 4:33

    सूर्य का कर्क में प्रवेश

  • 23 जुलाईदोपहर 12:49

    शुक्र का कर्क में प्रवेश

  • 29 जुलाईरात 9:29

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 30 जुलाईसुबह 11:58

    बुध का मिथुन में प्रवेश (वक्री गति से)

अगस्त 2019

  • 1 अगस्तसुबह 9:28

    बुध मिथुन 29°49′ पर मार्गी

  • 3 अगस्तसुबह 6:01

    बुध का कर्क में प्रवेश

  • 9 अगस्तसुबह 4:47

    मंगल का सिंह में प्रवेश

  • 11 अगस्तशाम 7:25

    गुरु (बृहस्पति) वृश्चिक 20°23′ पर मार्गी

  • 16 अगस्तरात 8:39

    शुक्र का सिंह में प्रवेश

  • 17 अगस्तदोपहर 1:02

    सूर्य का सिंह में प्रवेश

  • 20 अगस्तरात 11:27

    बुध अस्त (22 सितंबर तक)†

  • 26 अगस्तदोपहर 2:07

    बुध का सिंह में प्रवेश

सितंबर 2019

  • 10 सितंबररात 1:41

    शुक्र का कन्या में प्रवेश

  • 11 सितंबरसुबह 4:59

    बुध का कन्या में प्रवेश

  • 17 सितंबरदोपहर 1:03

    सूर्य का कन्या में प्रवेश

  • 18 सितंबरदोपहर 2:50

    शनि धनु 19°47′ पर मार्गी

  • 20 सितंबरसुबह 6:05

    शुक्र का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 22 सितंबररात 12:14

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 25 सितंबरसुबह 6:34

    मंगल का कन्या में प्रवेश

  • 29 सितंबरदोपहर 12:55

    बुध का तुला में प्रवेश

अक्टूबर 2019

  • 4 अक्टूबरसुबह 5:15

    शुक्र का तुला में प्रवेश

  • 18 अक्टूबररात 1:04

    सूर्य का तुला में प्रवेश

  • 22 अक्टूबररात 8:55

    मंगल का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 23 अक्टूबररात 11:13

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 28 अक्टूबरसुबह 8:33

    शुक्र का वृश्चिक में प्रवेश

  • 31 अक्टूबररात 9:11

    बुध वृश्चिक 3°31′ पर वक्री

नवंबर 2019

  • 5 नवंबरसुबह 5:25

    गुरु (बृहस्पति) का धनु में प्रवेश

  • 6 नवंबरसुबह 8:06

    बुध अस्त (17 नवंबर तक)†

  • 7 नवंबरदोपहर 3:54

    बुध का तुला में प्रवेश (वक्री गति से)

  • 10 नवंबरदोपहर 2:26

    मंगल का तुला में प्रवेश

  • 17 नवंबररात 12:52

    सूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

  • 17 नवंबरदोपहर 2:35

    बुध का उदय (अस्त समाप्त)†

  • 21 नवंबररात 12:41

    बुध तुला 17°28′ पर मार्गी

  • 21 नवंबरदोपहर 12:23

    शुक्र का धनु में प्रवेश

दिसंबर 2019

  • 5 दिसंबरसुबह 10:35

    बुध का वृश्चिक में प्रवेश

  • 14 दिसंबररात 1:12

    गुरु (बृहस्पति) अस्त (10 जनवरी तक)†

  • 15 दिसंबरशाम 5:59

    शुक्र का मकर में प्रवेश

  • 16 दिसंबररात 3:55

    बुध अस्त (31 जनवरी तक)†

  • 16 दिसंबरदोपहर 3:28

    सूर्य का धनु में प्रवेश

  • 25 दिसंबरदोपहर 3:46

    बुध का धनु में प्रवेश

  • 25 दिसंबररात 9:30

    मंगल का वृश्चिक में प्रवेश

  • 28 दिसंबरसुबह 5:26

    शनि अस्त (30 जनवरी तक)†

† परम्परा के अनुसार भिन्नता। अस्त की दूरी-सीमाएँ ग्रंथों और पंचांगों में थोड़ी अलग हैं, और कुछ पंचांग राहु-केतु की मध्यम के स्थान पर स्पष्ट (true) गति लेते हैं; इससे राहु-केतु के राशि परिवर्तन की तारीख कुछ सप्ताह तक अलग हो सकती है।

यह भी देखें: अपनी कुंडली पर गोचर · गोचर (शब्दकोश) · साढ़ेसाती · अयनांश · संक्रान्ति

समझें

गोचर क्या है

गोचर का अर्थ है ग्रहों का चलना: आकाश में हर ग्रह राशि-चक्र में आगे बढ़ता है, और जब वह एक राशि की सीमा पार करता है तो उसे उस ग्रह का राशि परिवर्तन (संक्रमण) कहते हैं। यह पृष्ठ केवल वही बताता है कि कौन-सा ग्रह कब कहाँ है। शास्त्रीय पद्धति में गोचर को व्यक्ति की जन्म-राशि (चन्द्र राशि) से गिनकर पढ़ा जाता है; अपनी कुंडली पर आज का गोचर देखने के लिए गोचर उपकरण खोलें।

वक्री और मार्गी

पृथ्वी से देखने पर मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि कभी-कभी कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलते दिखते हैं। इसे वक्री गति कहते हैं; जिस क्षण ग्रह रुककर मुड़ता है वह स्तम्भन (स्टेशन) है, और फिर आगे बढ़ना मार्गी होना। यह पृथ्वी और ग्रह की कक्षाओं की सापेक्ष गति का दृश्य प्रभाव है। सूर्य और चन्द्रमा कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु (मध्यम) सदा पीछे चलते हैं।

अस्त (दहन)

जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत पास होता है तो सूर्य की चमक में वह दिखाई नहीं देता; ग्रंथ इसे अस्त कहते हैं, और फिर दिखने लगना उदय। सूर्य सिद्धान्त हर ग्रह के लिए दूरी की सीमा देता है। यहाँ प्रयुक्त सीमाएँ: मंगल 17°, बुध 14° (वक्री में 12°), गुरु 11°, शुक्र 10° (वक्री में 8°), शनि 15°। पंचांग गुरु और शुक्र के अस्त-काल को विवाह जैसे संस्कारों के मुहूर्त में छोड़ते हैं।

निरयण राशियाँ

भारतीय पंचांग राशियों को तारों के सापेक्ष (निरयण) गिनते हैं। पश्चिमी (सायन) राशियाँ इनसे लगभग 24° आगे हैं, इसलिए वहाँ छपी तारीखें यहाँ से लगभग तीन सप्ताह पहले की होती हैं। यहाँ लाहिरी अयनांश प्रयुक्त है।

यह गणना कैसे हुई

NASA JPL के DE421 आँकड़ों से हर ग्रह की स्पष्ट भू-केन्द्रीय स्थिति, लाहिरी अयनांश घटाकर। राशि-सीमा पार करने, गति शून्य होने और सूर्य से दूरी सीमा के बराबर होने के क्षण द्विभाजन (bisection) से एक सेकंड से कम की शुद्धता तक निकाले गए हैं। अयनांश के छोटे अन्तर से धीमे ग्रहों (विशेषकर शनि) का समय दूसरे पंचांगों से कुछ घंटे अलग हो सकता है।

पंचांग में और